सेलेक्ट कमिटी और स्टैंडिंग कमिटी में क्या है अंतर, जानिए कैसे करती हैं काम

राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने कहा है कि कमिटी की बैठकों में सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है, जानिए इन कमिटी के बारे में.
What is the difference in standing committee and select committee, सेलेक्ट कमिटी और स्टैंडिंग कमिटी में क्या है अंतर, जानिए कैसे करती हैं काम

राज्यसभा अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने सभी सांसदों को सख्त हिदायत दी कि स्टैंडिंग कमेटी और सेलेक्ट कमिटी की बैठकों में जरूर उपस्थित रहें. सरोगेसी बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजते वक्त नायडू ने कहा कि अगर कोई सदस्य लगातार दो बैठकों में अनुपस्थित रहता है तो उसे कमिटी से हटाने का नियम है.

सवाल ये है कि राज्यसभा अध्यक्ष ने जिन दो तरह की कमिटी का जिक्र किया है उनमें अंतर क्या है? इस लेख में हम वही जानने का प्रयास करेंगे.

संसद अपने सभी काम निपटाने के लिए कई तरह की कमिटी यानी संसदीय समितियों का गठन करती है. सरकारी कामकाज पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखना भी इनका काम होता है. संसदीय समितियां दो प्रकार की होती हैं. सेलेक्ट कमिटी यानी स्थायी समिती और स्टैंडिंग कमिटी यानी तदर्थ समिति.

स्थायी समिति (सेलेक्ट कमिटी)

लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति, विशेषाधिकार समिति और सरकारी आश्वासन समिति आदि स्थायी समितियां हैं. इनका काम नियत होता है. कुल 24 प्रकार की स्थायी समितियां विभागों के काम के आधार पर बांटी गई हैं जिनमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य होते हैं.

हर समिति में सदस्यों की संख्या अलग होती है. राज्यसभा के नियम संख्या 125 के मुताबिक कोई भी सदस्य किसी बिल को स्थायी समिति के पास भेजने का प्रस्ताव कर सकता है. प्रस्ताव पास होने पर बिल संबंधित स्थायी समिति को भेज दिया जाता है. बता दें कि लोकसभा व राज्यसभा, दोनों में स्थायी समितियां होती हैं.

तदर्थ समिति (स्टैंडिंग कमिटी)

स्टैंडिंग कमिटी यानी तदर्थ समिति विशेष कामों के लिए गठित की जाती हैं. इन समितियों का अस्तित्व तभी तक बना रहता है जब तक वो काम पूरा करके रिपोर्ट सदन को न सौंप दें. तदर्थ समिति दो प्रकार की होती हैं, प्रवर समिति और संयुक्त समिति. इन दोनों समितियों का काम होता है सदन में पेश किए गए विधेयकों पर विचार करना. हालांकि ये कतई जरूरी नहीं कि सदन के द्वारा सभी विधेयक इन समितियों के पास विचार के लिए भेजे जाएं.

सदन द्वारा भेजे गए विधेयकों पर प्रवर समिति गंभीरता से विचार करती है, उस पर अपने सुझाव दे सकती है, विधेयक से संबंधित संगठनों व विशेषज्ञों की राय ले सकती है. विधेयक पर विचार के बाद यह समिति अपने सुझाव और संशोधन सदन को सौंप देती है. अगर समिति का कोई सदस्य किसी प्रकार की असहमति दर्ज कराता है तो उसके साथ रिपोर्ट सदन भेजी जाती है.

ये भी पढ़ें:

‘अपने फेफड़ों पर जोर मत डालिए, उस पर पहले से ही है दबाव’ वेंकैया नायडू ने क्यों कही यह बात
IIM में 96 फीसदी प्रोफेसर अगड़ी जाति के, अब लागू करना होगा जातिगत आरक्षण!

Related Posts