नागरिकता पर किया जा रहा शक, CAA-NPR से कैसे नहीं होगी परेशानी: वजाहत हबीबुल्ला

वजाहत हबीबुल्ला ने कहा कि 'सीएए को लेकर हमने अपने विचार पत्र में बताए हैं. ड्राफ्ट बनाने के दौरान काफी विचार-विमर्श हुआ है. ऐसा नहीं है कि बस मैंने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.'

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर 106 पूर्व नौकरशाहों ने सरकार को पत्र लिखा है. पत्र में इन नौकरशाहों ने सीएए-एनपीआर की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं.

इन पूर्व 106 नौकरशाहों में दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग, तत्कालीन कैबिनेट सचिव के एम चंद्रशेखर और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला शामिल हैं. हबीबुल्ला ने इस पत्र को लेकर टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत की है.

हबीबुल्ला ने कहा, “सीएए और एनपीआर कानून लागू करने के पीछे सरकार की क्या मंशा है, ये सरकार ही बता पाएगी. इसे लेकर लोग सवाल भी उठा रहे हैं. सीएए के बाद पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन नहीं हुए. कुछ जगहों पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई. कई जगहों पर सरकार का भी हाथ है. हिंसा अफसोस की बात है. हिंसा का आरोप दोनों ही पक्षों पर लग रहा है.”

उन्होंने कहा कि ‘सीएए को लेकर हमने अपने विचार पत्र में बताए हैं. ड्राफ्ट बनाने के दौरान काफी विचार-विमर्श हुआ है. ऐसा नहीं है कि बस मैंने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. सीएए से परेशान होने की जरूरत कैसे नहीं है, जबकि आपकी नागरिकता पर शक उठाया जा रहा है. लोग बिहार, यूपी अन्य राज्यों से पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र समेत दूसरी जगहों पर काम की तलाश में जाते हैं. ऐसे में उन्हें बहुत परेशानी होगी.’

हबीबुल्ला ने कहा, “नागरिकता कानून से सबसे ज्यादा कष्ट उन लोगों को होगा जिनके पास कागजात नहीं हैं. जो लोग देश के पिछड़े इलाके से हैं, उन्होंने कागज रखा भी है या नहीं. अगर इन सभी लोगों के लिए कागज तैयार करने की योजना सरकार बनाती है तो अच्छी बात है. हमने पत्र में बताया है कि किस प्रकार से सीएए से कष्ट और अन्याय होगा.”

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