पावर ग्रिड फेल होना क्या है, जिससे मुंबई में ठप हो गई बिजली की सप्लाई

देश में कुल पांच पावर ग्रिड (Power Grid) हैं. नॉर्थर्न ग्रिड में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ आता है. वहीं, ईस्टर्न ग्रिड में पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा और सिक्किम आता है.

Electricity, Uttar Pradesh

महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजधानी मुंबई (Mumbai) और मुंबई महानगर के ठाणे, रायगढ़ और पालघर में ग्रिड (Grid) फेल होने के कारण सोमवार को बिजली गुल हो गई. इसका सीधा असर लोगों के दैनिक जीवन पर देखने को मिला. ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने कहा कि ठाणे के कलवा में 400 किलोवाट लाइनों पर कुछ नियमित मेंटनेंस का काम चल रहा है. उन्होंने कहा, “सभी लोड को दूसरे सर्किट में शिफ्ट कर दिया गया था, जो कुछ तकनीकी खराबी का सामना कर रहा था और मुंबई-ठाणे के बड़े हिस्से में बिजली की आपूर्ति बाधित हो गई.”

बता दें कि बिजली सप्लाई के लिए लाइनों के जिस नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है उसे पावर ग्रिड कहते हैं. देश में कुल पांच पॉवर ग्रिड हैं. नॉर्थर्न ग्रिड में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ आता है. वहीं, ईस्टर्न ग्रिड में पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, ओडिशा और सिक्किम आता है.

पावर ग्रिड फेल होने की वजह

देश में बिजली का ट्रांसमिशन 49-50 हर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी पर होता है. जब भी ये फ्रीक्वेंसी उच्चतम या न्यूनतम स्तर तक पहुंच जाती है तो पावर ग्रिड फेल होने का खतरा बढ़ जाता है. इस स्थिति में ट्रांसमिशन लाइन पर ब्रेकडाउन लग जाता है, जिसे ग्रिड फेल होना कहते हैं. ग्रिड फेल होते ही बिजली की सप्लाई रुक जाती है.

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जिन स्टेशनों से बिजली की सप्लाई का काम होता है वहां पर फ्रीक्वेंसी का ध्यान रखना जरूरी है. इन स्टेशनों को 48.5 से 50.2 हर्ट्ज के बीच फ्रीक्वेंसी रखनी होती है. नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर इसके लिए राज्यों पर नजर रखता है. कई बार राज्य लिमिट से ज्यादा पावर की सप्लाई करने लगते हैं जिसके चलते ग्रिड फेल होने का खतरा बन जाता है.

क्या है पावर डिस्ट्रीब्यूशन

सबसे पहले बिजली का उत्पादन किया जाता है. बिजली उत्पादन का काम पानी से यानी कि डैम में पानी इकाट्ठा करके किया जाता है. कोयला से भी बिजली का उत्पादन होता है. इसके अलावा हवा से भी बिजली बनाई जाती है.

बिजली की सप्लाई उन राज्यों या इलाकों में की जाती है, जिनसे इसके लिए करार होता है. बिजली सप्लाई को पॉवर ट्रांसमिशन कहते हैं. इसके बाद संबंधित पॉवर स्टेशनों से बिजली ग्राहकों तक पहुंचाई जाती है. इसे पावर डिस्ट्रीब्यूशन कहते हैं.

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