नारायण मूर्ति ने क्यों छुए रतन टाटा के पैर? एक शिकायती पत्र से शुरू हुआ था टाटा-मूर्ति परिवार का रिश्ता

बिजनेस की दुनिया का बड़ा नाम रतन नवल टाटा और आईटी की सबसे बड़ी कंपनी इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति एक दूसरे से रूबरू हुए. इस दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने करोड़ों लोगों का दिल जीत लिया.

हिंदुस्तान की ताकत गोला बारूद से ज्यादा यहां की सभ्यता, संस्कृति और आदर्श हैं. हमारे देश में बच्चों को संस्कार सिखाया जाता है लेकिन समय के साथ कुछ अपने संस्कार भूल जाते हैं और कोई इसको बेशकीमती तोहफा समझ हमेशा अपने साथ रखते हैं. बुधवार को ऐसी ही एक तस्वीर ने करोड़ों लोगों का दिल जीत लिया.

बिजनेस की दुनिया का बड़ा नाम रतन नवल टाटा और आईटी की सबसे बड़ी कंपनी इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति एक दूसरे से रूबरू हुए. इस दौरान नारायण मूर्ति ने तुरंत रतन टाटा के पैर छुए. ये तस्वीर सच मायनों में भारतीय मूल्यों को दर्शाती है.

कर्तव्यनिष्ठा और सादगी का दूसरा नाम सुधा मूर्ति

अब जो बात यहां हम लिखने जा रहे है वो भी आपके दिल को छू जाएगी. नारायण मूर्ति और टाटा परिवार का संबंध बहुत ही पहले से है. इस रिश्ते की शुरूआत एक शिकायत से हुई थी. सुनने में भले ही ये बात थोड़ी अजीब लगे लेकिन ये बात सच है.

दरअसल, नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति का नाम शायद ही किसी ने न सुना हो. कर्तव्यनिष्ठा और सादगी का अगर कोई दूसरा नाम है तो वो हैं सुधा मूर्ति. टाटा और मूर्ति दोनों के बीच ऐसे रिश्ते की वजह हैं सुधा मूर्ति.

सुधा मूर्ति की बचपन से पढ़ाई-लिखाई में बहुत तेज थीं. उनका मन था कि वो इंजीनियरिंग में दाखिला करें और पढ़ाई के बाद इंजीनियर बनें. लेकिन एक इंटरव्यू में खुद सुधा मूर्ति बतातीं हैं कि हुबली के इंजीनियर कॉलेज में जाने देने के लिए उनके ही घरवाले राजी नहीं थे. तब लड़कियों का इंजीनियरिंग करना अनोखी बात थी.

सुधा मूर्ति के लिए कॉलेज में तीन शर्तें

दाखिले के लिए सुधा बी.वी.बी.कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी पहुंची तो प्रिंसिपल ने 3 शर्तें रखीं. इनमें पहली थी कि सुधा को ग्रेजुएशन खत्म होने तक साड़ी में ही आना होगा, दूसरी शर्त के तहत सुधा का कैंटीन जाना मना था और तीसरी शर्त थी कि सुधा कॉलेज के लड़कों से बात नहीं करेंगी.

सुधा अक्सर इस वाकये का जिक्र करते हुए बताती हैं कि पहली दो शर्तें तो पूरी हो गईं लेकिन तीसरी शर्त खुद उनके कॉलेज के लड़कों ने पूरी नहीं होने दी. जैसे ही सुधा ने फर्स्ट ईयर में टॉप किया, सारे लड़के खुद उनसे बात करने आने लगे. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की स्नातक में सुधा पूरे कर्नाटक में प्रथम रहीं.

सुधा मूर्ति ने हार नहीं मानी

उस दौर में सुधा के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई आसान नहीं थी. 600 की स्ट्रेंग्थ वाले कॉलेज में 599 लड़कों के बीच सुधा अकेली लड़की थीं. तब माना जाता था कि गणित लड़कों का विषय है और इंजीनियरिंग में लड़के ही आएंगे. और तो और पूरे कॉलेज में लड़कों के लिए ही वॉशरूम था. लेकिन सुधा ने यहां भी हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और फिर नौकरी खोजनी शुरू की.

