क्या है One Nation One Ration Card स्कीम? जानिए डिटेल में

जैसा कि सभी जानते हैं कि राशन कार्ड (Ration Card) राज्य सरकार (State Government) द्वारा जारी किए जाते हैं और लाभार्थी सरकार द्वारा लाइसेंस्ड दुकानों से ही अनाज ले सकते हैं. अगर कोई लाभार्थी दूसरे राज्य में शिफ्ट होता है तो उसे नया राशन कार्ड बनवाना पड़ता है
one nation one ration card scheme, क्या है One Nation One Ration Card स्कीम? जानिए डिटेल में

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को देश में, एक देश-एक राशन कार्ड (One Nation One Ration Card)स्कीम का ऐलान किया. आर्थिक पैकेज की दूसरी क्सत का ब्योरा देते हुए निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि 3,500 करोड़ रुपये की लागत से अगले दो महीनों अनुमानित 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को फ्री में अनाज दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि 8 करोड़ प्रवासी प्रजदूर जिनके पास केंद्रीय या राज्य पीडीएस कार्ड नहीं है, उन्हें प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम अनाज और दो महीने 1 किलोग्राम चना मिलेगा. इससे प्रवासी लाभार्थी देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान (FPS) से पीडीएस अनाज का उपयोग कर सकेंगे. इस स्कीम से 23 राज्यों में लगभग 67 करोड़ राशनकार्ड धारकों को फायदा मिलेगा.

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सीतारमण ने कहा कि राज्यों में मौजूद 67 करोड़ राशनकार्ड धारक, जो कुल PDS आबादी का 83 फीसदी हैं, वे अगस्त, 2020 तक नेशनल पोर्टेबिलिटी के तहत आ जाएंगे और मार्च, 2021 से पहले 100 फीसदी नेशनल पोर्टेबिलिटी हासिल कर ली जाएगी.

क्या है वन नेशन, वन राशन कार्ड स्कीम?

केंद्र सरकार ने पिछले साल तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच और महाराष्ट्र और गुजरात के बीच ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ स्कीन के तहत राशन कार्ड की इंटर-स्टेट पोर्टेबिलिटी के लिए पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया था. जैसा कि सभी जानते हैं कि राशन कार्ड राज्य सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं और लाभार्थी सरकार द्वारा लाइसेंस्ड दुकानों से ही अनाज ले सकते हैं. अगर कोई लाभार्थी दूसरे राज्य में शिफ्ट होता है तो उसे नया राशन कार्ड बनवाना पड़ता है, जो वहां कि सरकार जारी करती है.

इन राशन कार्ड में कई तरह की समस्याएं भी हैं. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई महिला शादी करके अपने पति के घर चली जाती है तो उसका नाम अपने परिजनों के राशन कार्ड से हट जाता है और फिर पति के परिवार के राशन कार्ड में उसका नाम दर्ज होता है. वन नेशन, वन राशन कार्ड स्कीम TPDS वितरण में इस अंतर को दूर करने का प्रयास करती है.

यह योजना देश के इंटरनल माइग्रेशन को ध्यान में रखकर हुए शुरू की गई है, क्योंकि लोग बेहतर रोजगार के अवसरों और जीवन स्तर के उच्च मानकों की तलाश में देश के अलग-अलग राज्यों में जाते रहते हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार, 4.1 करोड़ लोग इंटर-स्टेट माइग्रेंट्स थे और 1.4 करोड़ लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में रह रहे थे.

यह स्कीम मोबइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह ही है. जैसे टेलीकॉम कंपनी बदलने पर मोबाइल नबंर नहीं बदलता है, वैसे ही राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी से राशन कार्ड नहीं बदलेगा. अगर आप दूसरे राज्य में जाते हैं तो आपको नया राशन का जारी नहीं करवाना होगा, बल्कि आप अपने पुराने राशन कार्ड का ही इस्तेमाल कर सकेंगे. पूरे देश में एक ही राशन कार्ड लागू होगा, जिसके तहत आप किसी भी राज्य की सरकारी दुकान से राशन खरीद सकेंगे.

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