JharkhandResults: कांग्रेस वाली बीमारी बीजेपी को पड़ रही भारी

झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस महागठबंधन को इस बार जनता ने स्‍पष्‍ट बहुमत दिया है, जबकि सबसे ज्‍यादा वोट पाने वाली बीजेपी सत्‍ता से बाहर हो गई है. मतलब राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश के बाद अब झारखंड भी खराब स्‍ट्राइक रेट के चलते बीजेपी के हाथों से निकल गया है.
Jharkhand Assembly elections 2019, JharkhandResults: कांग्रेस वाली बीमारी बीजेपी को पड़ रही भारी

नई दिल्‍ली: झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस महागठबंधन को इस बार जनता ने स्‍पष्‍ट बहुमत दिया है, जबकि सबसे ज्‍यादा वोट पाने वाली बीजेपी सत्‍ता से बाहर हो गई है. मतलब राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश के बाद अब झारखंड भी खराब स्‍ट्राइक रेट के चलते बीजेपी के हाथों से निकल गया है.

2017 में गुजरात भी बीजेपी के हाथों से जाते-जाते बचा. गुजरात में वही खराब स्‍ट्राइक रेट की कहानी देखने को मिली, यहां 2013 विधानसभा चुनाव की तुलना में बीजेपी को वोट तो ज्‍यादा मिला, लेकिन सीटें कम हो गईं. खराब स्‍ट्राइक रेट की ये बीमारी एक जमाने में कांग्रेस के लिए महामारी बन गई थी, अब बीजेपी भी इस भयंकर बीमारी की चपेट में है और खराब स्‍ट्राइक के चलते कई राज्‍यों की सत्‍ता गंवा चुकी है.

क्‍या होता है स्‍ट्राइक रेट: जैसा कि क्रिकेट के बारे में हम सभी जानते हैं कि स्‍ट्राइक रेट, मतलब कितनी गेंदों में बल्‍लेबाज ने कितने रन बनाए या कितनी गेंदें फेंककर बॉलर ने कितने विकेट लिए. क्रिकेट की तरह राजनीति में भी स्‍ट्राइक रेट का बहुत महत्‍व होता है. कितने प्रतिशत वोट पाकर पार्टी को कितनी सीटें मिलीं, इस पर चुनावी नतीजे काफी हद तक निर्भर करते हैं.

शुरुआत झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 से ही करते हैं. इस बार झारखंड में बीजेपी को करीब 34 प्रतिशत वोट प्राप्‍त हुए, लेकिन उसे करीब 25 सीटों पर जीत मिली. 2014 झारखंड विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 31 प्रतिशत वोट मिला था, लेकिन उसे सीटें 37 मिली थीं. मतलब खराब स्‍ट्राइक रेट ने बीजेपी का खेल बिगाड़ दिया.

कांग्रेस वाली बीमारी के चलते बीजेपी ने गंवाया मध्‍य प्रदेश

मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 की सबसे ज्‍यादा चौंकाने वाली बात रही कांग्रेस और भाजपा का वोट प्रतिशत. एमपी में कांग्रेस को बीजेपी से कम वोट मिले हैं, इसके बावजूद वह बीजेपी को पछाड़ने में सफल रही. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को 40.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि बीजेपी को 41.0 प्रतिशत वोट मिले. मतलब कांग्रेस को भाजपा की तुलना में 0.1 प्रतिशत वोट कम मिले, लेकिन वह भाजपा से 5 सीटें ज्‍यादा जीतने में सफल रही और राज्‍य में आज कमलनाथ की सरकार चल रही है.

राजस्‍थान में भी खराब स्‍ट्राइक रेट ने बिगाड़ा खेल

इसी तरह राजस्‍थान विधानसभा चुनाव 2018 में भी बीजेपी का स्‍ट्राइक रेट खराब रहा. राजस्‍थान में बीजेपी को 38.8 प्रतिशत वोट मिले, जबकि कांग्रेस को 39.3 प्रतिशत. मतलब कांग्रेस को 1 प्रतिशत से भी कम वोट मिला, लेकिन वह बीजेपी से 26 सीटें ज्‍यादा जीतने में सफल रही.

एक जमाने में कांग्रेस के लिए मुसीबत बना था स्‍ट्राइक रेट

अब 2014 लोकसभा चुनाव में राजस्‍थान के नतीजों पर भी गौर लीजिए. 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 55.6 प्रतिशत वोट शेयर के साथ राजस्थान की सभी 25 लोकसभा सीटों पर भगवा फहरा दिया, जबकि कांग्रेस पार्टी 30.7 प्रतिशत वोट पाने के बाद भी एक सीट पर भी जीत दर्ज नहीं कर पाई थी.

