जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट की बहाली सराहनीय, नजरबंद नेताओं की जल्द हो रिहाई: अमेरिकी राजनयिक

एलिस वेल्स ने कहा, "यात्रा के दौरान सीएए को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बारे में जानकारी मिली जोकि अभी भी जारी है."

अमेरिका की सीनियर राजनयिक एलिस वेल्स ने भारत सरकार से मांग की है कि कश्मीर में बिना किसी आरोप के हिरासत में रखे गए नेताओं को तुरंत रिहा किया जाए. वेल्स ने हाल ही में राजधानी दिल्ली का दौरा किया है. उन्होंने कहा कि मैंने अपनी यात्रा के दौरान नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बारे में भी सुना.

एलिस वेल्स दक्षिण और मध्य एशिया के लिए प्रधान उप सहायक सचिव हैं. उन्होंने कहा, “यात्रा के दौरान सीएए को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बारे में जानकारी मिली जोकि अभी भी जारी है. मैं कहूंगी कि यह एक तरह से लोकतंत्र की जांच-परख चल रही हो. चाहे वो सड़कों पर हो या राजनीतिक विरोधियों, मीडिया या कोर्ट की ओर से हो. हम हमेशा कानून के तहत दिए गए समानता के अधिकार को कम महत्व देते हैं.”

उन्होंने कहा, “मैं खुश थी कि जम्मू-कश्मीर में कुछ सुधारत्मक कदम उठाए गए, जैसे कि कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं की आंशिक रूप से बहाली हुई. हम लगातार सरकार से मांग करते रहे कि हमारे राजदूतों को वहां जाने की इजाजत मिले. साथ ही वो नेता जो बिना किसी आरोप के हिरासत में रखे गए हैं उन्हें रिहा किया जाए.”

वेल्स ने अमेरिकी राजदूत और अन्य विदेशी राजदूतों के घाटी दौरे को एक सकारात्मक कदम बताया. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दो दशक की तुलना में अब भारत की विदेश नीति में बदलाव देखने को मिल रहा है. भारत अब राष्ट्रहित पर अधिक ध्यान दे रहा है.

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर जहां एक ओर पूरे देश में घमासान मचा हुआ है, वहीं लखनऊ विश्वविद्यालय ने सीएए पर पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव तैयार कर एक नए विवाद को जन्म दे दिया है. विपक्षी दलों में इसे लेकर उबाल आ गया है.

लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग ने सीएए को पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है. विभाग के अनुसार, सीएए अब एक कानून बन चुका है, जिसे देखते हुए यह पहल की गई है.

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