जानिए, संविधान के मुताबिक कौन हो सकता है भारत का नागरिक और क्या है सिटीजनशिप एक्ट

आइए जानते हैं कि कोई भी इंसान कैसे भारत का नागरिक बनता है. भारत के संविधान में और उसे आधार पर बना सिटीजनशिप एक्ट इसके बारे में क्या कहता है.
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नागरिकता संशोधन बिल, 2019 को लोकसभा में सोमवार को लंबी बहस के बाद पास कर दिया गया. राज्यसभा में इसे बुधवार को इसे पेश किया जाएगा. ऊपरी सदन में भी अगर बिल पास हो जाता है तो भारत की नागरिकता के पैमाने बदल जाएंगे. इसके पहले भारत का नागरिक बनने की पात्रता और उसके नियम में भी थोड़ा बदलाव हो जाएगा.

दुनिया भर में किसी भी देश के नागरिक होने के लिए दो तरीके चलते हैं. राजनीति विज्ञान के अनुसार लैटिन भाषा के दो शब्द इन दोनों ही तरीके के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. इसमें पहला है ‘जूस सैंग्युनिस’ इसका मतलब है कि नस्ल या रक्त संबंध के आधार पर नागरिकता दी जाती है. दूसरे शब्द ‘जूस सोली’ का मतलब है जमीन के आधार पर यानी उस देश की सीमा के अंदर पैदा हुए हर इंसान को नागरिकता मिलती है. पहले भारत जूस सोली के तरीके से नागरिकता देता था. बाद में जूस सोली और जूस सैंग्युनिस दोनों तरीके इस्तेमाल किए जाने लगे.

आइए जानते हैं कि कोई भी इंसान कैसे भारत का नागरिक बनता है. भारत के संविधान में और इस आधार पर बना सिटीजनशिप एक्ट, 1955 इसके बारे में क्या कहता है.

  • भारत की संविधान में नागरिकता और इससे जुड़े हुए कानून को केंद्रीय सूची के विषय के अंतर्गत रखा गया है. इससे जुड़े हुए कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास सुरक्षित है. संविधान के अनुच्छेद 5 से अनुच्छेद 11 तक नागरिकता के बारे में कानून बनाए गए हैं. अनुच्छेद 5 से 10 नागरिकता की पात्रता को परिभाषित करते हैं और अनुच्छेद 11 नागरिकता के मामलों पर संसद को कानून बनाने का अधिकार देता है.
  • अनुच्छेद 5 में लिखा है, ‘यदि कोई व्यक्ति भारत में जन्म लेता है और उसके माता-पिता दोनों या दोनों में से कोई एक भारत में पैदा हुआ हो तो वह भारत का नागरिक होगा. भारत का संविधान लागू होने के पांच साल पहले से भारत में रह रहा हर व्यक्ति भारत का नागरिक होगा.’
  • अनुच्छेद 6 में पाकिस्तान से आनेवाले लोगों की नागरिकता के बारे में बताया गया है. इसमें लिखा है, “19 जुलाई 1948 से पहले पाकिस्तान से भारत में आकर रह रहे लोग भारत के नागरिक होंगे. 19 जुलाई 1948 के बाद आए लोगों को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. इसके लिए कम से कम छह महीने भारत में रहना जरूरी है. दोनों ही हालत में नागरिकता पाने वाले शख्स के मां, पिता, दादा या दादी का भारत में जन्म लेना जरूरी है.”
  • अनुच्छेद 7 में पाकिस्तान जाकर और फिर लौटने वाले लोगों के बारे में बताया गया है. इसमें लिखा है, ‘यदि कोई व्यक्ति 1 मार्च 1947 के बाद पाकिस्तान चला गया और थोड़े समय बाद वापस आ गया तो उसे 19 जुलाई 1948 के बाद आए लोगों के लिए बने नियम मानने होंगे. मतलब उसे भारत में कम से कम छह महीने तक रहकर अपना रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. इसके बाद उस शख्स को भारत का नागरिक माना जाएगा.’
  • अनुच्छेद 8 में विदेशों में रहनेवाले भारतीय लोगों की संतान की नागरिकता के बारे में बताया गया है. इसमें लिखा है, ‘विदेश में पैदा हुए किसी भी बच्चे को भारत का नागरिक माना जाएगा अगर उसके माता-पिता या दादा-दादी में से कोई भारत का नागरिक हो. उसका विदेश में मौजूद भारतीय दूतावास या उच्चायोगों में भारतीय नागरिक के रूप में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा.’
  • अनुच्छेद 9 में भारत के एकल नागरिकता कानून के बारे में समझाया गया है. इसमें लिखा है, ‘अगर कोई भारतीय नागरिक किसी दूसरे देश की नागरिकता ले लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता अपने आप ही खत्म हो जाएगी.’
  • अनुच्छेद 10 में लिखा है, ‘अनुच्छेद 5 से अनुच्छेद 9 के बीच के नियमों का पालन कर रहे लोग भारत के नागरिक हैं. इसके अलावा संसद के पास अधिकार होगा कि वह नागरिकता संबंधी जो भी नियम बनाएगी उनके आधार पर नागरिकता दी जा सकेगी.’
  • अनुच्छेद11 में लिखा है, ‘इन अनुच्छेदों के अनुसार किसी को भी नागरिकता देना या उसकी नागरिकता खत्म करने के बारे में कानून बनाने का अधिकार भारत की संसद के पास सुरक्षित रहेगा.’

