जानिए क्‍या है ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम, जिसमें शिरकत का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे पीएम मोदी

राजानीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत, अमेरिका से नज़दीकियों के चक्कर में अपने पुराने दोस्त से दूर होता जा रहा है.

नई दिल्ली: पीएम मोदी ने आज ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (ईईएफ) के 20वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग भाग लिया. इससे पहले बुधवार को पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का धन्यवाद करते हुए कहा कि ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम में मुझे बुलाना काफी सम्मान की बात है. भारत और रूस के बीच के संबंधों को नई दिशा देने का यह एक ऐतिहासिक मौक़ा है. मैं कल (गुरुवार) फोरम में हिस्सा लेने के लिए बेताब हूं.’

अब सवाल उठता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम में हिस्सा लेने के लिए बेताब क्यों थे? आख़िर इकॉनोमिक फोरम है क्या?

ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम

यह फोरम विश्व अर्थव्यवस्था के प्रमुख मुद्दों, क्षेत्रीय एकीकरण, औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्रों के विकास के साथ-साथ रूस और अन्य देशों के सामने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिये एक मंच देता है. इस मंच के ज़रिए रूस और एशिया प्रशांत के देशों बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को विकसित करने को लेकर बातचीत का माध्यम तैयार हुआ है. इस फोरम का मुख्यालय व्लादिवोस्तोक में स्थित है और प्रत्येक साल रूस के इसी शहर में बैठक बुलाई जाती है. इसकी स्थापना रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साल 2015 में की थी. भारत और रूस के बीच के संबंध हमेशा से बेहतर रहें हैं ऐसे में पीएम मोदी को इस मंच पर बुलाने से उम्मीद है कि भारत-रूस के बीच प्रगाढ़ता और भी ज़्यादा बढ़ेगी.

आज़ादी के बाद से ही भारत-रूस के बीच रहे हैं बेहतर संबंध

रूस (तात्कालिक- सोवियत संघ रूस) और भारत के बीच 1950 के दशक से ही मैत्रीपूर्ण संबंध रहा है. वहीं 1971 में भारत-सोवियत मैत्री संधि होने के बाद संबंधों को मज़बूती मिली. भारत ने रूस के साथ 9 अगस्त, 1971 को 20 वर्षीय सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किये थे, जिसके मुताबिक संप्रभुता के प्रति सम्मान, एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखना और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व कायम करना शामिल है.

साल 1993 में एक बार फिर से रूस और भारत के बीच शांति, मैत्री और सहयोग बनाए रखने के लिए नई संधि की, लेकिन उसका आधार भी बुनियादी सिद्धांतों को बनाया गया.

अमेरिका से नज़दीकियां रूस से बढ़ा रही दूरी

स्वतंत्रता के बाद से भारत को सबसे ज़्यादा हथियार रूस निर्यात करता था लेकिन वर्तमान समय में भारत, इज़राइल और अमेरिका से भी रक्षा उपकरण खरीद रहा है. हालांकि रूस से भारी मात्रा में हथियारों का आयात आज भी जारी है. सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का निर्माण दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों की कहानी बताने के लिए पर्याप्त है.

हालांकि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में देखा जाए तो भारत, अमेरिका के भी काफी क़रीब आ गया है. वहीं रूस का चीन और पाकिस्तान के साथ संबंध बढ़ रहा है. ऐसे में पीएम मोदी की अंतर्राष्ट्रीय नीतियों को लेकर सवाल उठने लगा था. राजानीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत, अमेरिका से नज़दीकियों के चक्कर में अपने पुराने दोस्त से दूर होता जा रहा है. ऐसे में भारत को ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम में निमंत्रण मिलना यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच के संबंध अभी बी बेहतर बने हैं.