हिंसा, पैसा, सुरंगें और निजी सेना- ऐसी होती है ड्रग तस्करों की दुनिया

इन ड्रग तस्करों के कमाने, धंधे को बढ़ाने, दुश्मनों को निपटाने के तरीको अजीबोगरीब थे.

अगर आपने नेटफ्लिक्स पर टीवी सीरीज ‘नारकोज़’ देखी होगी तो उसमें एल चापो वाला हिस्सा भी देखा होगा और उसकी जिंदगी से हैरान भी हुए होंगे. एल चापो से जुड़ी लेटेस्ट अपडेट ये है कि उसके बेटे को मेक्सिको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. उसके समर्थकों और पुलिस के बीच गोलाबारी की वजह से कुलियाकन शहर जंग के मैदान में बदल गया है.

Pablo Escobar and El Chapo, हिंसा, पैसा, सुरंगें और निजी सेना- ऐसी होती है ड्रग तस्करों की दुनिया
दुनिया के बड़े ड्रग तस्कर ऐसे ही होते हैं. उनकी जुर्म की दुनिया चीजों को अलग तरह से देखती, समझती और नियंत्रित करती है. उनका अपना कानून होता है, अपने तरीके होते हैं, यहां तक कि कई बार ड्रग डीलर्स की निजी सेनाएं भी होती हैं. मेक्सिको का एल चापो हो, कोलंबिया का पाब्लो एस्कोबार हो या फिर न्यूयॉर्क का फ्रैंक लूकस, इन लोगों ने ड्रग्स के धंधे से इतनी दौलत और नाम कमाया इनके किस्से मशहूर हो गए. उन्हीं किस्सों के जरिए हम जानेंगे कि ड्रग तस्करों की दुनिया कैसी होती है.

एल चापो की खुफिया सुरंग

शुरुआत एल चापो के कारनामों से ही करते हैं. मेक्सिको के सिनालोआ शहर में साल 1957 में एक किसान परिवार में एल चापो पैदा हुआ. घर के आस-पास अफीम और गांजे की खेती होती थी, यहीं से उसे जीवन का सूत्र मिल गया. तस्करी का कारोबार यहीं से शुरू कर दिया. आगे चलकर मिगेल एंजेल फेलिक्स गालार्दो को अपना गॉडफादर बनाया और उसके न रहने पर ड्रग तस्करी की दुनिया का बेताज बादशाह बन गया.

एल चापो को सुरंगों से बहुत प्यार रहा है, या यूं कहें कि उसके कारोबार से लेकर फरार होने तक सुरंगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा. 1980 के दशक में उसने अमेरिका और मैक्सिको की सीमा पर खुफिया सुरंगें बनवा दीं जिनसे ड्रग्स का कारोबार तेजी से बिना पकड़ में आए किया जा सके.

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इन सुरंगों को मंझे हुए इंजीनियर्स की देख-रेख में बनवाया गया था ताकि भारी वाहन बेरोकटोक इनके अंदर से गुजर सकें. सुनवाई के दौरान एल चापो ने न्यूयॉर्क की अदालत में बताया था कि उसने 200 टन से ज्यादा ड्रग्स अमेरिका सप्लाई की थी. दोनों देशों की सीमा पर मौजूद गार्ड्स को इस तस्करी के दौरान मोटा पैसा दिया जाता था.

2010 में ल्यूसेरो नाम की एक लड़की मेक्सिको की राजनीति में अपना हाथ आजमा रही थी. एल चापो उसे मिला और पहली बार में उसका दीवाना हो गया. उसने ल्यूसेरो को हर संभव तरीके से लुभाने की कोशिश की. ल्यूसेरो भी कुछ लालच और कुछ दबाव में मान गई और एल चापो की गर्लफ्रेंड बन गई.

ल्यूसेरो से एल चापो का रिश्ता बिस्तर तक ही नहीं रहा, उसे एल चापो ने अपने धंधे के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. उससे भी ड्रग की तस्करी करवाने लगा. ल्यूसेरो को 400 ग्राम गांजे का पैकेट देकर वह प्लेन पर भेज देता था. ल्यूसेरो पहले प्यार फिर डर की वजह से एल चापो के इशारों पर नाचती रही.

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ल्यूसेरो ने सुनवाई के दौरान एल चापो के सुरंग से बिना कपड़ों के भाग निकलने का दिलचस्प किस्सा सुनाया था. वही कुलियाकन शहर जो अब एल चापो के बेटे की वजह से जल रहा है, वहां पर 2014 में एल चापो छुट्टियां बिताने आया था. उसने माजातलान के मायरामर में स्थित अपने सेफ हाउस में ल्यूसेरो को भी बुलवा लिया था.

