‘हिमालयन वायग्रा’ क्‍या है जिसपर भिड़ पड़े हैं उत्‍तराखंड के दो गांव

हिमालयन वायग्रा या कीड़ा जड़ी के फायदों के कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं म‍िले हैं.
हिमालयन वायग्रा, ‘हिमालयन वायग्रा’ क्‍या है जिसपर भिड़ पड़े हैं उत्‍तराखंड के दो गांव

‘हिमालयन वायग्रा’ या कीड़ा जड़ी पर दावे को लेकर उत्‍तराखंड के दो गांव भिड़ गए हैं. पिथौरागढ़ जिले के कुछ ग्रामीण पहाड़ी पर ऊपर जाकर चरागाहों में इसकी तलाश करते हैं, मगर उसकी मिल्कियत को लेकर विवाद पैदा हो रहा है. पिछले कुछ सालों में बुई और पाटो गांव के लोग कई बार एक-दूसरे के खिलाफ आ चुके हैं. दोनों दावा करते हैं कि रलाम और राजरम्‍भा बुग्‍याल के घास के मैदानों से मिलने वाले कीड़ा जड़ी पर उनका हक है. प्रशासन से जब मसले का कोई हल न निकला तो उन्‍होंने अब यहां पर CrPC की धारा 145 लगा दी है.

क्‍या है हिमालयन वायग्रा

कीड़ा जड़ी हिमालय में पाई जाती है जिसे दुनिया ‘हिमालयन वायग्रा’ के नाम से जानती है. यूं तो यह एक फंगस है मगर इसे हासिल करने को चीन, नेपाल, तिब्‍बत से लेकर भारत में खून तक बहा है. नेपाली में ‘यार्सागुम्‍बा’ के नाम से मिलती है, वैज्ञानिक नाम Ophiocordyceps sinensis है. साढ़े तीन हजार फुट से ज्‍यादा ऊंचाई पर ही मिलती है. कीमत 7000 रुपये प्रति ग्राम से भी ज्‍यादा, यानी सोने से भी ज्‍यादा महंगी.

किस वजह से इतनी महंगी

कीड़ा जड़ी या हिमालयन वायग्रा के फायदों का कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है. मगर यहां के लोग दावा करते हैं चाय, सूप या किसी और रूप में इसका सेवन नपुंसकता से लेकर कैंसर तक का इलाज कर देता है. यौन शक्ति बढ़ाने और इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन को दूर करने की आयुर्वेदिक दवा के रूप में इसका ऐसा प्रचार हुआ है कि दुनिया भर में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. रिसर्चर्स के मुताबिक, बीजिंग में यह सोने से तीन गुना कीमत पर बिकती है.

नेपाली इतिहास में अहम भूमिका

2011 में नेपाल में इसी जड़ी-बूटी को लेकर हुए संघर्ष में किसानों की हत्‍या के आरोप में 19 गांववालों को दोषी ठहराया गया था. नेपाली माओवादी और सरकारी ताकतों के बीच इसकी खेती पर कंट्रोल को लेकर लंबी लड़ाई चलती रही है. तिब्‍बत की GDP का एक बड़ा हिस्‍सा यार्सागुम्‍बा की बिक्री से आता है.

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