चीन की हड़पचाल के 22 शिकार, अगला नंबर फिलीपींस का, ऐसे बचने की है उम्मीद

ताजा हालात ये हैं कि फिलीपींस (Philippines) को आशंका है कि चीनी सेना उसके नौसैनिक जहाजों पर हमला कर सकती है. इस स्थिति में सिर्फ अमेरिका पर फिलीपींस की उम्मीद टिकी है.

चीन की हड़पचाल के 22 देश शिकार हैं. अगला नंबर फिलीपींस का है जिसके एक द्वीप पर चीन (China) की गिद्ध नजर है. जिसे वो कई दशकों से हड़पना चाहता है. लेकिन अब उस मुल्क ने चीन के खिलाफ आर-पार की ठान ली है. आखिरी चेतावनी दे दी है.

साउथ चाइना सी (South China Sea) में चीन जिस तरह अपने विस्तारवादी एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है वो एक देश की संप्रभुता के लिए हर दिन खतरा बनता जा रहा है. वो देश है फिलीपींस. हालात इतने बदतर हो गए हैं कि चीन की ज्यादतियों से तंग फिलीपींस के सब्र का बांध टूट गया है. विदेश मंत्री टेओडोरो लोकसिन तो चेतावनी तक दे चुके हैं कि अगर चीन ने फिलीपींस पर हमला किया तो वो अमेरिकी सेना बुला लेंगे.

ताजा हालात ये हैं कि फिलीपींस को आशंका है कि चीनी सेना उसके नौसैनिक जहाजों पर हमला कर सकती है. इस स्थिति में सिर्फ अमेरिका पर फिलीपींस की उम्मीद टिकी है. अमेरिका-फिलीपींस के बीच 1951 में रक्षा समझौते हुआ था. इसमें दोनों देशों ने हमला होने पर एक-दूसरे की मदद का करार किया था.

चीन के लिए समझौते का कोई मतलब नहीं

ऐसा पहली बार हो रहा है कि मनीला इस समझौते के तहत अमेरिका के साथ जाने को तैयार है. क्योंकि ऐसा ही समझौता सात दशकों से फिलीपींस और चीन के बीच भी है. इस समझौते में भी युद्ध होने पर एक दूसरे की मदद का करार है. लेकिन जमीन खोर जिनपिंग के लिए कोई समझौता मायने नहीं रखता. जिनपिंग का एक ही एजेंडा है एक ही चाल है और वो है हड़पचाल. चीन की नजर फिलीपींस के थिटु आईलैंड पर है.

थिटु आइलैंड को लेकर विवाद

साउथ चाइना सी में फिलीपींस और चीन के बीच थिटु आइलैंड को लेकर ही लंबे समय से विवाद है. थिटु आईलैंड को चीन अपना हिस्सा बताता है, जबकि इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने भी 2016 में थिटु आइलैंड को फिलीपींस का ही हिस्सा माना था. बावजूद इसके चीन की नेवी फिलीपींस के मछुआरों को इस समुद्री क्षेत्र में आने से रोकती है और धमकाती है. फिलीपींस जानता है कि सैन्य और आर्थिक शक्ति के मामले में वो चीन के सामने कुछ भी नहीं है. लेकिन देश की संप्रभुता बचाने के लिए वो चीन के सामने डटकर खड़ा है.

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