2008 में बेहद बुरा था कांग्रेस का स्‍ट्राइक रेट

कांग्रेस के साथ लंबे समय तक खराब स्‍ट्राइक रेट की समस्‍या रही, मतलब पार्टी वोट प्रतिशत को सीटों में कन्‍वर्ट नहीं कर पाई. मध्‍य प्रदेश 2008 विधानसभा चुनाव उदाहरण लेते हैं. इस चुनाव में बीजेपी ने 38 फीसदी वोट शेयर के साथ 143 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस 32 प्रतिशत वोट प्राप्‍त करने के बाद भी सिर्फ 71 सीटें ही पाई थी. इसी प्रकार से 2013 में मध्‍य प्रदेश में बीजेपी ने 45 फीसदी वोट शेयर के साथ 165 सीटों पर कब्जा किया तो कांग्रेस 36 प्रतिशत वोटों के साथ सिर्फ 58 सीटें जीत सकी.

2014 लोकसभा चुनाव में भी हुई कांग्रेस की बुरी हालत

2014 लोकसभा चुनाव का ही उदाहरण लेते हैं. इस चुनाव में कांग्रेस को 19.3 प्रतिशत वोट शेयर के साथ सिर्फ 44 सीटों पर जीत प्राप्‍त हुई. अब 2009 में बीजेपी के प्रदर्शन पर नजर डालते हैं. 2009 लोकसभा चुनाव बीजेपी ने लालकृष्‍ण आडवाणी के नेतृत्‍व में लड़ा था और पार्टी को कांग्रेस के हाथों सत्‍ता गंवानी पड़ी थी, लेकिन तब भी बीजेपी का स्‍ट्राइक रेट काफी बेहतर था. बीजेपी को 2009 में 18.5 प्रतिशत वोट मिले थे और वह 116 सीटें में सफल रही थी. मतलब 2014 में कांग्रेस को बीजेपी की तुलना में वोट ज्‍यादा पर सीटें 72 कम प्राप्‍त हुईं.

2014 में बीजेपी ने बना डाला था स्‍ट्राइक रेट का रिकॉर्ड

2014 लोकसभा चुनाव बीजेपी ने स्‍ट्राइक रेट के मामले में रिकॉर्ड बना डाला था. नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में बीजेपी ने सिर्फ 31 प्रतिशत वोट हासिल कर 282 सीटों पर जीत हासिल कर ली थीं. इससे पहले कांग्रेस ने 1967 में 40.8 प्रतिशत वोट के साथ 283 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इन दोनों परिणामों की तुलना करें तो बीजेपी को करीब 10 प्रतिशत वोट कम मिले, जबकि उसने कांग्रेस से सिर्फ एक सीट कम हासिल की. एक प्रकार से वोट शेयर के मामले में यह बीजेपी का खराब रिकॉर्ड है, लेकिन अब बीजेपी की यही ताकत कमजोरी बन गई है.

क्‍यों खराब हो रहा बीजेपी का स्‍ट्राइक रेट?

कांग्रेस और बीजेपी दो राष्‍ट्रीय पार्टियां हैं. छोटे-छोटे दलों के साथ इनके गठबंधन हैं. लेकिन जब-जब ये दोनों पार्टियां मजबूत हुईं और बहुमत के पार पहुंचीं, वैसे-वैसे सहयोगी दलों का साथ इनको नहीं मिला. मतलब केंद्र में जिसकी सरकार बनी, उसे छोटे दलों का साथ कम मिला. इस तरह जब कांग्रेस सत्‍ता में थी, तब बीजेपी के पास छोटे दलों का बड़ा कुनबा था, इस स्थिति में बीजेपी और उसके कई सहयोगी साथ मिलकर कांग्रेस के वोट काट रहे थे. अब यही स्थिति उलट गई है.

उदाहरण के तौर पर झारखंड में बीजेपी का सामना झारखंड मुक्ति मोर्चा, आरजेडी और कांग्रेस के महागठबंधन से था. मतलब कई दलों ने मिलकर बीजेपी का वोट काटा और उसका स्‍ट्राइक रेट खराब हो गया. बिहार में भी बीजेपी ने महागठबंधन के आगे घुटने टेक दिए. हालांकि, बीजेपी ने यूपी में जरूर महागठबंधन को पटखनी दी, लेकिन उत्‍तर प्रदेश के अलावा बीजेपी किसी और राज्‍य में महागठबंधन से पार नहीं पा सकी.

आजसू से अलग गई बीजेपी और बिगड़ गया स्‍ट्राइक रेट

झारखंड के ही पिछले विधानसभा चुनाव का उदाहरण लेते हैं. 2014 में बीजेपी आजसू के साथ मिलकर लड़ी. पार्टी को उस चुनाव में 31 प्रतिशत वोटों के साथ 37 सीटें मिलीं, लेकिन 2019 में वह अकेले लड़ी और 34 प्रतिशत वोटों के साथ केवल 25 सीटें ही जीत पाई.

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