जानिए क्या है लोअर सर्किट, 3 साल बाद इसे क्यों शेयर बाजार में लगाया गया

शेयर बाजार (Share Market) में सर्किट (circuit) ब्रेकर लगाने का मतलब होता है भारी उतार-चढ़ाव को रोकना होता है. शेयर बाजार में दो सर्किट ब्रेकर होते हैं.

शेयर बाजार (Share Market) में लगातार गिरावट हो रही है. शुक्रवार को बाजार खुलते ही निफ्टी (nifty) में 966 अंकों की गिरावट के बाद लोअर सर्किट (lower circuit) लग गया है. बैंक निफ्टी (bank nifty) में भी लोअर सर्किट लगा है. वहीं, 45 मिनट के लिए बाजार में ट्रेडिंग रुक गई है. इस बीच रुपए ने रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया है. आज के सर्किट के बाद एक्सचेंजों ने सभी पेंडिंग ऑर्डर रद्द किए है.

क्या है सर्किट ब्रेकर

शेयर बाजार में सर्किट ब्रेकर लगाने का मतलब होता है भारी उतार-चढ़ाव को रोकना होता है. शेयर बाजार में दो सर्किट ब्रेकर होते हैं. इसमें अपर सर्किट शेयर बाजार में तब लगाया जाता है, जब यह एक तय सीमा से ज्यादा बढ़ जाता है. वहीं, सेबी ने सर्किट के लिए तीन ट्रिगर लिमिट 10%, 15% और 20% तय की है. इसका मतलब है कि बाजार जितने पर है उसके 10%, 15% और 20% घटने और बढ़ने पर सर्किट लगाया जाता है.

क्या है लोअर सर्किट

इसी तरह जब शेयर बाजार एक निर्धारित सीमा से ज्यादा गिरने लगे तो लोअर सर्किट लगाया जाता है. यानी शेयर बाजार जितने पर चल रहा है, उसके 10%, 15% और 20% घटने पर लोअर सर्किट लगाया जाता है.

बताया जा रहा है कि इससे पहले साल 2017 के मई महीने में शेयर बाजार में गिरावट के चलते लोअर सर्किट लगाना पड़ा था. इससे पहले 17 मई 2004 में P-NOTE के चलते बाजार गिरा था. वहीं 22 जनवरी 2008 में ग्लोबल बाजारों में मंदी के चलते भी बाजार में भारी गिरावट देखते हुए लोअर सर्किट लगाया गया था. हालांकि, इससे शेयर निवेशकों को पैनिक नहीं होना की जरूरत है.

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