‘सरदार पटेल को कैबिनेट में नहीं चाहते थे नेहरू’, वीपी मेनन के हवाले से बोले विदेश मंत्री जयशंकर

जयशंकर ने कहा कि किताब से मुझे पता लगा कि नेहरू ने कैबिनेट की शुरुआती सूची से पटेल का नाम बाहर कर दिया था. जाहिर है कि इस मुद्दे पर खासी बहस होना चाहिए.

लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू अपने कैबिनेट में शामिल नहीं करना चाहते थे. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सरदार पटेल के सहयोगी रहे वीपी मेनन की ऑटोबायोग्राफी के विमोचन के अवसर पर बुधवार को ये बात कही. उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने 1947 में अपनी कैबिनेट में सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम शामिल नहीं किया था.

एस जयशंकर ने ट्वीट कर नारायणी बसु की लिखी वीपी मेनन की ऑटोबायोग्राफी के विमोचन की जानकारी दी. इस समारोह में शामिल जयशंकर ने कहा कि किताब से मुझे पता लगा कि नेहरू ने कैबिनेट की शुरुआती सूची से पटेल का नाम बाहर कर दिया था. जाहिर है कि इस मुद्दे पर खासी बहस होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि पटेल के मेनन और और नेहरू के मेनन में अंतर दिखाई देता है. सही मायने में एक ऐतिहासिक शख्सियत के साथ न्याय हुआ. लेखिका को यह तथ्य सामने लाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी होगी.

इतिहास फिर से लिखने की जरूरत

विदेश मंत्री ने इस मौके पर इतिहास को फिर से लिखे जाने की जरूरत पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि पुराने समय में इतिहास को राजनीति के लिए लिखा गया था. अब इसे ईमानदारी से ठीक किए जाने का वक्त आ गया है. मेनन के मुताबिक, सरदार पटेल के आखिरी दिनों में उनकी याददाश्त को बढ़ाने की कोशिश की गई थी. मैं यह इसलिए जानता हूं, क्योंकि मैंने इसे देखा है. कई दफे मैं खुद इसका शिकार हो चुका हूं.

रामचंद्र गुहा ने बताया मिथ

इस किताब और विदेश मंत्री के बयान को नेहरू पर रिसर्च करने वाले लेखक रामचंद्र गुहा ने मिथ बताया. गुहा ने श्रीनाथ राघवन के आर्टिकल का हवाला देते हुए मंत्री को फेक न्यूज फैलाने से परहेज करने की सलाह दे डाली. इस पर दवाब देते हुए एस जयशंकर ने ट्वीट किया कि कुछ विदेश मंत्री किताब पढ़ते हैं. यह कुछ प्रोफेसर के लिए भी अच्छी आदत हो सकती है. उन्होंने नारायणी बसु की किताब पढ़ने के लिए भी कहा.

कौन थे वीपी मेनन

आजादी से पहले ही वीपी मेनन (1894-1966) भारतीय सिविल सेवा के सीनियर अफसर हो गए थे. देश के गृह मंत्री सरदार पटेल के साथ काम करते थे. संवैधानिक सलाहकार, राजनीतिक सुधार आयुक्त जैसे पदों पर भी उन्होंने योगदान किया था. तमाम रियासतों को जोड़कर देश के एकीकरण करने के अभियान में सरदार पटेल को मेनन का सहयोग मिला था.

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