‘Flying coffin’ उड़ा रहे थे विंग कमांडर अभिनंदन, अगर अब भी नहीं चेता भारत तो जाएंगी और जानें

क्या आपको पता है विंग कमांडर अभिनंदन जिस MiG-21 से पाकिस्तानी F-16 का पीछा कर रहे थे वह F-16 के मुकाबले कमजोर है लेकिन फिर भी अभिनंदन ने बहादुरी का परिचय देते हुए न सिर्फ दुश्मन के विमान का पीछा किया बल्कि उसे वापस भी खदेड़ा. लेकिन आपको पता है कि MiG-21 को Flying coffin क्यों कहा जाता है? राजनीति के नाम पार जवानों की जान से कब तक खिलवाड़ होता रहेगा?

नई दिल्ली: बुधवार को भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन को पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार कर लिया. विंग कमांडर अभिनंदन पाकिस्तानी विमानों को अपनी सीमा से खदेड़ते हुए पीओके में घुस गए थे, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया. इस गिरफ्तारी के बाद से देश भर में अभिनंदन को तुरंत भारत वापस लाए जाने की मांग भी जोरों पर है.

लेकिन क्या आपको पता है विंग कमांडर अभिनंदन जिस विमान (MiG-21) से पाकिस्तानी F-16 का पीछा कर रहे थे वह इसके मुकाबले कमजोर है लेकिन फिर भी अभिनंदन ने बहादुरी का परिचय देते हुए न सिर्फ दुश्मन के विमान का पीछा किया बल्कि उसे वापस भी खदेड़ दिया. हालांकि खुद उनका विमान दुश्मन का शिकार हो गया और इजेक्ट करके उन्हें अपनी जान बचानी पड़ी लेकिन बदकिस्मतन वे पाकिस्तानी सीमा में जा पहुंचे जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

पायलटों का काल है MiG-21

MiG-21 को ‘Flying coffin‘ कहा जाता है. सोवियत संघ ने इसका निर्माण 1956 में शुरू किया था. 1964 में भारतीय सेना ने इस विमान को अपने बेड़े का हिस्सा बनाया. अगर जान-माल के नुकसान की बात करें तो 1970 से लेकर अब तक MiG-21, 170 पायलटों और 40 नागरिकों की जान ले चुका है. अब तक बनाए गए कुल 872, MiG-21 में से आधे से ज्यादा दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं. रूस ने भी इसका इस्तेमाल 1985 में बंद कर दिया था. बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों ने भी अब MiG-21 को अपने जहाजी बेड़े से बाहर कर दिया है. हालांकी भारत अभी भी 2021-22 तक MiG-21 को इस्तेमाल करना चाहता है.

‘जगुआर’ की भी हालत खस्ता है

MiG-21 की ही तरह भारत के दूसरे लड़ाकू विमान जगुआर की भी हालत पस्त है. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारतीय वायुसेना के बेड़े में इस समय 118 जगुआर हैं हालांकि विकीपीडिया पर यह आंकड़ा 91 दिया गया है. भारत ने यूनाइटेड किंगडम से साल 1979 में 40 जगुआर खरीदे थे. 1968 में निर्मित इस जहाज में रोल्स रॅायस का 811 इंजन लगा है जो आज के हिसाब से कमजोर है. 2005 में फ्रांस, 2007 में यूके और 2014 में ओमान ने इसका इस्तेमाल करना बंद कर दिया है. भारतीय वायुसेना के पास अभी 91 जगुआर हैं जिसे अपग्रेड करके सेना 2035 तक इस्तेमाल करना चाहती है लेकिन अभी तक इसका अपग्रेड शुरू नहीं किया गया है.

भारतीय वायुसेना इन पुराने और अन-अपग्रेडेड जहाजों की वजह से पिछले काफी समय से कई जवानों को खो चुकी है. आइए जानते हैं हाल ही में हुए कुछ विमान हादसे – 

19 फरवरी 2019 को एयर शो की रिहर्सल के दौरान दो जेट टकरा गए थे जिसमें एक पायलट की मौत हो गई थी.
1 फरवरी 2019 को एक Mirage-2000 ट्रेनर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें 2 पायलटों को जान गंवानी पड़ी थी.
12 फरवरी 2019 को एक Mig-27 दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.
28 जनवरी 2019 को भारतीय वायुसेना का एक जगुआर विमान क्रैश हो गया था.
28 नवंबर 2018 को भारतीय वायुसेना का एक ट्रेनर विमान हैदराबाद में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.
18 जुलाई 2018 को MiG-21 दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें स्कवाड्रन लीडर मीत कुमार शहीद हो गए थे.
11 जुलाई 2018 को राजस्थान में एक MiG-21 दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.
5 जून 2018 को गुजरात में एक जगुआर विमान दुर्घटनाग्रस्त. इसमें एयर कॅामोडोर संजाई चौहान शहीद.
23 मई 2018 को जम्मू-कश्मीर में चीता हेलिकॅाप्टर क्रैश. 

विमान हादसों की बात करें तो पिछले 5 सालों में विमान हादसों की संख्या बढ़ी है. 2017-18 में 5 विमान हादसे, 2016-17 में 10 विमान हादसे, 2015-16 में 6, 2015-14 में 10 विमान हादसे हुए. 

करगिल युद्ध के बाद 2001 में रक्षा मंत्रालय ने लड़ाकू विमानों की कमी का जिक्र किया था. भारतीय वायुसेना के पास इस समय अपनी ताकत से 162 विमान कम हैं. 2027 तक भारत MiG-21, MiG-27, और MiG-29 के 10 स्क्वाड्रन अपने बेड़े से हटा लेगा जिससे भारतीय बेड़े में विमानों की और कमी हो जाएगी. एक रिपोर्ट में यह कहा गया था कि 2007 तक भारत ने 126 लड़ाकू विमानों की कमी का जिक्र किया था लेकिन कमी के नाम पर सरकारें सिर्फ लीपापोती करती रहीं और  2016 तक सिर्फ 36 राफेल जेट की ही डील तय हो पायी है लेकिन अभी तक एक भी राफेल की डिलीवरी भारत को नहीं मिली है.