6 साल से फ्रीजर में रखा आशुतोष महाराज का शरीर, भक्‍तों को विश्‍वास- समाधि में हैं, खुद उठेंगे

जालंधर की सिविल सर्जन डॉ गुरिंदर चावला का कहना है कि आशुतोषजी के शव में ज़रा सी भी खराबी नहीं आई है. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद तीन डॉक्टरों का पैनल हर 6 महीने में शव का चेकअप करता है.

पंजाब के लुधियाना में नूरमहल डेरा में आशुतोष महाराज के मृत शरीर को 6 साल बाद भी उनके समर्थकों ने संभालकर रखा है. आज से ठीक 6 साल पहले, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संत आशुतोष महाराज को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था. आशुतोष महाराज के मृत शरीर को अभी तक संभाल कर क्‍यों रखा गया है? आइए आपके बताते हैं.

28 जनवरी, 2014 को उन्हें सीने में दर्द उठा. लुधियाना के सद्गुरु प्रताप अपोलो अस्पताल से एंबुलेंस बुलाई गई. डॉक्टरों ने जब आशुतोष महाराज को देखा तो उन्हें मृत घोषित कर दिया. उन्हे क्लीनिकली डेड घोषित किए हुए 6 साल से ज्यादा हो गए लेकिन आज भी उनका शरीर फ्रीजर में सुरक्षित रखा है. जिस कमरे में उनका शव रखा गया है, वहां 24 घंटे उनके भक्त सुरक्षा में खड़े रखते हैं. दरअसल भक्तों का मानना है कि आशुतोषजी गहरी समाधि में हैं और वो एक दिन खुद वापस आ जाएंगे. वीआईपी लोगों को भी कमरे में जाने नहीं दिया जाता. पंजाब पुलिस के जवान डेरे के चारो ओर सुरक्षा में खड़े रहते हैं.

हर 6 महीने में होता है चेकअप

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान मैनेजमेंट के 3 से 4 मुख्य सदस्य ही कमरे के अंदर जा सकते हैं. इनके अलावा सरकारी और गैर सरकारी डाक्टर्स को रूटीन चेकअप के लिए अंदर जाने की अनुमति है. जालंधर की सिविल सर्जन डॉ गुरिंदर चावला का कहना है कि आशुतोषजी के शव में ज़रा सी भी खराबी नहीं आई है. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद तीन डॉक्टरों का पैनल हर 6 महीने में शव का चेकअप करता है.

चेकअप के दौरान डाक्टर्स देखते हैं कि कहीं उनका शव खराब तो नहीं हो रहा. पैनल ने हाल ही में दिसंबर 2018 में उनके शव का निरीक्षण किया. संस्थान ने अपने स्तर पर भी डाक्टर्स की टीम बनाई है जो हर चार दिन में शव का परीक्षण करती है. इस टीम में दिल्ली के कुछ विशेषज्ञ शामिल हैं जो चार रातों में आशुतोष महाराज के शव का चेकअप करती है.

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पंजाब के मुख्यंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नि और पटियाला से सांसद प्रनीत कौर ने पिछले ही साल डेरा का दौरा किया था. पिछले 4 से 5 सालों में देखा गया है कि संस्थान और संस्थान से जुड़े लोग मोदी सरकार की नीतियों की पुरजोर समर्थन करते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारों का भी समर्थन करते अक्सर टीवी डिबेट में दिखाई पड़ते हैं.

कौन है आशुतोष महाराज?

आषुतोष महाराज का जन्म बिहार के दरभंगा में साल 1946 में हुआ था. उनका असली नाम महेश झा है. जानकारी के मुताबिक शादी के 18 महीने बाद ही इन्होंने अपनी पत्‍नी और एक बच्चे को छोड़ दिया और सतपाल महाराज से दीक्षा ली. सतपाल महाराज को मानव उत्थान सेवा समिति के संस्थापक तौर पर जाना जाता है. 1983 में आशुतोष महाराज ने अपने एक अलग आश्रम की स्थापना की.

पहले आशुतोष महाराज गांवों में जाकर सत्संग किया करते थे. बाद में उन्होंने नूरमहल सिटी में 16 मरला हाउस खरीदा. आज जालंधर में करीब 40 एकड़ से ज्यादा जमीन पर फैला हुआ है. देशभर में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के करीब 100 केंद्र मौजूद हैं. साल 1991 उन्होंने दिव्य ज्योति जागरण समिति की स्थापना की. इसका मुख्यालय दिल्ली को बनाया गया.

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