‘मन की बात’ में करें चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी के खिलाफ चर्चा, संसदीय समिति ने की पीएम मोदी से सिफारिश

राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार समिति ने रिपोर्ट में कहा कि प्रधानमंत्री को चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी की समस्या पर संज्ञान लेते हुए अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी इस विषय को शामिल कर बताना चाहिए कि इससे निपटने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं.
Discuss against child pornography in Mann Ki Baat, ‘मन की बात’ में करें चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी के खिलाफ चर्चा, संसदीय समिति ने की पीएम मोदी से सिफारिश

इंटेरनेट के जरिए अश्लीलता खासकर, सोशल मीडिया पर ‘चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी’ के व्यापक प्रसार की समस्या से निपटने के लिए राज्यसभा सदस्यों की एक समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसके खिलाफ विभिन्न देशों को  ‘अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस’ की तर्ज पर एकजुट करने का अनुरोध किया है. राज्यसभा में कांग्रेस सांसद जयराम रमेश की अध्यक्षता वाली समिति ने शनिवार को सभापति एम वेंकैया नायडू को सौंपी अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है.

मन की बात में इसकी चर्चा करें पीएम मोदी

उपराष्ट्रपति कार्यालय ने ट्वीट कर बताया कि रमेश सहित समिति के अन्य सदस्यों ने सोशल मीडिया पर पोर्नोग्राफ़ी के प्रसार, इससे बच्चों पर पड़ने वाले प्रभावों और इसे रोकने के उपाय से जुड़ी रिपोर्ट सभापति नायडू को सौंपी है. राज्यसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार समिति ने रिपोर्ट में कहा कि प्रधानमंत्री को चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी की समस्या पर संज्ञान लेते हुए अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी इस विषय को शामिल कर बताना चाहिए कि इससे निपटने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं.

समिति ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि जिस प्रकार से पीएम ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक पहल करते हुए अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस का गठन किया है, उसी तरह चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी के संकट से निपटने के लिए भी उन्हें ‘वैश्विक राजनीतिक गठजोड़’ बनाने की पहल करना चाहिए. समिति ने सुझाव दिया है कि पीएम इस दिशा में जी-20 या संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में कारगर पहल कर सकते हैं.

राज्यसभा के पिछले साल 250वें सत्र के दौरान अन्नाद्रमुक सांसद एस विजिला सत्यनाथन ने इंटेरनेट ख़ासकर सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री की बच्चों तक आसान पहुंच का मुद्दा उठाया था. इस पर पूरे सदन ने एक स्वर से गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सभापति के माध्यम से सरकार से कारगर कदम उठाने की मांग की थी. सभापति ने इस समस्या से निपटने के उपाय सुझाने के लिए रमेश की अगुवाई में 14 सदस्यीय समिति का गठन कर एक महीने में रिपोर्ट देने को कहा था.

संसदीय समिति ने सौंपी 40 सुझावों वाली रिपोर्ट

समिति ने इस विषय पर तीन बैठकें कर विस्तार से चर्चा के बाद 40 सुझावों वाली इस रिपोर्ट में सिफारिश की है कि सरकार को यौन अपराधों से बच्चों को बचाने वाले पोक्सो कानून, सूचना प्रौद्योगिकी कानून और भारतीय दंड संहिता में जरूरी बदलाव करने की तुरंत पहल करनी चाहिए. साथ ही राज्य सरकारों को भी सिफारिश की है कि वे राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को इस समस्या से निपटने के लिए सजगता से कार्रवाई करने में सक्षम बनाएं.

समिति ने ट्विटर और फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इससे जुड़े पक्षकारों से विचार विमर्श के बाद पोक्सो कानून में चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी की परिभाषा को व्यापक बनाने और इसकी ऑनलाइन निगरानी के तंत्र को मजबूत बनाने के तकनीकी सुझाव भी दिए हैं. इनमें भारत में उपलब्ध सभी संचार उपकरणों में ऐसे एप्लिकेशन को अनिवार्य बनाने को कहा है जिसकी मदद से बच्चों तक अश्लील सामग्री की पहुंच पर अभिभावक सतत निगरानी रख सकें.

समिति ने ऑनलाइन फिल्म प्रसारण करने वाले नेटफ़्लिक्स और ट्विटर एवं फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को वयस्कों के लिए प्रसारित होने वाली सामग्री का अलग स्थान तय करने का सुझाव भी दिया है, जिससे बच्चों को इसकी पहुंच से दूर रखा जा सके.

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