मैंने मासूम लोगों की हत्या का कभी समर्थन नहीं किया, मुरलीधरन को आखिर क्यों कहनी पड़ी ये बात

मुथैया मुरलीधरन (Muttiah Muralitharan) पर बायोपिक बन रही है. नाम है '800'. फिल्म को लेकर विवाद हो गया है.

मुथैया मुरलीधरन.

श्रीलंकाई क्रिकेटर मुथैया मुरलीधरन (Muttiah Muralitharan) के जीवन पर ‘800’ नाम से बायोपिक बन रही है. फिल्म का नाम उनके 800 टेस्ट विकेट के आधार पर रखा गया है. पिछले दिनों फिल्म का पोस्टर जारी हुआ. इसके बाद से फिल्म को लेकर विवाद हो गया है. फिल्म में मुरलीधरन का रोल निभाने जा रहे  तमिल एक्टर विजय सेतुपति (Vijay Sethupathi)निशाने पर हैं. उनसे फिल्म में काम न करने को कहा जा रहा है. साथ मुरली पर श्रीलंका (Sri Lanka) में तमिल लोगों पर हुए अत्याचार को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं. कुछ राजनीतिक पार्टियों ने आरोप लगाया कि मुरलीधरन ने तमिलों से विश्वासघात किया इसलिए सेतुपति को इसमें काम नहीं करना चाहिए.

मुरली ने सफाई में क्या कहा

अब इन आरोपों पर मुरलीधरन ने सफाई दी है. उन्होंने 16 अक्टूबर को कहा कि उनकी जिंदगी पर बन रही बायोपिक ‘800’ सिर्फ उनके खेल की उपलब्धियां के बारे में हैं. उन्होंने देश में दशकों के लंबे संघर्ष के बावजूद ऐसा किया. उन्होंने इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि उन पर तमिलों के खिलाफ होने का आरोप लगाया जा रहा है. यह राजनीतिक कारणों और अज्ञानता के कारण ही है.

मेरे पिता, रिश्तेदारों को भी मारा गया

मुरलीधरन ने कहा कि उन्होंने कभी भी मासूम लोगों को मारे जाने का समर्थन नहीं किया. उन्होंने बयान जारी कर कहा कि वह श्रीलंकाई गृहयुद्ध के दर्द को समझते हैं और उनके परिवार ने श्रीलंका में अपनी यात्रा ‘कूली’ के तौर पर की थी. उन्होंने कहा,

हम भी काफी प्रभावित रहे हैं. जब मैं सात साल का था तो मेरे पिता की हत्या कर दी गई. मेरे रिश्तेदारों को मार दिया गया. युद्ध के दौरान हमारी आजीविका छिन गई. कई मौके ऐसे आए जब हमारे पास कुछ नहीं होता था. मुझे उस दुख और दर्द का अहसास है. 800 मूवी युद्ध में मेरे बचने और श्रीलंकन क्रिकेट टीम में आने के बारे में है.

लोगों के मारे जाने का सपोर्ट नहीं किया

मुरली ने आगे कहा,

मेरे स्कूल के साथी अगले दिन मर जाते थे. जिन लोगों का घर छूटा, वे फिर कभी वापस नहीं आ सके. एक सामान्य इंसान के रूप में गृह युद्ध की समाप्ति से उन्हें सुरक्षा का अहसास हुआ. पिछले 10 साल में दोनों तरफ से किसी की मौत नहीं हुई है. इसी वजह से मैंने कहा था कि साल 2009 उनके जीवन का सबसे खुशी वाला साल था. मैंने कभी भी मासूम लोगों के मारे जाने का समर्थन नहीं किया और न ही करूंगा.

मुरलीधरन ने तमिल न जानने के आरोपों का भी खंडन किया. उन्होंने कहा कि वे तमिल मीडियम स्कूल में पढ़े थे. और तमिल में भी अच्छे से बात कर सकते हैं.

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