वो 7 लोग और ‘ऑपरेशन बालाकोट’

इंटेलिजेंस से जुड़े लोगों के मुताबिक सिर्फ 7 लोग ही थे, जिन्हें भारत की ओर से किए जाने वाले इस पराक्रम की टाइमिंग की जानकारी थी. इन 7 लोगों में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा एनएसए अजीत डोभाल, तीनों सेनाओं के प्रमुख और रॉ के दो शीर्ष अधिकारी ही शामिल थे.

नई दिल्ली: 14 फरवरी को पुलवामा में हमारे जवानों पर हमला हुआ. 15 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- “सुरक्षा बलों को खुली छूट दे दी गई है. कार्रवाई के लिए वक्त, जगह और तरीका खुद सुरक्षा बल तय करेंगे. आतंकवादियों ने बहुत बड़ी गलती की है. उनके सरपरस्त बचेंगे नहीं.” और 18 फरवरी को मोदी ने एक्शन का आखिरी अनुमति भी दे दी. 4 दिन के इस छोटे-से वक्त में हमारी इंटेलिजेंस एजेंसी रिसर्च एंड एनलिसिस विंग यानी रॉ ने इस बात की पक्की जानकारी मुहैया करा दी कि हमें हमला करना कहां है? पाकिस्तान में किस जगह पर आतंक की फैक्टरी चल रही है? इसी के बाद तय हो गया कि अब हम कभी भी उन आतंकियों को उनके घर में घुसकर मार सकते हैं.

बस 7 लोगों को थी हमले की टाइमिंग की जानकारी

इंटेलिजेंस से जुड़े लोगों के मुताबिक सिर्फ 7 लोग ही थे, जिन्हें भारत की ओर से किए जाने वाले इस पराक्रम की टाइमिंग की जानकारी थी. इन 7 लोगों में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा एनएसए अजीत डोभाल, तीनों सेनाओं के प्रमुख और रॉ के दो शीर्ष अधिकारी ही शामिल थे.

ऑपरेशन को अंजाम देने की कवायद 22 फरवरी से शुरू हुई. 22 की रात से ही एयरफोर्स ने अपने कई बेस से लड़ाकू विमानों की उड़ान शुरू कर दी. तब ये कार्रवाई सीमा पार हमले के लिए नहीं की जा रही थी, बल्कि ये दुश्मन देश को कन्फ्यूज करने का तरीका था. आखिरकार 25 फरवरी को पुख्ता इंटेलिजेंस इनपुट मिला कि बालाकोट में जैश के कैंप में 300 से 350 आतंकवादी मौजूद हैं.

पीएम सेना को पहले ही पूरी छूट दे चुके थे, लिहाजा सेना ने 25 तारीख की शाम को ही तय कर लिया कि रात के वक्त कार्रवाई को अंजाम दे दिया जाएगा. पीएम मोदी को भी इससे थोड़ी देर बाद देर शाम को जानकारी दी गई कि अगले कुछ घंटों के भीतर हमारी वायुसेना सीमा पार कर दुश्मनों का काम-तमाम करने वाली है.

जब ये तय हो गया कि हम हमला करने के लिए तैयार हैं, तो एनएसए अजीत डोभाल ने अपने अमेरिकी समकक्ष जॉन बोल्टन से टेलीफोन पर बात की. डोभाल ने उन्हें भारत के एयर स्ट्राइक की जानकारी देते हुए अपने देश की सुरक्षा के मद्देनजर इसकी जरूरत और ऐसा करने के अपने अधिकार के बारे में बताया. इसके बाद 26 तारीख की सुबह जब देश जागा, तो उसने पाया कि हमारे जवानों ने पुलवामा का हिसाब चुकता कर लिया है.