क्या है Coronavirus से मौत का सही कारण, रिसर्च में आ रहीं ये कठिनाइयां

एक रिसर्च में सामने आया है कि खून (Blood) का थक्का जमना कोरोना (Coronavirus) से होने वाली मौत का सबसे पहला कारण है, जबकि दूसरी रिसर्च में निमोनिया (Pneumonia) को मौत का सबसे पहला कारण बताया गया है.
coronavirus leading cause of death, क्या है Coronavirus से मौत का सही कारण, रिसर्च में आ रहीं ये कठिनाइयां

दुनियाभर में कोरोनावायरस (Coronavirus) पर रिसर्च चल रही है. अब तक वैज्ञानिक यह नहीं समझ पाए हैं कि कोरोनावायरस से मौत की असली वजह क्या है. क्या निमोनिया से मरीजों की मौत हो रही है या खून के थक्के जम जाने की वजह से? कोरोनावायरस संक्रमितों की किडनी क्यों फेल हो जाती हैं? इन सब सवालों का कोई स्पष्ट जवाब अब तक नहीं मिल पाया है. संक्रमण फैलने के डर से ज्यादातर देशों में कोरोनावायरस मामलों में शवों (Dead Body) का टेस्ट नहीं किया जा रहा है. छोटे सैंपल पर आधारित रिसर्च से मृत्यु के संभावित कारणों में खून के थक्के और निमोनिया की ही तरफ इशारा किया गया है.

कोरोनावायरस है मुख्य रूप से सांस से जुड़ी बीमारी

कोरोनोवायरस महामारी (Covid-19 Pandemic) से दुनियाभर में अब तक लगभग तीन लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. ये मौतें ज्यादातर अस्पतालों में हुई हैं. भारत में 2,400 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जो पूरी तरह से अस्पताल में भर्ती रिकॉर्ड पर आधारित है.

शोधकर्ताओं (Researchers) ने पाया कि कोरोनावायरस सांस से जुड़ी बीमारी है. कोरोनावायरस मुख्य रूप से फेफड़ों पर हमला करता है. यह फेफड़ों में निमोनिया का कारण बनता है. हालांकि, एक बार कोई व्यक्ति कोरोनोवायरस या SARS-CoV-2 से संक्रमित हो जाता है, तो यह बीमारी हृदय, किडनी, रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) और मस्तिष्क तक भी पहुंच सकती है.

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मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम

किसी भी मौत का सही कारण जानने के लिए शव का टेस्ट किया जाना जरूरी होता है. कोरोनावायरस मरीजों की मृत्यु का सही कारण जानने के लिए दुनियाभर के देशों में बहुत से शवों का टेस्ट नहीं किया गया है. बहुत कम मामलों में, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद किए गए टेस्ट में उन्हें कोरोनावायरस पॉजिटिव पाया गया है. डॉक्टरों को कोरोनावायरस से मर चुके मरीज का टेस्ट करने की जरूरत है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर कोरोनावायरस व्यक्ति को कैसे मारता है.

पोस्टमार्टम से संक्रमण फैलने का है खतरा

भारत में ही नहीं, बल्कि अमेरिका (America) और ब्रिटेन में भी मृतक कोरोनावायरस मरीजों के परिवार के सदस्यों ने मौत का सही कारण जानने के लिए शव के टेस्ट किए जाने की मांग की है. पोस्टमार्टम से इस बात का पता लगाया जा सकता है, लेकिन चीन, अमेरिका या अन्य कोई भी देश ऐसा करने के लिए तैयार नहीं है. चीनी अनुभवों पर आधारित मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के अनुसार, कोरोनावायरस से हुई मौत वाले शवों का टेस्ट करने पर शरीर के सर्जिकल खुलने से संक्रमण फैल सकता है.

अभी रिसर्च में है कमी

एक रिसर्च में सामने आया है कि खून का थक्का जमना (Blood clots) कोरोना से होने वाली मौत का सबसे पहला कारण है. लेकिन यह रिसर्च केवल 10 मरीजों पर ही किया गया था. एक अन्य रिसर्च में निमोनिया (Pneumonia) को मौत का सबसे पहला कारण बताया गया है. इसके लिए चीनी शोधकर्ताओं ने फेफड़ों, लिवर और हृदय की निडिल कोर बायोप्सी (Needle Core Biopsy) का उपयोग करके पोस्टमार्टम किया. लेकिन यह अध्ययन भी बहुत कम मरीजों पर ही किया गया.

वजह पता न चलने से मृत्यु दर है ज्यादा

सही और विश्वसनीय आंकड़ों के बिना वैज्ञानिक यह अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं कि कोरोनावायरस से मरीज की मौत कैसे और क्यों होती है. दुनियाभर में इस महामारी से बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु हो रही है. इसी के साथ सभी देशों में कोरोनावायरस से होने वाली मौतों को गिनने का भी कोई निश्चित नियम नहीं है.

कोरोनावायरस के मरीजों की मौत के पीछे के सही कारणों का पता न चल पाने की वजह से भी मौतों की संख्या ज्यादा है. उदाहरण के लिए, जब वैज्ञानिकों को यह पता चला था कि क्षय रोग (T.B.), HIV/एड्स (AIDS) के मरीजों में मौत का मुख्य कारण है, तो एड्स से होने वाली मृत्यु दर में कमी आ गई. लेकिन कोरोनावायरस के लिए अभी तक किसी सही वजह का पता नहीं चल पाया है.

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