क्‍या है स्‍ट्रेस फ्रैक्‍चर? जिसने थाम दी है जसप्रीत बुमराह की रफ्तार

आमतौर पर ऐसा फ्रैक्‍चर तेज गेंदबाजों की लोअर बैक के वर्टेब्रे में होता है. एक बार स्‍ट्रेस फ्रैक्‍चर से जूझने वाले खिलाड़ी को दोबारा यह फ्रैक्‍चर होने का खतरा बढ़ जाता है.

जसप्रीत बुमराह को इस समय भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की रीढ़ कहा जाए तो गलत नहीं होगा. फिलहाल वह स्‍ट्रेस फ्रैक्‍चर से जूझ रहे हैं. बुमराह की चोट को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं. हालांकि वह पहले ऐसे गेंदबाज नहीं हैं जो स्‍ट्रेस फ्रैक्‍चर का शिकार हुए हों. ये वो बला है जिसने कई मशहूर तेज गेंदबाजों का करिअर प्रभावित किया है.

ऑस्‍ट्रेलिया के दिग्‍गज गेंदबाज डेनिस लिली को याद कीजिए. शुरू में उन्होंने भयंकर पीठ दर्द के साथ क्रिकेट खेला. विंडीज के पूर्व फर्स्‍ट क्‍लास क्रिकेटर रूडी वेबस्‍टर, जो कि रेडियोलॉजिस्‍ट भी थे, ने लिली का स्‍कैन किया. तब पता चला कि लिली के लोअर बैक की दो वर्टेब्रे में तीन क्रैक्‍स हैं. इसके बाद, लिली को लगातार मेडिकल स्‍टाफ की निगरानी में रहना पड़ा.

क्‍या है स्‍ट्रेस फ्रैक्‍चर?

हड्ड‍ियां जिंदा टिश्‍यू होती हैं, अगर उनपर अत्‍यधिक दबाव डाला जाए तो उन्‍हें नुकसान हो सकता है. ज्‍वलनशील कोशिकाओं का बढ़ना और हड्ड‍ियों में सूजन को बोन स्‍ट्रेस इंजरी या स्‍ट्रेस रिएक्‍शन कहते हैं. इसका पता MRI स्‍कैन में चल जाता है. लेकिन अगर ध्‍यान ना दिया जाए तो हड्डी की बाहरी मोटी परत- कॉर्टेक्‍स फट जाती है. इसी को स्‍ट्रेस फ्रैक्‍चर कहते हैं.

आमतौर पर ऐसा फ्रैक्‍चर तेज गेंदबाजों की लोअर बैक के वर्टेब्रे में होता है. इस हिस्‍से पर तब दबाव पड़ता है जब आप रीढ़ की हड्डी को खींचते हैं और फिर उसे दबाते हैं. अक्‍सर ये गेंदबाजी वाले हाथ के दूसरी तरफ होता है. यानी अगर दायें हाथ का गेंदबाज है तो उसकी बायीं तरफ के लोअर बैक में स्‍ट्रेस फ्रैक्चर हो जाता है.

क्‍यों होता है स्‍ट्रेस फ्रैक्‍चर?

स्‍ट्रेस फ्रैक्‍चर तब होता है जब अचानक से हड्डी के उस हिस्‍से पर लोड पड़े जो लगाई गई ताकत को अब्‍जॉर्ब और ट्रांसमिट ना कर सके. गेंदबाजी करते समय फ्रंट फुट पर बहुत ज्‍यादा दबाव पड़ता है. ज्‍यादा वर्कलोड को बोन स्‍ट्रेस इंजरी के पीछे की बड़ी वजहों में गिना जाता है. हालांकि इसके पीछे मेटॉबॉलिक वजहें भी हो सकती हैं.

खराब बोन डेंसिटी के चलते कई लोगों का शरीर विटामिन डी और कैल्शियम का पर्याप्‍त अब्‍जॉर्बशन/प्रोडक्‍शन नहीं कर पाता. यह भी हो सकता है कि कोई खास गेंद फेंकने पर गेंदबाज के शरीर के उसी हिस्‍से पर लोड बढ़ जाता है. 25 से कम उम्र वाले प्‍लेयर्स को होने वाली बोन स्‍ट्रेस इंजरी में उम्र भी एक अहम फैक्‍टर है.

सामान्‍य तौर पर, स्‍ट्रेस फ्रैक्‍चर को चार से छह सप्‍ताह में ठीक किया जा सकता है. हालांकि एक बार स्‍ट्रेस फ्रैक्‍चर से जूझने वाले को दोबारा यह फ्रैक्‍चर होने का खतरा बढ़ जाता है.

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