पाकिस्तानी मंत्री बढ़ाएं अपना सामान्य ज्ञान, आज टेलिकॉम में भारत से पीछे, सेंसरशिप में आगे है पाकिस्तान

पाकिस्तान के विज्ञान मंत्री फवाद चौधरी ने मोबाइल की शुरुआत को लेकर ट्वीट किया लेकिन वर्तमान स्थिति बताना भूल गए.

फवाद हुसैन चौधरी पाकिस्तान के विज्ञान मंत्री हैं. अक्सर अपने बयानों की वजह से सोशल मीडिया ट्रोल्स के निशाने पर रहते हैं. ऐसा ही एक ट्वीट उन्होंने किया कि आईटी मंत्रालय साइबर सिक्योरिटी पॉलिसी क्यों नहीं लागू कर रहा है? उस पर किसी ने कह दिया कि बिना अपने सैटेलाइट और सर्वर के चीन से लिए हुए उधार के ऑप्टिकल फाइबर से पाकिस्तान साइबर सिक्योरिटी पर काम कर रहा है. ये देखना सुखद है.

इससे तमतमाए फवाद हुसैन चौधरी ने जवाब दिया कि ‘आपका सामान्य ज्ञान बढ़ा दूं, पाकिस्तान दक्षिण एशिया में फाइबर ऑप्टिक लाने वाला पहला देश था. मोबाइल सर्विस भी पहले पाकिस्तान में शुरू हुई. मनमोहन सिंह का शुक्रगुजार होना चाहिए जिन्होंने 1990 के दशक में में भारत की सूरत बदली.’

फवाद चौधरी ने बात सही कही लेकिन उन्हें इतिहास के अलावा वर्तमान के सामान्य ज्ञान का पता भी होना चाहिए. वहां चीन के साथ के बिना फाइबर ऑप्टिक केबल लाना संभव नहीं था. वर्षों तक मथने के बाद दोनों की परियोजना में मक्खन निकला और मुश्किल से फाइबर ऑप्टिक केबल डालने का काम शुरू हुआ. भारत में 2011 से ही नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के जरिए ये काम शुरू कर दिया था.

भारत में मोबाइल का जाल-पाकिस्तान बेहाल

भारत और पाकिस्तान में मोबाइल धारकों की गिनती की जाए तो ये पाकिस्तान के साथ नाइंसाफी होगी क्योंकि वास्तव में वहां की जनसंख्या कम है. लेकिन टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स की संख्या एक देश के तौर पर देखी जाए तो वाकई बहुत कम है. वहां जितने ऑपरेटर हैं, हमारे यहां तो उतनी कंपनियां मर्ज हो चुकी हैं. पाकिस्तान के पास कुल चार मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर हैं.

1.Jazz- ये पाकिस्तान की सबसे बड़ी टेलिकॉम ऑपरेटर है लेकिन कंपनी पाकिस्तान की नहीं है. इस पर एम्सटर्डैम स्थित कंपनी वियॉन लिमिटेड का स्वामित्व है.

2.Telenor- ये नॉर्वे की कंपनी है और पाकिस्तान में दूसरे नंबर पर है.

3.Zong- ये चीन की कंपनी है जो पाकिस्तान में टेलिकॉम सर्विस दे रही है.

4.Ufone-ये कंपनी पाकिस्तान की PTCL और अमीरात की एतीसालत के गठबंधन से चल रही है.

भारत से पहले मोबाइल सर्विस पाकिस्तान में आने का दावा करने वाले फवाद हुसैन चौधरी ही बता सकते हैं कि 1989 में ‘इंस्टाफोन’ और ‘पाकटेल’ से शुरू होकर ये गिनती 30 सालों में चार तक क्यों पहुंची है. भारत में रिलायंस जियो से लेकर भारती एयरटेल और आइडिया जैसी भारतीय कंपनियों के अलावा वोडाफोन जैसी विदेशी कंपनियां भी अब तक बनी हुई हैं. 2000 में मोदी टेल्स्ट्रा से 2019 में टाटा डोकोमो तक 16 कंपनियां बंद या मर्ज हो चुकी हैं. मर्ज होने वालों में आइडिया और वोडाफोन भी हैं. टेलीकम्युनिकेशन में पाकिस्तान का भारत से कोई मुकाबला ही नहीं है.

सेंसरशिप में अव्वल पाकिस्तान

भारत में इंटरनेट सेंसरशिप न के बराबर है. पिछले दिनों सरकार ने 200 से ऊपर पोर्न साइट्स पर बैन लगाया था. पाकिस्तान में तो सोशल मीडिया वेबसाइट्स पर भी बैन लग चुका है. फेसबुक और यूट्यूब ने वहां लंबे समय तक बैन झेला है और उसके खिलाफ कोई आवाज तक न उठा पाया. चीन जितना तो नहीं लेकिन इंटरनेट सेंसरशिप के मामले में पाकिस्तान भारत से बहुत आगे है. इसमें फवाद हुसैन चौधरी कहते तो हम जरूर हार जाते लेकिन वर्तमान में टेली कम्यूनिकेशन ही नहीं, हर मामले में भारत पाकिस्तान से आगे है.

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