ऐसे खोजा गया विक्रम लैंडर का मलबा, जानें कौन है वो लड़का जिसे NASA ने भी दिया क्रेडिट

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगलवार को घोषणा की कि विक्रम लैंडर का मलबा मिल गया है और जहां वह क्रैश हुआ उस जगह की तस्वीरें भी जारी की गई हैं.

एक भारतीय मैकेनिकल इंजीनियर ने अमेरिका के ऑर्बिटिंग कैमरा से चंद्रमा की तस्वीरें देखने के बाद नासा को बताया कि उसे भारतीय चंद्रयान 2 विक्रम लैंडर का मलबा मिला है. दुर्घटनास्थल और उस मलबे का पता शनमुगा सुब्रमण्यम ने लगाया है जिन्होंने लूनर रिकनाइसांस ऑर्बिटल कैमरा से तस्वीरें डाउनलोड करके देखीं. नासा और एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी ने सोमवार को इस बात की पुष्टि की.

सुब्रमण्यम ने मलबे का पता लगाया और वह जगह खोजने में वैज्ञानिकों की मदद की जहां विक्रम लैंडर क्रैश हुआ था. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगलवार को घोषणा की कि विक्रम लैंडर का मलबा मिल गया है और जहां वह क्रैश हुआ उस जगह की तस्वीरें भी जारी की गई हैं. नासा के बयान में कहा गया कि शनमुगा सुब्रमण्यम ने सबसे पहले क्रैश साइट से लगभग 750 मीटर उत्तर पश्चिम में मलबा देखा.

कैसे खोजा गया विक्रम लैंडर?

सुब्रमण्यम के मुताबिक, “मैंने एक खास जगह पर कुछ अलग सी चीज देखी. मुझे लगा यही मलबा होगा. 4-5 दिन तक रोज 7-8 घंटे मैं इसी पर लगाने लगा. आज NASA ने इसको कंफर्म कर दिया.” उन्‍होंने कहा कि “ठीक जानकारी हो तो ऐसा कोई भी कर सकता है.”

बचपन से अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि

सुब्रमण्यम ने बताया कि ‘मुझे विक्रम लैंडर का संभावित मार्ग खोजने में बड़ी मेहनत करनी पड़ी. मुझे हमेशा से अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रही है. मैंने कभी भी कोई लॉन्च नहीं छोड़ा.’ नासा ने कहा कि पहली धुंधली तस्वीर दुर्घटनास्थल की हो सकती है जो एलआरओसी के द्वारा 17 सितंबर को ली गई तस्वीरों से बनी है. विक्रम के बारे में पता लगाने के उद्देश्य से कई लोगों ने इसे डाउनलोड किया. सुब्रमण्यम ने मलबे की पहचान के साथ एलआरओसी से संपर्क किया. ये एरिजोना यूनिवर्सिटी में स्थित है.

एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी ने बताया ‘जानकारी मिलने के बाद एलआरओसी टीम ने पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना की और पुष्टि कर दी.’ यूनिवर्सिटी ने बताया कि जब पहले मोजाइक के लिए 17 सितंबर को तस्वीरें ली गईं तब दुर्घटनास्थल धुंधला दिखाई दे रहा था. 14-15 अक्टूबर और 11 नवंबर को ली गई तस्वीरों के क्रम बेहतर थे. बता दें कि 6 सितंबर को चंद्रयान 2 लॉन्च हुआ था जिसके बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने के प्रयास के समय लैंडर विक्रम का इसरो से संपर्क टूट गया था.

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