कौन थे स्कंदगुप्त जिनका इतिहास फिर से लिखने को कह रहे गृहमंत्री अमित शाह

अमित शाह ने कहा कि हमें इतिहास को भारतीय दृष्टिकोण से पुन: लिखने की जरूरत है.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि सम्राट स्कंदगुप्त के पराक्रम और शासन चलाने की कला पर वृहद चर्चा करने की आवश्यकता है. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन सभागार में आयोजित गोष्ठी ‘गुप्त वंश के वीर: स्कंदगुप्त का ऐतिहासिक पुन:स्मरण एवं भारत राष्ट्र का राजनैतिक भविष्य’ में अमित शाह मुख्य वक्ता थे.

गोष्ठी में अमित शाह ने अपने विचार रखते हुए कहा ‘स्कंदगुप्त विक्रमादित्य को इतिहास में बहुत प्रसिद्धि मिली है लेकिन उनके साथ अन्याय भी हुआ है.उनके पराक्रम की जितनी प्रशंसा होनी चाहिए थी उतनी नहीं हुई. गुलामी के लंबे दौर के बाद भी उनके बारे में कम ही जानकारी उपलब्ध है. स्कंदगुप्त को इतिहास के पन्नों पर दर्ज कराने की जरूरत है.’

सम्राट स्कंदगु्प्त विक्रमादित्य कौन थे और किस प्रकार से उनका पराक्रम व शासन कला इतने लोकप्रिय हैं, आइए जानते हैं.

सम्राट स्कंदगुप्त गुप्त वंश के आठवें राजा थे. उनके पराक्रम की मिसाल ये है कि जितने साल उन्होंने शासन किया, उतने ही साल युद्ध में दिए थे. स्कंदगुप्त ने मध्य एशिया के क्रूर और भयंकर कबीलाई हूण योद्धाओं से युद्ध किया और हराया भी था.

बर्बर जंगली योद्धा थे हूण

मध्य एशिया के बर्बर जंगली योद्धा थे हूण, इन्होंने चौथी और पांचवी सदी में दुनिया के बड़े हिस्से में अपना राज फैला लिया था. चीन के पास रहने वाली इस जाति को चीन के लोग ‘ह्यून यू’ कहकर पुकारते थे. हूणों ने कई देशों पर विध्वंसकारी आक्रमण किया था. चीन की दीवार हूणों के आक्रमण से बचने के लिए ही बनाई गई थी और दीवार की वजह से ही वो बच पाया.

हूण जहां पर भी आक्रमण करते थे वहां की हर एक चीज़ को पूरी तरह से नष्ट कर देते थे. पुरुषों और बच्चों का सामूहिक नरसंहार करना, महिलाओं को उठा ले जाना, ऐतिहासिक महत्व की हर चीज को नष्ट कर देना, संस्कृति को छिन्न भिन्न कर देना, यही उनका काम होता था.

Skandagupta Vikramaditya, कौन थे स्कंदगुप्त जिनका इतिहास फिर से लिखने को कह रहे गृहमंत्री अमित शाह
हूण

चीन में दीवार बनने के बाद हूणों ने अपना रुख यूरोप और रोम की तरफ किया तथा उनको पूरी तरह से बरबाद कर दिया. इसके बाद हूणों ने अखंड भारत की तरफ कदम बढ़ाए जहां उस समय गुप्त वंश का शासन था और स्कंदगुप्त के पिता कुमारगुप्त राजगद्दी पर थे. हूणों ने भारत पर आक्रमण किया और कश्मीर, गुजरात जीतते हुए पाटलिपुत्र(अब पटना) तक पहुंच गए.

अब कुमारगुप्त के माथे पर बल पड़े और वे सोच में पड़ गए कि इन बर्बर आक्रमणकारियों का सामना कैसे होगा, कौन करेगा? स्कंदगुप्त आगे आए और अपने पिता से हूणों के खिलाफ युद्ध छेड़ने की इजाजत मांगी. उन्होंने लंबे समय तक युद्धों के लिए खुद को तैयार किया था. पिता ने अनुमति दे दी.

स्कंदगुप्त हूणों के विरुद्ध युद्ध में कूद पड़े और गुजरात से कश्मीर तक, कश्मीर से कंधार तक हूणों को मार भगाया. बड़ी संख्या में हूण मारे गए, जो बचे वो भाग खड़े हुए. ये लड़ाई 10 सालों तक चली थी.

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स्कंदगुप्त के समय के सिक्के

स्कंदगुप्त के बारे में सबसे अधिक जानकारी प्रख्यात लेखक जय शंकर प्रसाद के नाटकों में मिलती है जिसमें उन्होंने इतिहास का सुंदर वर्णन किया है. उन नाटकों से ही पता चलता है कि स्कंदगुप्त कुमारगु्प्त के बाद गद्दी के वारिस नहीं थे लेकिन अपनी वीरता और पराक्रम के बल पर उन्होंने गद्दी हासिल की और कुशलता से शासन चलाया.

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