भारत की 60 प्रतिशत ग्रामीण आबादी पौष्टिक आहार पाने में अक्षम – रिपोर्ट

पुरुषों और महिलाओं की आय की तुलना के आधार पर 2011 में सीओआरडी (CORD) के तहत महिलाओं के लिए खाद्य पदार्थों की कीमत 45.1 रुपये और पुरुषों के लिए खाद्य पदार्थों की कीमत 51.3 रुपये अमुमानित की गई थी.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 11:43 am, Wed, 14 October 20
भारत की 60 प्रतिशत ग्रामीण आबादी पौष्टिक आहार पाने में अक्षम - रिपोर्ट

इस महीने प्रकाशित फूड पोलिसी पत्रिका (Food Policy Journal) के अनुसार 2011 में भारत में अनुशंसित आहार की कीमत ( cost of a recommended diet ) महिलाओं के लिए 45.1 रुपये और पुरुषों के लिए 51.3 रुपये थी. फूड पोलिसी पत्रिका में प्रकाशित एक पत्र की लेखिका, कल्याणी रघुनाथन, जो कि अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) की एक अर्थशास्त्री हैं, के अनुसार 2001 और 2011 के बीच पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए अनुशंसित आहार की कीमतों में सीओआरडी ने 3.5 गुना से अधिक की वृद्धि की. निश्चित रूप से वर्ष 2001 और 2011 के बीच पुरुषों और महिलाओं की वास्तविक कमाई तेजी से बढ़ी, हालंकि महिलाओं की तुलना में पुरुषों की वास्तविक कमाई में ज्यादा बढ़ोतरी हुई है.

फूड पोलिसी पत्रिका में प्रकाशित पत्र ‘गरीबी से आजादी’ के तथ्य को उजागर करता है. जिस तरह से इसे संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा परिभाषित किया गया है, उससे पता चलता है कि खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा की गारंटी नहीं देता. भारत ने 2000 के दशक में गरीबी में तेजी से कमी आई थी, मगर तब अधिकांश ग्रामीण आबादी पोषण आहार का खर्च उठाने में असमर्थ थे. ग्रामीण भारत में पौष्टिक आहार की गणना के लिए, पेपर ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) द्वारा इस्तेमाल की गई परिभाषा का इस्तेमाल किया.

पोषण की कमी गरीबी की तुलना में अधिक

2011 में केवल 22.5% भारतीय गरीब थे. 2011-12 में एफएओ ने भारत की 16.3% आबादी में पोषण की कमी की पुष्टी की थी. एफएओ (United Nations Food and Agricultural Organisation) के मानकों द्वारा अनिवार्य रूप से यह देखा जाता है कि किसी व्यक्ति में कैलोरी पर्याप्त मात्रा में है या नहीं. एफएओ माप अनिवार्य रूप से केवल कैलोरी पर्याप्तता को ही देखता है, इसलिए अन्य पोषण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में नहीं रखता है. ग्रामीण भारत में 63.3% लोग पोषण आहार पर उतना खर्च नहीं कर सकते हैं, जितना कि सीओआरडी (CORD) में वर्णन किया गया.

एनआईएन (NIN) ने आहार संबंधी दिशानिर्देश दिए, जिसमें बताया गया है कि भोजन में पौष्टिक आहार के रुप में क्या क्या लिया जाना चाहिए. एनआईएन के आहार संबंधी दिशानिर्देश के मुताबिक अनाज में प्रोटीन (दाल, मांस, मछली और अंडे), डेयरी, फल, सब्जियां, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियों और तेल और वसा की मात्रा आवश्यक रुप से होनी चाहिए.

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फूड पोलिसी पत्रिका में प्रकाशित पत्र ने भारत के 380 ग्रामीण जिलों में सबसे सस्ते खाद्य पदार्थों की कीमत का यानी सीओआरडी का अनुमान लगाया है. पुरुषों और महिलाओं की आय की तुलना के आधार पर 2011 में सीओआरडी के तहत महिलाओं के लिए खाद्य पदार्थों की कीमत 45.1 रुपये और पुरुषों के लिए खाद्य पदार्थों की कीमत 51.3 रुपये अमुमानित की गई थी.

सीओआरडी के मुताबिक वास्तविक आय ही पौष्टिक आहार का आधार होता है, मगर अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जिनकी आय अन्य के मुताबिक अधिक होती है, वो पौष्टिक आहार लेते नहीं पाए जाते.. आर्थात जैसे-जैसे आय में बढ़ोतरी होती है, पौष्टिक आहार का स्तर गिरता चला जाता है.

प्रकाशित पत्र में लेखक ने इस वर्ष के आर्थिक सर्वेक्षण में थैलिनॉमिक्स चर्चा के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि शाकाहारी थालियों तक लोगों की पहुंच की स्थिति 2006-07 से 2019-20 तक 29 प्रतिशत तक सुधरी है, जबकि मांसाहारी थालियों के उपयोग में 18 प्रतिशत तक सुधार हुआ है. आर्थिक सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली में डेयरी, फल और गहरे हरे पत्ते वाली सब्जियां शामिल हैं, जो सबसे महंगी खाद्य सामग्री हैं. फूड पोलिसी पत्रिका में प्रकाशित एक पत्र में श्रमिकों में पोषण की कमी को एक बड़ी समस्या बताया गया है.

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