अफवाहों का बाजार गर्म अगर कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दें तो क्या होगा?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता है. 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के वक्त जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह अपनी स्वतंत्र रियासत चाहते थे.

नई दिल्ली: अमरनाथ यात्रियों के लिए एडवाइजरी और अतिरिक्त सुरक्षाबलों को बढ़ाने के बाद से ही घाटी में आशंकाओं का बाजार गर्म हो चुका है. अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही है. सरकार का कहना है कि अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले की आशंका के चलते ऐसा किया जा रहा है वहीं तमाम सियासतदान सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि सरकार संविधान में घाटी को दिए गए विशेष दर्जे को ही समाप्त करना चाहती है जिसके कारण ये सब तैयारियां की जा रही है. फिलहाल जम्मू कश्मीर के राज्यपाल ने लोगों से अपील की है कि वो अफवाहों से दूर रहे.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता है. 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के वक्त जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह अपनी स्वतंत्र रियासत चाहते थे. पर उस वक्त की परिस्थितियों की वजह से उन्होंने कुछ शर्तों के साथ भारत में विलय पर सहमति जताई. 1951 में राज्य को संविधान सभा को अलग से बुलाने की अनुमति प्रदान की गई. 1956 में राज्य के संविधान का काम पूरा हुआ और फिर 1957 में राज्य में विशेष संविधान लागू कर दिया गया.

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का सही समय यही-कल्याण सिंह
20 फरवरी को राजस्थान के राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म करने का समय आ गया है. उनका मानना है कि अनुच्छेद 370 कश्मीर से देश को अलग करता है, ये हटना ही चाहिए. अनुच्छेद हटाने का काम सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा ही व्यक्ति कर सकता है और किसी में हिम्मत नहीं है.

अनुच्छेद 370 पर सभी सियासी दलों को एक साथ आना होगा-वी.के. सिंह
18 फरवरी को विदेश राज्य मंत्री और पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मुद्दे पर सभी राजनीतिक पार्टियों को एक साथ आना होगा.
अनुच्छेद 370 आखिर क्या है?

अनुच्छेद 370 के मायने क्या हैं?

संविधान का अनुच्छेद 370 सही मायनों में जम्मू-कश्मीर के रिश्तों की रूपरेखा तय करता है. प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला के बीच पांच महीनों के मध्य कई दौर की बैठकों के बाद अनुच्छेद 370 को संविधान में जोड़ा गया.

indian army in kashmir
कश्मीर में भारी मात्रा में भारतीय सेना तैनात है.

अनुच्छेद 370 के प्रावधान क्या कहते हैं?

रक्षा, विदेश नीति और संचार मामलों को छोड़ कर किसी अन्य मामले से जुड़ा कानून बनाने और लागू करवाने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की परमिशन की जरूरत पड़ती है. विशेष दर्जे की अड़चन के कारण जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 356 लागू नहीं होता. जाहिर है इसी के चलते राष्ट्रपति के पास प्रदेश के कानून को बर्खास्त करने के अधिकार नहीं हैं.

अनुच्छेद 370 से कश्मीर कैसे हुआ भारत से कुछ दूर?

1-जम्मू-कश्मीर के लोगों के पास दोहरी नागरिकता होती है.

2-प्रदेश का अलग से राष्ट्रध्यज होता है.

3.जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का होता है.

धारा 35A की कुछ अहम बातें

जम्मू-कश्मीर के संविधान की धारा 35A देश के लिए कुछ हानिकारक साबित हुई. इस धारा के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में देश के किसी अन्य प्रदेश का निवासी जमीन या किसी अन्य तरह की जायदाद नहीं खरीद सकता. देश के संविधाान के अनुच्छेद 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वो भी जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होता. इसके अलावा अनुच्छेद 370 के तहत राष्ट्रपति जम्मू-कश्मीर में आर्थिक आपातकाल नहीं लगा सकते. प्रदेश में आपातकाल सिर्फ दूसरे देशों से जंग की स्थिति में ही लागू हो सकता है.

stone pelters in kashmir
कश्मीर में पत्थरबाज सेना की कार्रवाई में खलल डालते हैं.

अनुच्छेद 370 को हटा पाना कितना संभव?

2015 में सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 370 से जुड़ी एक अर्जी की सुनवाई में कहा था कि इसे संविधान से हटाने का फैसला सिर्फ और सिर्फ संसद कर सकती है. 2015 में ही जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा था कि संविधान के भाग 21 में अस्थायी प्रावधान शीर्षक होने के बावजूद अनुच्छेद 370 एक स्थायी प्रावधान है.

अनुच्छेद 370 पर सियासी दलों के स्टैंड क्या हैं?

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भी बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 को खत्म करने का वादा किया था. बीजेपी अनुच्छेद 370 को संविधान निर्माताओं की गलती मानती है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुताबिक 370 भारत और जम्मू-कश्मीर के बीच रिश्तों की एक कड़ी है या तो 370 अनुच्छेद रहेगा या फिर कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं होगा. पीडीपी का मानना है कि अनुच्छेद 370 देश का जम्मू-कश्मीर से किया हुआ वादा है. ऐसे में जम्मू-कश्मीर की आवाम से किए गए वादे का सम्मान करना चाहिए.

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