घाटी को भड़कानेवाले होंगे जम्मू-कश्मीर से बाहर, अलगाववादी नेता दूसरे राज्यों की जेल में होंगे बंद

कश्मीर के तनावपूर्ण हालात के बीच घाटी के अलगाववादी नेताओं को दूसरे राज्यों की जेलों में भेजे जाने की तैयारी हो रही है. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पिछले कुछ दिनों में कई अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया गया है. केंद्र सरकार कश्मीर में अनुच्छेद 35 ए को खत्म करने की कवायद में है. […]

कश्मीर के तनावपूर्ण हालात के बीच घाटी के अलगाववादी नेताओं को दूसरे राज्यों की जेलों में भेजे जाने की तैयारी हो रही है. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पिछले कुछ दिनों में कई अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया गया है. केंद्र सरकार कश्मीर में अनुच्छेद 35 ए को खत्म करने की कवायद में है. आशंका जताई जा रही है कि इसकी प्रतिक्रिया में ये अलगाववादी नेता आम कश्मीरियों को हिंसा और उपद्रव के लिए भड़का सकते हैं. पुलवामा हमले के बाद की स्थितियों में घाटी का मौहाल पहले से ही तनावपूर्ण है. ऐसे में अनुच्छेद 35ए को खत्म करने की स्थिति में घाटी का माहौल और भी संवेदनशील हो सकता है.

जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने हुर्रियत कांफ्रेंस (गिलानी), जेकेएलएफ और जमात ए इस्लामी के कई नेताओं को इसी आशंका के मद्देनजर गिरफ्तार कर लिया है. जेकेएलएफ के सदर यासीन मलिक को माईसुमा स्थित उनके आवास से अरेस्ट किया गया है. हुर्रियत गिलानी धड़े के गुलाम नबी सुमझी को बिजबहरा स्थित उनके आवास से पकड़ा गया. इसके अलावा जमीयत अलहे हदीस के वाइस प्रेसीडेंट मौलाना मुश्ताक अहमद वीरी, मौलाना महमूद मकबूल अखरानी, अब्दुल हमीद फैयाज को भी उनके आवासों से हिरासत में ले लिया गया है। जमात ए इस्लामी के करीब 150 सदस्य जम्मू-कश्मीर पुलिस की हिरासत में हैं. सालवेशन मूवमेंट के चेयरमैन जफर अकबर को भी हिरासत मे लिया गया है जबकि हुर्रियत के सीनियर लीडर अब्दुल गनी बट्ट को हाउस अरेस्ट मे रखा गया है.

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घाटी में भारी सुरक्षाबल बढ़ाया गया.

सरकार की असली मुसीबत हुर्रियत गिलानी धड़े के चेयरमैन सैय्यद अली शाह गिलानी और हुर्रियत मीरवाइज के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूख हैं. इन दोनो के जरिए ज्वाइंट रिजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) के बैनर तले कश्मीर के युवाओं, नौकरी पेशा लोगों और व्यापारियों को लगातार संदेश दिए जाते रहे हैं. जेआरएल के ये फतवे घाटी में चेतावनी की तरह काम करते हैं. इन्हें न मानने वालों को धमकियां दी जाती हैं और उनके कारोबार को निशाना बनाया जाता है. यही वजह है कि सरकार इस बेहद अहम वक्त में इन अलगाववादी नेताऔं को घाटी से बाहर करने की तैयारी में है.