टाटा में पहली महिला इंजीनियर बनीं सुधा

सुधा चौधरी ने एक पोस्टर देखा टेल्को (टाटा मोटर्स) कंपनी का जिसमें इंजीनियर के जरूरत थी. लेकिन शर्त ये थी कि पुरूष ही होना चाहिए. इस बात ने सुधा को थोड़ा निराश किया. उनके दिमाग में ख्याल आया कि लड़कियां क्यों इंजीनियर नहीं बन सकती.

इसके बाद उन्होंने एक पोस्टकार्ड खरीदा और अपनी सारी बात उस कार्ड में लिख जेआरडी टाटा को भेज दी. कुछ दिनों बाद कंपनी को ओर से विशेष साक्षात्कार के लिए बुलाया गया. सारे पैमानों पर खरी उतरने पर उन्हें नियुक्ति मिली. सुधा टाटा में काम करने वाली पहली महिला इंजीनियर बनीं.

सुधा मूर्ति का जवाब सुनकर हंस पड़े जेआरडी टाटा

एक बार टाटा ग्रुप के चेयरमैन जेआरडी टाटा (JRD TATA) ने सुधा मूर्ति ने उनसे नाम पूछा. उनका जवाब सुनकर वो भी हंस पड़े थे. सुधा मूर्ति (Sudha Murthy) से जवाब दिया, “सर जब मैंने टेल्को ज्वाइन किया था तब सुधा कुलकर्णी और अब सुधा मूर्ति.” इसके बाद 1981 में उन्होंने टेल्को कंपनी छोड़ दी.

एक बार फिर जेआरडी टाटा से उनका आमना-सामना हुआ. इस बार वो बोलीं कि मैं टाटा कंपनी को छोड़ रही हूं. जेआरडी टाटा थोड़ा चौंक गए और पूछा क्यों?. तब मूर्ति ने जवाब दिया कि मेरे पति इंफोसिस नाम की एक नई कंपनी खोलने जा रहे हैं मैं उनका हाथ बटाऊंगी. इतना सुनकर जेआरडी टाटा ने उनको शुभकामनाएं देते हुए सलाह भी दी.

जेआरडी टाटा ने कहा कि कोई भी शुरूआत दबे मन से मत करना. शुरूआत हमेशा फुल कॉन्फिडेंस से करना. तभी सफलता मिल पाएगी और हां जब तुम इस काबिल हो जाना तो समाज सेवा मत भूलना. क्योंकि समाज हमें बहुत कुछ देता है.

करीबियों को हमेशा मोटिवेट करते थे जेआरडी टाटा

जेआरडी टाटा यानी जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा ऐसे शख्स थे जो अपने करीबियों को हमेशा मोटिवेट करते थे. ऐसे ही एक वाकया इन्फोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति की पत्नी सुधा मूर्ति से जुड़ा हुआ है.

इस वाकये (जो भी ऊपर बताया गया है) का जिक्र सुधा ने अपनी बुक ‘द लास्टिंग लेगसी’ में किया है. जेआरडी टाटा के साथ काम कर चुकीं सुधा मूर्ति ने उनकी 100वीं बर्थ एनिवर्सरी बुक ‘द लास्टिंग लेगसी’ लॉन्च की थी.

रतन टाटा के पैर छूकर आशीर्वाद लिया

मंगलवार को टाईकॉन(TiECon) मुंबई 2020 कार्यक्रम में रतन टाटा को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. कॉर्पोरेट जगत के दूसरे बड़े नाम यानी इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने यह अवॉर्ड दिया और उस दौरान जो हुआ, वह देखते ही बनता है. यह तस्वीर उसी क्षण की है. 73 वर्षीय नारायणमूर्ति ने 82 साल के रतन टाटा पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया.

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