जन्माष्टमी विशेष: वो युद्ध जिसमें कृष्ण ने ले लिया था भगवान राम का रूप

कृष्ण जन्माष्टमी पर पढ़िए कृष्ण से जुड़ी वो कहानी जिसका वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण में मिलता है.

राम और कृष्ण दोनों भगवान विष्णु के अवतार हैं और दोनों क्रमश: त्रेता और द्वापर युग में हुए ये तो सभी जानते हैं. लेकिन कृष्ण ने एक बार राम का रूप ले लिया था ये बात कम लोगों को पता होगी. श्रीमद्भागवत महापुराण में इस घटना का वर्णन मिलता है.

ये कहानी जामवंत से जुड़ी हुई है. जामवंत रामायण और महाभारत दोनों कथाओं में मिलते हैं. राम ने जब रावण का वध किया तो जामवंत उनसे प्रभावित होकर बोले कि मैं एक बार आपसे युद्ध लड़ना चाहता हूं. राम ने कहा कि तुम्हारी इच्छा मेरे अगले अवतार में पूरी होगी.

द्वापर युग में सत्राजित नाम के आदमी ने सूर्य की पूजा की. सूर्य प्रसन्न हुए और सत्राजित को श्यामांतक नाम की एक मणि दी. मणि लेकर सत्राजित निराश हुआ क्योंकि उसे उस मणि की शक्ति का पता नहीं था. उसकी समझ में नहीं आया कि इसका क्या करें. वो उसे लेकर कृष्ण के पास गया. कृष्ण उस मणि की शक्ति को पहचान गए और कहा इसे राजा उग्रसेन को दे दो.

सत्राजित ने सोचा कि मणि उन्हें वरदान में मिली है, वो किसी को नहीं देगा. उसने मणि अपने घर में रखी. वो मणि एक दिन में आठ किलो सोना देने लगी तो उसकी शक्ति का पता लगा. एक दिन सत्राजित का भाई प्रसेनजित मणि लेकर जंगल घूमने चला गया.

प्रसेनजित को जंगल में शेर ने मार डाला और मणि पर कब्जा कर लिया. उधर से गुजरते हुए जामवंत की नजर मणि पर पड़ी तो वे मुग्ध हो गए. उन्होंने शेर को मारकर मणि छीन ली. घर आकर मणि अपने बच्चे को दे दी. उन्हें मणि की शक्ति के बारे में कुछ पता नहीं था.

सत्राजित को घर में मणि नहीं मिली तो परेशान हो गया. उसने सोचा कि कृष्ण के अलावा मणि के बारे में किसी को पता नहीं था. उन्होंने ही प्रसेनजित को मारकर मणि रख ली होगी. कृष्ण इस आरोप से दुखी हुए और वचन दिया कि मैं मणि खोजकर लाऊंगा और तुम्हें दूंगा.

Krishna Janmashtami, जन्माष्टमी विशेष: वो युद्ध जिसमें कृष्ण ने ले लिया था भगवान राम का रूप

मणि खोजते हुए कृष्ण जामवंत के द्वार पर पहुंचे और वहां बच्चों को मणि से खेलते देखा तो मणि ठीनने की कोशिश की. जामवंत को क्रोध आ गया और दोनों में भीषण युद्ध हो गया. 28 दिनों तक चले युद्ध में कृष्ण ने जामवंत को ऐसा घूंसा मारा कि वो राम को याद करने लगे. तब कृष्ण ने राम का रूप लिया और उनकी इच्छी याद दिलाई. जामवंत ने मणि और अपनी बेटी का हाथ कृष्ण के हाथ में दे दिया. सत्राजित को जब सच पता चला तो उन्होंने कृष्ण से क्षमा मांगी और अपनी बेटी सत्यभामा का विवाह कृष्ण से करने का वादा किया.