6 फीट की Social Distancing भी नाकाफी, ड्रॉप्लेट्स से 20 फीट तक फैल सकता है Coronavirus

साइंटिस्ट्स ने स्टडी में लिखा है कि बड़े ड्रॉप्लेट्स (Large Droplets) आमतौर पर ग्रेविटी (Gravity) के कारण सीमित दूरी के भीतर एक सतह पर रुक जाते हैं जबकि छोटे ड्रॉप्लेट्स (Small Droplets) तेजी से एवेपोरेट होकर एरोसोल पार्टिकल्स का निर्माण करते हैं

साइटिंस्ट्स ने अलग-अलग एटमॉस्फेरिक कंडीशन (Atmospheric Condition) के तहत खांसने, छींकने और सांस लेने से संक्रामक बूंदों (इंफेक्टेड ड्रॉप्लेट्स) के प्रसार का मॉडल तैयार किया है. उन्होंने पाया है कि नोवल कोरोनावायरस (Coronavirus) ठंड और नम मौसम में तीन गुना अधिक तक फैल सकता है. रिसर्चर्स के अनुसार, ड्रॉप्लेट्स 20 फीट तक की यात्रा कर सकते हैं, जिसके चलते वर्तमान में छह फीट की सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) भी पर्याप्त नहीं है.

पुरानी रिसर्च के आधार पर रिसर्चर्स का मानना है कि छींकने, खांसने और नॉर्मल बात करने के दौरान ज्यादा से ज्यादा 40 हजार रेस्पिरेटरी ड्रॉप्लेट्स (Respiratory Droplets) जनरेट होती हैं, जिनकी प्रारंभिक गति कुछ मीटर प्रति सेकंड से लेकर सौ मीटर प्रति सेकंड से ज्यादा तक होती है.

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इन पिछली स्टडीज में साइंटिस्ट्स ने कहा कि ड्रॉप्लेट्स के दोनों एयरोडायनामिक्स और उनके पर्यावरण के साथ गर्मी और बड़े पैमाने पर एक्सचेंज प्रोसेस वायरस की प्रभावशीलता का निर्धारण कर सकते हैं. मेड्रिक्सिव में पब्लिश हुए स्टडी के रिव्यू में साइंटिस्ट्स ने विभिन्न तापमान, ह्यूमिडिटी और वेंटिलेशन कंडीशन के तहत एवेपोरेशन, हीट ट्रांसफर और रेस्पिरेटरी ड्राप्लेट्स की गति का पता लगाने के लिए एक व्यापक मैथेमेटिकल मॉडल का उपयोग किया.

उन्होंने पाया कि रेस्पिरेटरी ड्रॉप्लेट्स के जरिए कोविड-19 के संचरण मार्ग को छोटी दूरी की छोटी बूंदों और लंबी दूरी की एरोसोल एक्सपोज़र में विभाजित किया गया है. साइंटिस्ट्स ने स्टडी में लिखा है कि बड़े ड्रॉप्लेट्स आमतौर पर ग्रेविटी के कारण सीमित दूरी के भीतर एक सतह पर रुक जाते हैं जबकि छोटे ड्रॉप्लेट्स तेजी से एवेपोरेट होकर एरोसोल पार्टिकल्स का निर्माण करते हैं, जो कि वायरस को ले जाने में सक्षम होते हैं और घंटो तक हवा में रहते हैं.

साइटिस्ट्स के विश्लेषण के अनुसार, मौसम की स्थिति का प्रभाव हर बार एक जैसा नहीं होता है. रिसर्चर्स का कहना है कि कम तापमान और हाई ह्यूमिडिटी, ड्रॉप्लेट्स कॉन्टैक्ट ट्रांसमिशन की सुविधा देती है जबकि हाई टेंपरेचर और लॉ ह्यूमिडिटी छोटे एयरोसोल पार्टिकल्स के फॉर्मेशन को बढ़ावा देते हैं.

रिसर्चर्स का कहना है कि उनका मॉडल यह सुझाव देता है कि सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने जो 6 फीट की सोशल डिस्टेंसिंग निर्धारित की है वो पर्याप्त नहीं है, क्योंकि ड्रॉप्लेट्स के जरिए फैलने वाला वायरस ठंड और नम मौसम में 6 मीटर यानि 19.7 फीट तक फैल सकता है.

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