National Technology Day: इसी दिन देश ने रचा था इतिहास, जानें- पोखरण न्यूक्लियर टेस्ट की ये खास बातें

बहुत ही खुफिया तरीके से यह टेस्ट (Pokhran Nuclear Test) किया गया था, ताकि सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को इसकी भनक तक न लग सके, जो कि अपने सामने किसी और को शक्तिशाली बनते हुए नहीं देख सकता था.
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हर साल 11 मई का दिन नेशनल टेक्नोलॉजी डे के रूप में मनाया जाता है. यह दिन विज्ञान में दक्षता एवं प्रौद्योगिकी में हुए विकास को दर्शाता है. नेशनल टेक्नोलॉजी डे के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशवासियों को इस खास दिन की बधाई दी. पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, “नेशनल टेक्नोलॉजी डे पर देश उन सभी को सलाम करता और बधाई देता है, जो कि देश के विकास के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं.

उन्होंने अपने अन्य ट्वीट में लिखा, “आज टेक्नोलॉजी दुनिया को कोरोनावायरस से मुक्त करने के प्रयास में मदद कर रही है. मैं कोरोनवायरस को हराने के तरीकों पर रिसर्च और इनोवेशन में सबसे आगे खड़े लोगों को सलाम करता हूं. हम एक स्वस्थ और बेहतर ग्रह बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करते रहें.”

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इसके साथ ही मन की बात में पोखरण टेस्ट का जिक्र वाला वीडियो शेयर करते हुए पीएम मोदी ने लिखा, “1998 में हुए पोखरण टेस्ट ने दिखाया कि कैसे एक मजबूत राजनीतिक नेतृत्व बड़ा अंतर पैदा कर सकता है.”

National Technology Day का इतिहास

11 मई, 1998 में भारत ने पोखरण परमाणु का सफल टेस्ट किया था. आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि कैसे भारत ने अंतरिक्ष में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी प्रगति हासिल की. इसी दिन भारतीय सेना के पोखरण टेस्ट रेंज में पांच परमाणु बम विस्फोटों की सीरीज में भारत ने अपना पहला कदम रखा था.

11 मई को हुआ परमाणु टेस्ट, पांच पोखरण बम विस्फोटो में पहला टेस्ट था, जिसमें भारत को सफलता मिली. आज ही दिन भारत ने ऑपरेशन शक्ति मिसाइल को सफलतापूर्वण लॉन्च किया था.इस न्यूक्लियर टेस्ट से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में भारत ने पश्चिमी देशों के कभी खत्म न होने वाले प्रभुत्व को चुनौती दी थी.

बहुत ही खुफिया तरीके से यह टेस्ट किया गया था, ताकि सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को इसकी भनक तक न लग सके, जो कि अपने सामने किसी और को शक्तिशाली बनते हुए नहीं देख सकता था.

1998 से पहले 1995 में पोखरण न्यूक्लियर टेस्ट का पता अमेरिका को लग गया था, जिसके बाद अमेरिका ने भारत पर दवाब बनाया और तत्कालीन सरकार को टेस्ट रोकना पड़ा. हालांकि भारत हार मानने वालों में से नहीं था. 1998 में बहुत ही खुफिया तरीके से इस मिशन को अंजाम दिया गया, ताकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को कानों-कान खबर न हो और भारत इसमें सफल हुआ भी.

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