घर पर गालियां सुनीं, गांववालों से ताने मगर नहीं डिगी 30 साल की फूलमणि, बदली गांव की सूरत

फूलमणी देवी ने चार महिला राजमिस्त्री की टीम का नेतृत्व किया, जिन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में 125 शौचालय बनवाए हैं.

रांची: झारखंड के गांव गुटुआटोली की रहने वाली सुक्कु ओरेन को अब राहत की सांस मिल गई है, जब उन्हें और उनकी बेटियों को अंधेरे के समय झाड़ियों में खुले में शौच के लिए नहीं जाना पड़ेगा और यह सब मुमकिन हो पाया है केवल एक महिला के कारण, जिसने इसके लिए अपने घरवालों की गालियां सुनी और गांववालों के ताने सहे.

हम बात कर रहे हैं 30 वर्षीय फूलमणी देवी की, जिसका हौंसला गालियों और तानों से नहीं डिगा. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ओरेन जैसे गांव के 400 परिवार भी फूलमणी देवी के शुक्रगुजार हैं, जिनका कहना है कि”मैडम साहिबा” ने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल डाली.

फूलमणी देवी ने चार महिला राजमिस्त्री की टीम का नेतृत्व किया, जिन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में 125 शौचालय बनवाए हैं. ये चारों झारखंड सरकार के पेयजल और स्वच्छता विभाग की एक पहल के तहत प्रशिक्षित 55,000 रानी मिस्त्री, या “सशक्त महिला राजमिस्त्री” में से हैं.

ओरेन का कहना है कि हम सम्मानित की जिंदगी जी सकें, इसके लिए फूलमणी ने काफी संघर्ष किया. झारखंड ने पिछले साल खुद को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया था. गुटुआटोली में आए इस परिवर्तन से न केवल ग्रामीणों के चेहरे पर मुस्कान आई, बल्कि निवासी रानी के जीवन में भी खुशहाली आई है.

रानी का कहना है कि कहती है कि योजना का लाभ उठाने हेतु अपने पड़ोसियों को मनाने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया. इतना ही नहीं ऐसा करने पर उसका शराबी पति उसे पीटता भी था. अक्सर शौचालय निर्माण के लिए किया जाने वाले सर्वे के लिए वे अपने दो साल के बेटे को लेकर गांव के चारों ओर घूमती थी. इसी तरह गांव की अन्य महिलाएं भी फूलमणी देवी के संघर्ष की काफी सराहना करते हैं, जिसके कारण उनकी जिंदगी बदल गई है.

फूलमणी देवी के जीवन में बदलाव उस समय आया जब रांची में आयोजित कार्यक्रम स्वच्छता ही सेवा के दौरान पिछले साल उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने देवी को उनके सराहनीय काम के लिए अवॉर्ड देकर सम्मानित किया था. वहां तो देवी ने सम्मान पा लिया लेकिन उनकी निजी जिंदगी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही.

रिपोर्ट के मुताबिक, देवी ने कहा, “मेरी शादी 16 साल की उम्र मे हो गई थी और तबसे मैं कभी घर से बाहर नहीं निकली थी. मेरे पति को पसंद नहीं था कि मैं किसी से बात करूं और वे अक्सर शराब पीकर मेरे साथ गालीगलौच करते थे. एक बार उनका जब एक्सिडेंट हुआ तो परिस्थितियां काफी बदतर हो गईं.”

देवी ने आगे कहा, “साल 2017 में सरकार एक महिला की तलाश में थी जो कि अपना ग्रुप बनाकर शौचालय का निर्माण करें. हमारे गांव की लीडर मे थी और इससे मेरे पति काफी गुस्सा हो गए, लेकिन मैंने अपना काम जारी रखा. मैं अपने छोटे बेटे को पीठ पर बैठाकर सर्वे करने जाती थीं. जब थककर घर लौटती तो देखती कि मेरा पति गेट पर मेरा इंतजार कर रहे होता था, ताकि मुझे पीट सकें. मैं रोती थी, और टूट जाती थी, लेकिन ये मेरा काम ही था जिससे मुझे आत्मविश्वास मिलता था. इससे मुझे खुशी मिलती और मैं फिर अपने काम में लग जाती.”

 

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