महालया अमावस्या: पीएम मोदी-ममता बनर्जी ने दी बधाई, अधिक मास के चलते एक महीने बाद दुर्गा पूजा

अधिक मास (Adhik maas) की वजह से इस बार महालया अमावस्या के दिन दुर्गा पूजा पांडालों की शुरुआत नहीं होगी. दुर्गा पूजा इस साल 22 अक्टूबर से 26 अक्टूबर के बीच में मनाई जाएगी.

durga puja celebration will begin a month after mahalaya this year, महालया अमावस्या: पीएम मोदी-ममता बनर्जी ने दी बधाई, अधिक मास के चलते एक महीने बाद दुर्गा पूजा
प्रतीकात्मक तस्वीर

आज पितृपक्ष का अंतिम दिन है, जिसे महालया अमावस्या भी कहा जाता है. एक तरफ जहां श्राद्ध खत्म होते हैं, वहीं दूसरी तरफ हर साल महालया अमावस्या से ही दुर्गा पांडाल सजने शुरू हो जाते हैं. महालया के सात दिन बाद दुर्गा पूजा शुरू हो जाती है. प.बंगाल के लोगों के लिए महालया अमावस्या का खास महत्व है. लोग हर साल इस दिन का बेसर्बी से इंतजार करते हैं, इसी दिन दुर्गा पांडालों में माता की प्रतिमा स्थापित की जाती है. अधिक मास की वजह से इस बार महालया अमावस्या के दिन दुर्गा पांडालों की शुरुआत नहीं होगी. दुर्गा पूजा 22 अक्टूबर से 26 अक्टूबर के बीच में मनाई जाएगी.

आमतौर पर महालया अमावस्या के अगले दिन ही शरदीय नवरात्रि शुरू होती हैं, लेकिन इस बार अधिक मास होने की वजह से 18 सितंबर से शरदीय नवरात्रि शुरू नहीं होगी. पितृपक्ष की समाप्ति के एक महीने बाद नवरात्रि शुरू होगी. यह कोई पहली बार नहीं है , इससे पहले 2001 में 19 साल पहले भी एसा ही योग था, जब नवरात्रि पितृपक्ष के एक महीने बाद शुरू हुई थी. अधिकमास 18 सितंबर से शुरू होकर 16 अक्टूबर को समाप्त होगा.

‘मल मास’ भी कहलाता है अधिक मास

अधिक मास को पुरुषोत्तम या मल मास भी कहा जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार हर तीन साल बाद अधिक मास आता है. सूर्य और चंद्रमा के बीच संतुलन बना रह सके इसलिए अधिक मास आता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि ‘इस महालया पर हम प्रार्थना करते हैं कि मां दुर्गा हमें कोरोना महामारी से उभरने के लिए शक्ति दें, सबको अच्छा स्वास्थ्य दें’.

प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ट्वीट कर कहा कि ‘मैं सभी को महालया के मौके पर नमस्कार करती हूं, कोविड-19 ने त्योहारों को मनाने पर रोक लगा दी है, लेकिन महामारी की वजह से हम दुर्गा पूजा के लिए अपनी भावनाओं को कम नहीं होने देंगे’

द स्टेटमैन ने एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिक मास के दौरान कोई भी शुभ त्योहार या अनुष्ठान नहीं किया जा सकता. बिसुद्ध सिद्धांत और सूर्य सिद्धांत पंचांग के हिसाब से महालया अमावस्या और दुर्गा पूजा के बीच में अंतर ‘माला मास’ और चंद्र महीना कहलाता है. बंगाली महीना आश्विन एक चंद्र महीना है, इसीलिए दुर्गा पूजा इस महीने के खत्म होने के बाद ही शुरू की जा सकती है.

महालया अमावस्या का बंगालियों के लिए खास महत्व

बंगाली लोग महालया से ही त्योहार के मूड में आ जाते हैं, दुर्गा पांडाल सजने शुरू हो जाते हैं. लोग नए कपड़े खरीदते हैं और त्योहार के लिए पूरी तरह तैयार होते हैं, हालांकि कोरनावायरस महामारी के बीच इस साल त्योहार के रंग फीके रहने के आसार हैं.

महालया अमावस्या के दिन बंगाली लोग पारंपरिक रूप से सुबह उठकर भक्ति गीतों के साथ श्री चंडी के धर्मग्रंथों से चंडीपाठ और महिषासुरमर्दिनी का पाठ सुनते हैं, इसके बाद वे मृत पूर्वजों के लिए प्रसाद बनाते हैं. कहा जाता है कि महालया अमावस्या के दिन श्राद्ध खत्म होने के साथ ही माता का कैलाश पर्वत से धरती पर आगमन होता है और दस दिनों तक वह धरती पर ही रहती हैं.

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