वहीं दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संविधान के अनुसार नागरिकता कानून ( Citizenship act), 1955 बनाकर इसकी विस्तार से व्याख्या की है. इस एक्ट के मुताबिक भारत की नागरिकता हासिल करने के नियमों को चार आधार पर बांटा गया है. इसके अंतर्गत जन्म के आधार पर, वंश के आधार, रजिस्ट्रेशन के आधार पर और नेचुरलाइजेशन के आधार पर भारत की नागरिकता मिलती है.

1. जन्म 
26 जनवरी 1950 को या इसके बाद और 1 जुलाई 1987 के पहले जिन लोगों का भारत में जन्म हुआ है. यहां इसका कोई असर नहीं पड़ता कि कि इनके माता-पिता कहां के नागरिक थे या हैं.
पहली जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच भारत में जन्म लेने वाला ऐसा शख्स जिसके जन्म के समय उसके माता या पिता में से कोई भी भारतीय नागरिक है.
तीन दिसंबर 2004 के बाद भारत में जन्म लेने वाला कोई भी व्यक्ति जिसके माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हों या कम से कम कोई एक भारतीय नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो.

2. रजिस्ट्रेशन
भारतीय मूल का ऐसा व्यक्ति जो कम से कम सात वर्षों से यहां रह रहा हो.
भारतीय मूल का ऐसा व्यक्ति जो अविभाजित भारत के अलावा किसी दूसरे देश में रह रहा हो.
ऐसा व्यक्ति जिसका भारतीय नागरिक से विवाह हुआ हो और रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने से पहले कम से कम सात वर्षों से भारत में रह रहा हो.
ऐसे व्यक्ति के छोटे बच्चे जो भारतीय नागरिक है.

3. वंश
ऐसा व्यक्ति जिसका जन्म 26 जनवरी 1950 को या इसके बाद भारत के बाहर हुआ, लेकिन उसके माता-पिता भारतीय नागरिक हों.
ऐसा व्यक्ति जिसका जन्म 10 दिसंबर 1992 के बाद और तीन दिसंबर 2004 के पहले भारत के बाहर हुआ हो और जिसके माता या पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो.
ऐसा व्यक्ति जिसका जन्म तीन दिसंबर 2004 के बाद भारत के बाहर हुआ हो, लेकिन उसके माता-पिता यह घोषित करें कि उसके पास किसी दूसरे देश का पासपोर्ट नहीं है और वह जन्म के एक साल के अंदर भारतीय दूतावास में रजिस्ट्रेशन करवा ले.

4. नेचुरलाइजेशन
अगर कोई व्यक्ति 12 साल से भारत में रह रहा है और सिटीजनशिप एक्ट के थर्ड शेड्यूल की सभी योग्यता पूरी कर रहा हो.

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