राजीव गांधी के बाद ऐसा करने वाले दूसरे प्रधानमंत्री होंगे नरेंद्र मोदी

नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन ने बुधवार को पीएम मोदी को एक ज्ञापन सौंपा है. इसमें एक नागा राष्ट्रीय ध्वज के जरिए नागा पहचान को अस्तित्व दिए जाने की मांग की गई है.

नागालैंड और मणिपुर को आजकल हाई अलर्ट पर रखा गया है. दरअलस इन दिनों केंद्र सरकार और NSCN(IM) के बीच ‘नागा शांति समझौता’ पर फाइनल राउंड की बातचीत चल रही है. ऐसे में अधिकारियों को इस बात का डर है कि बातचीत के बाद इन राज्यों के कुछ गुट अशांति फैलाने की कोशिश कर सकते हैं.

छह दशक से अटका है ‘नागा शांति समझौता’ 
नागालैंड के डीजीपी टी जॉन लॉन्गकुमेर ने कहा कि ‘नागा शांति समझौता’ पर पिछले छह दशक से बातचीत चल रही है. अगर यह समझौता हो गया तो हालात को व्यवस्थित करने में मुश्किलें आ सकती हैं. उन्होंने बताया कि सशस्त्र पुलिस की सात रिजर्व बटालियनों को तैनात किया जा चुका है. साथ ही राशन और ईंधन की व्यवस्था भी की गई है.

मणिपुर के उखरुल जिले में प्रशासन ने नागरिक आपूर्ति विभाग से खाने-पीने समेत सभी जरूरी चीजों को जमा करके रखने के लिए कहा है, ताकि हालात बिगड़ने पर दिक्कतों का सामना कम से कम करना पड़े.

मणिपुर में भी नागा समुदाय के लोग भारी संख्या में रहते हैं. पुलिस प्रशासन में पश्चिमी इम्फाल जिले में पोस्टेड सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं. NSCN की मुख्य मांग यह है कि क्षेत्र के नागा-आबादी वाले सभी इलाकों का एकीकरण कर दिया जाए. जबकि, मणिपुर हमेशा इसका कड़ा विरोध करता रहा है.

नागा पहचान को अस्तित्व दिए जाने की मांग
कई सिविल सोसायटी आर्गनाइजेशन और स्टूडेंट यूनियन्स पहले ही बातचीत से बाहर रखे जाने पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन सौंपा है. इसमें एक नागा राष्ट्रीय ध्वज के जरिए नागा पहचान को अस्तित्व दिए जाने की मांग की गई है.

केंद्र सरकार और NSCN(IM) के बीच आखिरी चरण की बातचीत में अलग झंडे और संविधान को लेकर गतिरोध खत्म नहीं किया जा सका. हालांकि, दोनों पक्ष इस पर दोबारा बातचीत के लिए सहमत हो गए हैं.

PM मोदी ने समझौते के लिए तय की 31 अक्टूबर की तारीख
पीएम मोदी ने इंटरलॉक्यूटर और नगालैंड के राज्यपाल आर.एन. रवि के लिए शांति समझौते पर पहुंचने के लिए 31 अक्टूबर की तारीख तय की है. जानकारों का मानना है कि जल्द ही शांति समझौते पर बात बन सकती है.

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय ऐतिहासिक मिजो समझौता और असम समझौता हुआ था. उस समय पूर्वोत्तर हिंसा की आग में झुलस रहा था. समझौते का बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य हो गए थे. अब पीएम मोदी के कार्यकाल में नगालैंड और मणिपुर में शांति लौटेने की संभावना है.

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