पाकिस्तान में विस्फोट और उत्तराखंड में वकीलों की हड़ताल, मजाक है क्या: सुप्रीम कोर्ट

उत्तराखंड के तीन जिलों में पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से काम कर रहे वकील आमतौर पर पड़ोसी देशों में होने वाली घटनाओं को लेकर हड़ताल पर चले जाते थे.
Supreme Court slammed advocates, पाकिस्तान में विस्फोट और उत्तराखंड में वकीलों की हड़ताल, मजाक है क्या: सुप्रीम कोर्ट

पाकिस्‍तान के स्‍कूल में बम विस्‍फोट हो और उत्‍तराखंड के वकील हड़ताल पर चले जाएं, बात सुनने में जरा अजीब लगती है, लेकिन ये कोई मजाक नहीं है, एकदम सच है. इस तरह के अजीबोगरीब कारणों के चलते हड़ताल पर जाने वाले वकीलों को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते कहा, ‘मजाक है क्‍या’.

उत्तराखंड के तीन जिलों में पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से काम कर रहे वकील आमतौर पर पड़ोसी देशों में होने वाली घटनाओं को लेकर हड़ताल पर चले जाते थे. जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के पहुंचा तो अदालत ने कहा, ‘यह कोई मजाक है क्या.’

सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में ऐसे आया मामला
सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में यह मामला तब आया आया, जब वह उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह में नगर पिछले 35 साल से शनिवार के दिन वकीलों की बेवजह हड़ताल और बहिष्‍कार को अवैध ठहराया गया था.

25 सितंबर, 2019 के अपने फैसले में हाईकोर्ट ने विधि आयोग की 266वीं रिपोर्ट का उल्लेख किया था, जिसमें वकीलों की ओर से हड़ताल के कारण कामकाज न हो पाने के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहा गया कि वकीलों का यह रवैया अदालतों के कामकाज को प्रभावित करता है.

इस वजह से अदालतों में मुकदमों की फाइलों का पहाड़ खड़ा हो रहा है. 2012 से 2016 के लिए उत्तराखंड के संबंध में हाईकोर्ट की ओर से विधि आयोग को भेजी गई जानकारी के अनुसार, देहरादून जिले में इस अवधि के दौरान 455 दिनों के लिए अधिवक्ता हड़ताल पर रहे, जबकि हरिद्वार जिले में 515 दिन वकीलों ने हड़ताल की.

आयोग कि रिपोर्ट का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि वकील, ”पाकिस्तान के एक स्कूल में बम विस्फोट, श्रीलंका के संविधान में संशोधन, अंतर्राज्‍यीय नदी जल विवाद, अधिवक्ता की हत्या/हमला, नेपाल में भूकंप, वकीलों के संबंधियों की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए, एकजुटता व्यक्त करते हुए हड़ताल पर चले गए.”

इतना ही नहीं, वकीलों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं के आंदोलनों को नैतिक समर्थन, भारी बारिश और यहां तक कि कवि-सम्मलेन के लिए भी हड़ताल की गई.

‘हर जगह की यही है हालत’
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा और एमआर शाह की पीठ के समक्ष अब यह मामला आया है. सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह देश में हर जगह हो रहा है. स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना शुरू करने के लिए यह एक उचित मामला है. बार एसोसिएशन कैसे कह सकता है कि वो हड़ताल जारी रखेगी?

पीठ ने कहा, “हालात खराब हो गए हैं. हाईकोर्ट का आदेश पूरी तरह से उचित है. हम इस तरह की चीजों की अनुमति नहीं दे सकते. हर कोई हड़ताल पर जा रहा है. आज, देश के हर हिस्से में हड़ताल चल रही है. हमें अब बहुत कठोर होना चाहिए.”

पीठ ने आगे कहा कि आप कैसे कह सकते हैं कि हर शनिवार को हड़ताल रहेगी? आप एक मजाक कर रहे हैं. अधिवक्ता के परिवार के सदस्य की मृत्यु हो जाती है और सारे वकील हड़ताल पर चले जाते हैं. यह क्या है? देहरादून के एक वकील के निकाय की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए पीठ ने ये बातें कहीं.

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