राहुल गांधी के इस ट्वीट पर स्मृति ईरानी ने कहा- ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’

स्मृति ईरानी ने कहा, "2011 में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष होने के नाते उस वक्त की महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष मीनाक्षी लेखी ने महिला अधिकारियों को कानूनी मदद की थी, यह अपने आप में गर्व की बात है."
rahul gandhi tweet, राहुल गांधी के इस ट्वीट पर स्मृति ईरानी ने कहा- ‘बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना’

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में महिला अधिकारियों को सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन देने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा, “सेना में पुरुष और महिलाएं समान सैनिकों के रूप में काम करते हैं, ऐसे में लिंग के आधार पर महिलाओं के साथ अलग व्यवहार वास्तव में पूरी सेना के लिए एक संघर्ष के समान है.”

कोर्ट के इस फैसले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरते हुए एक ट्वीट किया. इसके बाद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल पर तंज कसते हुए लिखा कि ‘आदरणीय बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाने.’

राहुल ने ट्वीट करके कहा कि ‘मैं भारत की महिलाओं को मुबारकबाद देता हूं कि वह डटकर खड़ी हुईं और भाजपा सरकार को गलत साबित किया.’


वहीं, स्मृति ईरानी ने ट्वीट करके राहुल गांधी को बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना तक कह दिया. उन्होंने ट्वीट किया, “2011 में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष होने के नाते उस वक्त की महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष मीनाक्षी लेखी ने महिला अधिकारियों को कानूनी मदद की थी, यह अपने आप में गर्व की बात है. राहुल गांधी का आज का बयान बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना से अधिक कुछ नहीं.”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बल में ‘लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने’ के लिए मानसिकता बदलने की आवश्यकता पर जोर देते हुए अपने निर्णय में कहा कि महिला अधिकारियों को सेना में स्थायी कमीशन (पीसी) मिलना चाहिए.

सर्वोच्च न्यायालय ने इस आदेश को लागू करने के लिए केंद्र को तीन महीने का समय दिया. न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि महिला अधिकारियों के पीसी से इनकार करने का कोई आधार नहीं है, भले ही उन्होंने 14 साल के नियम पूरे किए हों.

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने प्रमुख महिला अधिकारियों कैप्टन तान्या शेरगिल और कैप्टन मधुमिता के उदाहरण देते हुए लेह, उधमनगर आदि जगहों में काफिला कमांडर के रूप में महिला अधिकारियों के कार्य का भी जिक्र किया.

शीर्ष अदालत ने कहा कि महिला सेना अधिकारियों को स्थायी कमीशन (पीसी) देने के लिए 2019 की केंद्र सरकार की नीति का निर्णय सभी महिला अधिकारियों पर लागू होगा.

यह इसे चुनने वाली किसी भी महिला अधिकारी के लिए लागू होगा और 14 साल की सेवा या उससे ज्यादा समय तक सेवा देने वाली सभी महिलाओं के लिए होगा.

शीर्ष न्यायालय ने कहा कि यह नई नीति सभी शार्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) महिला अधिकारियों को लाभ देगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “14 वर्ष से कम और साथ ही 14 वर्ष से अधिक की सेवा वाले एसएससी महिला अधिकारियों को पीसी प्रदान किया जाएगा.”

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