परिवार के सदस्यों के बीच तेजी से फैल रहा Coronavirus, शुरुआती लक्षणों का नहीं चलता पता

द लैंसेट इंफेक्शियस डिसीजेज जर्नल में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि SARS-CoV-2 (नया कोरोनावायरस) पुराने सार्स वायरस के मुकाबले घरों में ज्यादा तेजी से फैलता है. संक्रमण फैलने के बाद ही पीड़ित में इसके लक्षण दिखाई देते हैं.
coronavirus spread living together, परिवार के सदस्यों के बीच तेजी से फैल रहा Coronavirus, शुरुआती लक्षणों का नहीं चलता पता

कोरोनावायरस (Coronavirus) संक्रमण परिवार के सदस्यों के बीच तेजी से फैल रहा है. कोरोनावायरस को लेकर हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि यह वायरस उन लोगों के बीच आसानी से फैलता है जो एक साथ रहते हैं.

परिवार के अन्य सदस्यों, जो संक्रमित हैं और उनमें लक्षण नहीं दिखाई देते हैं, ऐसे में यह और भी तेजी से फैलता है. जहां बड़े परिवार एक साथ रहते हैं, वहां संक्रमित व्यक्ति के श्वसन की बूंदें हवा में रह कर दूसरों को भी संक्रमित कर सकती हैं.

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SARS वायरस के मुकाबले ज्यादा तेजी से फैलता है कोरोनावायरस

द लैंसेट इंफेक्शियस डिसीजेज जर्नल में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि SARS-CoV-2 (नया कोरोनावायरस) पुराने सार्स वायरस के मुकाबले घरों में ज्यादा तेजी से फैलता है. संक्रमण फैलने के बाद ही पीड़ित में इसके लक्षण दिखाई देते हैं.

कोरोनावायरस गंभीर तेज श्वसन सिंड्रोम (SARS) या मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम (MERS) की तुलना में घरों में ज्यादा आसानी से फैल सकता है. अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के शोधकर्ताओं के अनुसार, SARS-COV-2 वातावरण में तीन घंटे तक एक्टिव रहता है.

शोधकर्ताओं ने चीन (China) के गुवांगझोऊ शहर में 349 मरीजों और उनके करीब आने वाले 1,964 संपर्कों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया. इससे उन्होंने दूसरे हमले की दर (सेकेंडरी अटैक रेट) का अनुमान लगाया. इस रेट से यह पता लगाया जाता है कि संक्रमित मरीज से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में यह बीमारी फैलने की कितनी संभावना है.

60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों में ज्यादा खतरा

चीन और जमैका के शोधकर्ताओं का कहना है कि परिवार में कई लोग एक साथ रहते हैं जिससे संक्रमण फैलने की आशंका ज्यादा होती है. इसका खतरा तब और भी बढ़ जाता है जब संक्रमित व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई ना दें.

स्टडी में परिवार के सदस्यों के बीच संक्रमण फैलने की की संभावना 39 प्रतिशत और साथ रहने वाले लोगों में 41 प्रतिशत बताई गई है. इसी के साथ यह भी पाया गया कि 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों में SARS-CoV-2 के घरेलू संक्रमण का खतरा ज्यादा है. वहीं, 20 वर्ष या उससे कम आयु के लोगों में संक्रमित होने की संभावना सबसे कम है.

समय पर लगाया जाना चाहिए संक्रमण का पता

अध्ययन में आगे कहा गया है कि एक साथ रहने वाले लोगों या परिवार के सदस्यों में संक्रमण का मामला सामने आने के बाद अलग रहने के अलावा, समय पर संक्रमण का पता लगाने और करीबी संपर्कों के क्वारंटीन के जरिए घरों के अंदर इंफेक्शन की चेन को तोड़ा जा सकता है और कोरोनावायरस मामलों की संख्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

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