3 लेयर टेक्नोलॉजी के इस्‍तेमाल से कैसे कंटेंट मॉडरेशन करता facebook, जानें

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से कंटेंट को लेकर यूजर्स के रिपोर्ट किए बिना ही आपत्तिजनक कंटेंट का पता लगाया जा सकता है और इसके परिणाम भी यूजर्स के रिपोर्ट्स के मुकाबले कहीं ज्‍यादाा सटीक होते हैं.
Facebook Harmful Content, 3 लेयर टेक्नोलॉजी के इस्‍तेमाल से कैसे कंटेंट मॉडरेशन करता facebook, जानें

फेसबुक (Facebook) अपने कंटेंट मॉडरेशन के लिए, तकनीक के तीन पहलुओं का सहारा ले रहा है ताकि अपने बाकी के सभी ऐप्स में अपनी समीक्षा की प्रक्रिया को लागू कर सके.

प्रोएक्टिव डिटेक्शन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से कंटेंट को लेकर यूजर्स के रिपोर्ट किए बिना ही आपत्तिजनक कंटेंट का पता लगाया जा सकता है और इसके परिणाम भी यूजर्स के रिपोर्ट्स के मुकाबले कहीं ज्‍यादाा सटीक होते हैं. IANS की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने इस बारे बताया कि इस तकनीक से हमें हार्मफुल कंटेंट के बारे में पता लगाने में मदद मिलती है.

ओटोमेशन: फेसबुक में इंटेग्रिटी के प्रोडक्ट मैनेजमेंट के निदेशक जेफ किंग ने कहा, “ऑटोमेशन से रिपोर्ट की गई किसी भी सामग्री पर कार्रवाई करने का काम भी काफी आसान हो जाता है, इससे हमारी टीम को एक ही चीज की समीक्षा बार-बार नहीं करनी पड़ती है जिससे समय भी बचता है. कोविड-19 (Covid-19) महामारी के वक्त तो ये सिस्टम और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए है जब विषय सामग्रियों की समीक्षा करने वाली हमारी टीम अपने-अपने घरों में बैठकर काम कर रही हैं.”

और अंत में रिपोर्ट किए गए कंंटेंट को सिर्फ क्रोनोलॉजिकल तरीके से देखने के बजाय AI उस विषय के कंटेंट को प्राथमिकता देता है जो महत्वपूर्ण होता है, चाहे इसे फेसबुक में रिपोर्ट किया गया हो या फिर अपने ही प्रोटेक्टिव सिस्टम द्वारा इसका पता लगाया गया हो.

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