रात में दोनों बिस्तर पर निजी पल बिता रहे थे तभी दरवाजे पर आहट हुई. दरवाजे पर मौजूद एल चापो के वफादार कॉन्डोर ने कहा कि रेड़ पड़ चुकी है. यहां से भागना होगा. चापो ने दरवाजा खोला और उसे ये भी ध्यान नहीं रहा कि उसने कपड़े नहीं पहने हैं. उसके साथ ल्यूसेरो भी चादर लपेटकर भागी.

एल चापो, ल्यूसेरो, कॉन्डोर और एक साथी बाथरूम में पहुंचे, एक खुफिया ढक्कन को खोला और अंधेरे में सीढ़ियों पर उतर गए. एल चापो अब भी बिना कपड़ों के था और अंधेरे में किसी को कुछ नहीं दिख रहा था. चारों लोग पुलिस की पकड़ से भाग निकले.

एल चापो ने अपने गैंग को इतना ऊंचा बनाया कि मेक्सिको में वो सरकार के बराबर सत्ता हासिल कर चुका था. इसके लिए उसने पैसे खिलाए, लोगों को निर्ममता से मारा. वो गद्दारों को भी क्रूरता से मौत के घाट उतार देता था.

पाब्लो एस्कबार की निजी सेना

पाब्लो एमिलियो एस्कोबार गैविरिया ने करीब 2 दशकों तक ड्रग तस्करी की दुनिया में नाम ऊंचा किया. उसे एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था. उसके बारे में कहा जाता है कि वो दुनिया का सबसे अमीर ड्रग तस्कर था और उसके अरबों रुपए हर साल चूहे कुतर देते थे. कहते हैं कि उसके यहां पैसे गिनकर नहीं, तोलकर रखे जाते थे.

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पाब्लो एस्कोबार के पास पांच हजार एकड़ में फैला नेपल्स स्टेट नाम का आलीशान एस्टेट था. यही नहीं, उसके पास निजी चिड़ियाघर, खेत, कई आलीशान मकान थे. वह अपने रहने के लिए एक किले का निर्माण करा रहा था जो कि कभी पूरा नहीं हो पाया. उसके पास निजी सेना भी थी और सरकार की सेना में भी उसने बहुत से सैनिकों अफसरों को पैसे खिलाकर खरीद रखा था.

कोलंबियाई ड्रग माफिया पाब्लो एस्कोबार कोकीन का कारोबार करता था. उसने तस्करी के कई नए तरीके ईजाद किए थे जिनमें से एक ये भी था कि वह ट्रक के पहियों में ड्रग्स भरकर बाहर भेजता था. पाब्लो के भाई रॉबर्टो ने एक किताब लिखी है जिसके मुताबिक पाब्लो कई बार दिन में 15 टन तक कोकीन स्मगल कर देता था.

1989 में फोर्ब्स मैगजीन ने उसे दुनिया का सबसे अमीर आदमी बताया था जिसके पास उस समय 30 बिलियन डॉलर यानी करीब 16 खरब रुपए की संपत्ति थी. पाब्लो की पत्नी विक्टोरिया ड्यूगेनिया ने खुलासा किया था कि पाब्लो के दुश्मन लॉस पेपेस ने उसे जान से मारने के लिए 16 अरब रुपए खर्च कर दिए थे.

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रॉबर्टो ने अपनी किताब में लिखा है कि जिस समय पाब्लो का सालाना मुनाफा 1 लाख 26 हजार 988 करोड़ रुपए था तो गोदाम में रखी इस रकम का दस फीसदी हिस्सा चूहे कुतर देते थे या सीलन की वजह से खराब हो जाता था. पाब्लो 2500 डॉलर यानी एक लाख 67 हजार रुपए की रबर बैंड हर महीने नोटों की गड्डियां बांधने पर खर्च कर देता था. उसके पास इतना पैसा था कि उसने कोलंबिया की राजनीति में घुसने के लिए वहां की सरकार को देश का 10 बिलियन डॉलर यानी 5.4 खरब रुपए का कर्ज चुकाने का ऑफर दिया था.

सिर्फ इन दो ड्रग तस्करों की कहानियों से आप समझ सकते हैं कि इन पर फिल्में क्यों बनती हैं. इनकी जिंदगी में रहस्य, रोमांच, हिंसा, जुर्म, सेक्स, वो सब कुछ है जो लोग परदे पर देखना चाहते हैं. इन्हीं में से एक की बोई हुई आग आज मेक्सिको को जला रही है.

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