शेल्‍टर होम कांड की चश्मदीद लड़कियां आखिर कहां हुईं गायब..नीतीश के ‘सुशासन’ पर फिर उठे सवाल

मोकामा बालिका सुधार केंद्र की घटना और मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड से इसके तार जुड़ने की वजह से नीतीश कुमार के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं. चुनावी मौसम में विपक्षी नेता इस मुद्दे को जोरशोर से जनता के बीच लेकर जाएंगे.

पटनाबिहार में सुशासन पर फिर से सवाल उठे हैं, नीतीश कुमार की सरकार और पुलिस फिर कठघरे में है. मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड की जांच की सुलगती आंच के बीच पटना के मोकामा स्थित एक और बालिका सुधार गृह में सेंध लगी है. मोकामा के नाजरथ अस्पताल की ओर से संचालित इस बालिका सुधार गृह से 7 लड़कियां फरार हो गई हैं. इनमें से 5 मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड की पीड़ित लड़कियां हैं. इसलिए ये मामला हर लिहाज से संवेदनशील हो जाता है और एक साथ कई सवाल भी खड़े करता है. आखिर मुजफ्फनगर कांड के बाद सरकारी मशीनरी पूरे प्रदेश में चल रहे बालिका सुधार गृह की सुरक्षा को लेकर इतनी लापरवाह कैसे हो सकती है? खास कर मोकामा के बालिका सुधार गृह की सुरक्षा में सेंधमारी कैसे हुई, जहां मुजफ्फरपुर की ‘शर्मनाक’ घटना की चश्मदीद लड़कियों को कड़ी निगरानी में रखा गया था?

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मुजफ्फरपुर के बालिका संरक्षण गृह में बच्चियों के यौन शोषण का मामला जून 2018 में सामने आया था.

सवाल ये भी क्या मुजफ्फरपुर कांड की पीड़िता के गायब होने में कोई बड़ी साजिश तो नहीं है? जिस घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी कर रही हो, उस घटना के गवाहों का गायब होना बेहद ही गंभीर मामला है. बहुचर्चित मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड को लेकर बिहार में शुरू से ही सियासत होती रही है और नेताओं की भूमिका पर उंगलियां उठती रही हैं. विपक्ष एकसुर में ये आरोप लगाता रहा है कि मुजफ्फरपुर कांड के आरोपियों को नीतीश कुमार और उनकी सरकार का संरक्षण हासिल है. विपक्ष के इन आरोपों को दरकिनार भी कर दिया जाए तो सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान के दौरान कई मौकों पर नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ पर सवाल उठाए हैं.

शेल्टर कांड बढ़ाएगा नीतीश का संकट?

मोकामा बालिका सुधार केंद्र की घटना और मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड से इसके तार जुड़ने की वजह से नीतीश कुमार के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं. चुनावी मौसम में विपक्षी नेता इस मुद्दे को जोरशोर से जनता के बीच लेकर जाएंगे। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड में पहले से ही सरकार की मिलीभगत का आरोप लगा रही आरजेडी और कांग्रेस अब खुलकर ये कहेगी कि घटना की चश्मदीद लड़कियों को इसलिए गायब कर दिया गया कि सरकार इस मामले में कुछ छिपाने की कोशिश कर रही है. इससे पहले आरजेडी नेता तेजस्वी यादव कई मौकों पर ये कह चुके हैं मुजफ्फरपुर शेल्टर कांड में सीबीआई के जांच अधिकारी का इसलिए तबादला कर दिया गया क्योंकि जांच में नीतीश कुमार के खिलाफ साक्ष्य मिले थे और इसी आधार पर और सूबतों की तलाश की जा रही थी। विपक्षी नेताओं के साथ इस मामले की सुनवाई के दौरान समय-समय पर बिहार सरकार के रवैये पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से सवाल खड़ा किया जाना भी नीतीश कुमार और उनकी सरकार के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट कर चुकी है तल्ख टिप्पणी

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट कई बार बिहार सरकार की कार्यप्रणाली पर तल्ख टिप्पणी कर चुकी है। कुछ दिनों पहले भी सुप्रीम अदालत ने इस मसले की सुनवाई के दौरान कहा था कि ‘बच्चों के साथ इस तरह का बर्ताव कैसे किया जा सकता है. अब बहुत हो चुका, सरकार आप चला रहे हैं, हम नहीं, लेकिन सवाल यह उठता है कि आप बिहार में किस तरह से सरकार चला रहे हैं?’

2018 में हुआ था मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड

मुजफ्फरपुर के बालिका संरक्षण गृह में बच्चियों के यौन शोषण का मामला जून 2018 में सामने आया था. इससे पहले पुलिस ने आश्रय गृह चलाने वाले एनजीओ के मालिक ब्रजेश ठाकुर समेत कई लोगों को घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया था. इसके बाद जुलाई में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आते गए. जांच में सामने आया कि नीतीश सरकार में समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा के पति के आश्रय गृह के मालिक ब्रजेश ठाकुर से गहरे संबंध थे. बाद में मंत्री मंजू वर्मा को इस प्रकरण में इस्तीफा देना पड़ा था और फिर उन्होंने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था.

केस दिल्ली ट्रांसफर, सीबीआई के पास अहम सबूत

पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड से जुड़े केस को मुजफ्फरपुर कोर्ट से दिल्ली कोर्ट ट्रांसफर करने का आदेश दिया था, इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 6 महीने के अंदर पूरी करने को भी कहा था. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस केस की सुनवाई दिल्ली के साकेत कोर्ट स्थित स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में कराने के आदेश दिए थे. उन्होंने मामले की रोजाना सुनवाई के आदेश भी दिए थे. केस की जांच कर रही सीबीआई ने जांच में कई बड़े खुलासे किए हैं. 19 दिसंबर 2018 को मुजफ्फरपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट में 21 आरोपियों के खिलाफ दाखिल सीबीआई चार्जशीट में ये कहा गया है कि आरोपी ब्रजेश ठाकुर शेल्टर होम में लड़कियों को अश्लील डांस कराने के बाद दुष्कर्म करता था. 73 पन्ने की चार्जशीट में सीबीआई ने ब्रजेश ठाकुर, रवि रौशन, विकास कुमार, दिलीप कुमार वर्मा, रोजी रानी समेत अन्य आरोपियों पर कई गंभीर और संगीन आरोप लगाए हैं. चार्जशीट में दो आरोपियों को ट्रेसलेस बताया है.