इन बातों का रखें ध्यान, तभी करें रक्तदान का महादान

डोनर (Blood Donor) के कम्पलीट हेल्थ चेकअप के बाद ही ब्लड लिया जाता है. साथ ही यह भी ध्‍यान रखा जाता है कि ब्‍लड डोनर (Blood Donor) और एक्सेप्टर के ब्लड में सेम एंटीजेन होने चाहिए.
precautions to be taken while donating the blood, इन बातों का रखें ध्यान, तभी करें रक्तदान का महादान

रक्तदान महादान होता है, यह हम सबने सुना है, क्योंकि किसी की जिंदगी बचाने से बड़ा कुछ भी नहीं. ह्यूमन बॉडी में लगभग 5 लीटर ब्लड होता है. ब्लड में पाई जाने वाली लाल रक्त कणिकाओं (RBCs)  की मैक्सिमम लाइफ 120 दिन होती है. इसके बाद ये टूटती हैं, लेकिन साथ ही bone marrow  में ये लगातार बनती रहती हैं. इनके बनने और टूटने का प्रोसेस एक फिक्स रेशियो में होता रहता है, जिससे बॉडी में खून की कमी नहीं हो पाती है.

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ब्लड डोनेशन तब होता है जब एक हेल्दी इंसान अपनी मर्ज़ी से अपना ब्लड देता है और blood-transfusion  के लिए उसका इस्तेमाल होता है. Antigens  के बेस पर ब्लड को डिफरेंट टाइप (A, B, AB, O, RH, HR)  में बांटा गया है. यहां गौर करने की बात यह भी है कि जब भी किसी को ब्‍‍‍‍लड चढ़ाया जाता है तो एंटीजेन का मैच होना बेहद जरूरी होता, तभी किसी शख्‍स का डोनेट किया हुआ ब्‍लड जरूरतमंद पेशेंट को चढ़ाया जाता है.

वैसे कुछ ब्‍लड ग्रुप बेहद खास होते हैं, जैसे O ब्लड ग्रुप, इसे ‘Universal Donor’ और AB ब्‍लड ग्रुप को ‘Universal Acceptor’ कहते हैं.

टाइप ऑफ़ ब्लड डोनेशन –  कलेक्टेड ब्लड किसे चढ़ाया जाएगा, इस बेस पर ब्लड डोनेशन कई टाइप के होते हैं.

*Allogeneic/Homologous Donation- जब कोई डोनर किसी अनजान को चढाने के लिए blood bank  में खून देता है.

*Directed Donation- जब कोई इंसान फ्रेंड, फैमिली या किसी पर्टिकुलर इंसान को चढ़ाने के लिए ब्लड डोनेट करता है.

*Replacement Donation – जब ब्लड बैंक में अवेलेबल ब्लड का यूज़ करने के लिए का कोई अपना फ्रेंड/ फैमिली मेम्बर ब्लड डोनेशन करता है, ताकि वहां ब्लड की कमी न हो.

*Autologous Donation- जब किसी इंसान का खुद का ब्लड कलेक्ट कर बाद में उसे खुद चढ़ा दिया जाता है.

*Allogeneic Donation- जब लोग अपनी मर्ज़ी से ब्लड डोनेशन कैंप, हॉस्पिटल में यूज़ और मेडिसिन बनाने के लिए ब्लड डोनेट किया जाता है.

precautions to be taken while donating the blood, इन बातों का रखें ध्यान, तभी करें रक्तदान का महादान

 

ब्लड डोनेशन में सावधानियां- 

जहाँ हेल्दी इंसान का ब्लड किसी की जान बचा सकता है, वहीं बीमार/ अनहेल्दी इंसान का खून किसी के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है. इसलिए खून लेने-देने में बहुत सावधानी की आवश्यकता होती है. डोनर के कम्पलीट हेल्थ चेकअप के बाद ही ब्लड लिया जाता है. डोनर और एक्सेप्टर के ब्लड सेम एंटीजन के होने चाहिए.

किन कंडिशन में नहीं कर सकते हैं ब्लड डोनेशन-

*कोई सीरियस बीमारी या सर्जरी होने पर

*दो डोनेशन के बीच कम से कम 3 महीने का गैप हो

*कई लोगों के साथ फिजिकल रिलेशन होने पर

*एक साल के अन्दर तक एंटी- रेबीज या हेपेटाइटिस-C का इलाज हुआ हो

*डेंगू ,चिकनगुनिया होने पर 6 महीने तक ब्लड डोनेट नहीं कर सकते

*टैटू बनवाने के 1 साल तक ब्लड डोनेट नहीं कर सकते

किन बीमारियों में नहीं कर सकते हैं ब्लड डोनेशन-

हाई बीपी, कैंसर , हार्ट की बीमारी, अस्थमा , लीवर, किडनी में प्रॉब्लम होने पर, कोई स्किन की बीमारी होने पर, डाइबिटीज, टीबी, थाइराइड, पीलिया, मलेरिया, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां और HIV पॉजिटिव होने पर ब्लड डोनेट नहीं कर सकते हैं.

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