Coronavirus से जंग में कितना कारगर है Social Bubble? जानें- क्यों हो रही दुनिया भर में चर्चा

न्यूजीलैंड (New Zealand) के बाद जर्मनी (Germany) ने भी कोरोनावायरस (Coronavirus) से जंग में सोशल बबल (Social Bubble) के मॉडल को अपनाया. इटली के कुछ इलाकों में भी यह प्रयोग अपनाया गया. अब ब्रिटेन ने इसे अमल में लाने की बात कही.
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कोरोनावायरस (Coronavirus) से जंग में बड़े हथियार के तौर पर पेश लॉकडाउन (Lockdown) में समय के साथ-साथ धीरे-धीरे रियायत दी जा रही है. इस बीच दुनिया में कोविड-19 (Covid-19) को मात देने वाले देश न्यूजीलैंड का एक प्रयोग चर्चित हो रहा है. सोशल बबल (Social Bubble) नाम के इस सामाजिक मॉडल को जर्मनी ने भी अपनाया. अब ब्रिटेन भी इसको अमल में लाने वाला है.

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी दुनियाभर में चर्चा बटोर रहे ‘सोशल बबल’ को अपनाने की बात कही है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने सोशल बबल पर रिसर्च के बाद अपनी सकारात्मक राय जाहिर की है. रिसर्चर्स के मुताबिक लॉकडाउन की घटती पाबंदियों या अनलॉक (Unlock) की प्रक्रियाओं के बीच अगर परिवार के सदस्य एक-दूसरे से मिलते हैं तो संक्रमण के मामले कम हो सकते हैं. इससे लोगों को मानसिक मजबूती भी मिल सकती है.

क्या है Social Bubble मॉडल

इस सामाजिक मॉडल को अपनाने से लोग दूरी बनाकर एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं. परिवार के सदस्य, अक्सर मिलते रहने वाले करीबी दोस्त या कलीग्स के छोटे समूह को सोशल बबल कहते हैं. वे लोग जिन्हें आप किसी भी सूरत में मिलने से नहीं रोकना चाहते या जिनसे मिलकर आपको वाकई खुशी होती है. ऐसे लोगों के छोटे-छोटे समूहों को लॉकडाउन के दौरान मिलने की इजाजत देने की बात हो रही है. रिसर्च के मुताबिक इस तरह से कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है.

न्यूजीलैंड में सफल रहा प्रयोग

इस सामाजिक मॉडल की शुरुआत न्यूजीलैंड से हुई है. वहां यह प्रयोग सफल रहा है. न्यूजीलैंड की आबादी 50 लाख से भी कम है और वहां फरवरी के आखिर में कोरोनावयरस का पहला केस सामने आया था. सरकार ने मेडिकल एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर इस महामारी (Pandemic) से उबरने के लिए 4 सूत्रीय कार्यक्रम बनाया. इसमें शामिल 43 प्वॉइंट में सोशल बबल भी एक अहम हिस्सा था.

न्यूजीलैंड में लगातार 7 हफ्ते तक दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन लगा रहा. हर हफ्ते इसकी समीक्षा की गई. देश में कुल 1154 मामले सामने आए और सिर्फ 22 लोगों की मौत हुई. 8 जून को देश में कोरोनावायरस के आखिरी एक्टिव केस के ठीक होने का ऐलान किया गया.

न्यूजीलैंड के बाद जर्मनी ने भी सोशल बबल के मॉडल को अपनाया. इटली के कुछ इलाकों में भी यह प्रयोग अपनाया गया. अब ब्रिटेन ने इसे अमल में लाने की बात कही. दूसरे कई देश भी फिलहाल इस पर विचार कर रहे हैं.

Social Bubble मॉडल की खासियत

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस की रिसर्च के मुताबिक यह मॉडल संक्रमण के हाई रिस्क जोन में रहने वाले और अधिक देखभाल की जरूरत वाले लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी है. अकेले आइसोलेशन में रहने वाले या जरूरतमंद लोगों के लिए यह मॉडल काफी राहत देने वाला है. तनाव या कमजोर आर्थिक स्थिति वाले लोगों को भी अपनों का साथ मिले तो वह बेहतर फील कर सकते हैं.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च नेचर ह्यूमन बिहैवियर जर्नल में प्रकाशित होने वाले रिसर्चर प्रो. मेलिंडा के मुताबिक, आइसोलेशन से बेहतर है आपस में दूरी बनाकर मिला जाए. इस तरह लंबे समय तक कोरोना संक्रमण का आंकड़ा बढ़ने से रोका जा सकता है.

Social Distancing और Social Bubble में अंतर

सोशल डिस्टेंसिंग में लोगों को भीड़ या समूह में रहने की इजाजत नहीं होती. उन लोगों पर एक-दूसरे के संपर्क में न आने की पाबंदी रहती है. सोशल बबल मॉडल में घर में ही परिजनों, करीबी दोस्तों या कलीग्स के मिलने-जुलने की इजाजत रहती है. बात करते समय उनके बीच भी पर्याप्त दूरी बरतने की जरूरत होती है.

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