22 रॉकेट्स झेलने के बावजूद सही सलामत है अयान अल-असद एयरबेस, पढ़ें अमेरिका के लिए क्‍यों है अहम

अमेरिकी सेना ने इस एयरबेस का पहली बार इस्‍तेमाल 2003 में किया. तब सद्दाम हुसैन को सत्‍ता से बेदखल करने के लिए यहीं डेरा जमाया गया था.

अपने टॉप आर्मी कमांडर की मौत का बदला लेने को ईरान ने इराक में हमले किए. अयान अल-असद के जिस एयरबेस को ईरान ने अपना निशाना बनाया, वह इराक के भीतर अमेरिकी सैनिकों के सबसे बड़े ठिकानों में से एक है. इस एयरबेस ने इराक में अमेरिकी आक्रमण और इस्‍लामिक स्‍टेट के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाई है.

क्‍यों खास है अयान अल-असद एयरबेस?

  • 1980 में तत्‍कालीन यूगोस्‍लाविया के पैसों से यह एयरबेस बना था. 1990 के दशक तक यहां इराक एयरफोर्स का कब्‍जा था.
  • इराक के पश्चिमी अनबार रेगिस्‍तान में यह एयरबेस है. यह पश्चिमी इराक में गठबंधन सेनाओं का सबसे बड़ा बेस है. यहां करीब 1,500 अमेरिकी सैनिक रहते हैं. उसके अलावा नॉर्वे, ब्रिटेन और फ्रांस के सैनिक भी यहां पर तैनात हैं.
  • 2003 में ऑस्‍ट्रेलियन स्‍पेशल एयर सर्विस रेजिमेंट ने इसपर कब्‍जा कर लिया और अमेरिका के हवाले कर दिया. उस वक्‍त यहां मौजूद 50 फायर जेट्स भी कब्‍जे में ले लिए गए थे.
  • इस बेस में कई एयरक्राफ्ट हैंगर्स, बंकर्स, एक मॉडर्न हॉस्पिटल और 33 एयरक्राफ्ट शेल्‍टर्स हैं.
  • करीब 24 किलोमीटर में फैले इस एयरबेस पर इराकी सेना की 7वीं डिविजन का हेडक्‍वार्टर है और इन्‍फैंट्री स्‍कूल भी है.
Ain Al Asad Airbase of Iraq, 22 रॉकेट्स झेलने के बावजूद सही सलामत है अयान अल-असद एयरबेस, पढ़ें अमेरिका के लिए क्‍यों है अहम
अयान अल-असद बेस की सैटेलाइट तस्‍वीर.
  • इस एयरेबस में सिनेमा, स्विमिंग पूल्‍स, फास्‍ट फूड रेस्‍तरां जैसी सुविधाएं हैं. अमेरिकी सैनिकों के बीच इस बेस को ‘कैंप कपकेक’ कहा जाता था.

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  • अमेरिकी सेना ने इस एयरबेस का पहली बार इस्‍तेमाल 2003 में किया. तब सद्दाम हुसैन को सत्‍ता से बेदखल करने के लिए यहीं डेरा जमाया गया था.
  • अमेरिका ने 2011 में इस एयरबेस को इराकी सरकार के हवाले कर दिया था.
  • 2014 में BBC की एक टीम यहां पर गई थी. तब उन्‍हें यहां की हालत बेहद खराब मिली. अधिकतर इलाके पर ISIS का कब्‍जा था.

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साल 2018 में राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप यहां क्रिसमस के मौके पर आए थे. जब उनके साथ मेलानिया ट्रंप भी मौजूद थी. यह पहली बार था जब राष्‍ट्रपति ट्रंप किसी एक्टिव कॉम्‍बैट जोन में पहुंचे थे. ट्रंप के अलावा उपराष्‍ट्रपति माइक पेंस पिछले साल इस बेस पर आए थे और अमेरिकी सैनिकों के साथ ‘टर्की लंच’ किया था.

यह एयरबेस कई बार दुश्‍मनों के निशाने पर रहा है. 2015 में इस्‍लामिक स्‍टेट के आतंकियों ने मोर्टार से इसपर जोरदार हमला किया था. 2016 में भी ISIS ने इसपर हमले किए थे. पिछले महीने भी यहां पांच रॉकेट्स से हमला किया गया मगर कोई नुकसान नहीं हुआ. 7 जनवरी को ईरान ने यहां 17 रॉकेट्स दागे मगर बेस पर मौजूद देशों ने किसी सैनिक की मौत की पुष्टि नहीं की है.

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