Coronavirus: जानें कैसा होता है थ्री लेयर फैब्रिक मास्क? जिसकी WHO ने दी है सलाह

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा है कि नई रिसर्च के आधार पर WHO ने फ्रैब्रिक मास्क की सलाह दी है, क्योंकि इसमें कम से कम अलग-अलग मैटीरियल की तीन लेयर्स होती हैं.
WHO new guidelines to wear three layer face mask against COVID 19, Coronavirus: जानें कैसा होता है थ्री लेयर फैब्रिक मास्क? जिसकी WHO ने दी है सलाह

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपनी पहले की स्थिति में बदलाव करते हुए कोरोनावायरस (Coronavirus) के प्रसार को रोकने के लिए नई गाइडलांइस जारी की हैं, इनके मुताबिक अब सभी को पब्लिक में जाते वक्त थ्री लेयर वाला फैब्रिक मास्क या नॉन मेडिकल मास्क पहनना होगा. जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है और किसी तरह की अन्य बीमारी से ग्रसित हैं तो ऐसे लोग उन जगहों पर जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना संभव नहीं है, मेडिकल मास्क पहन सकते हैं.

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इसके अलावा बाकी के अन्य लोगों को थ्रीलेयर फैब्रिक मास्क का इस्तेमाल करने को ही कहा गया है, ये मास्क संक्रामक बीमारी होने से बचाता है. WHO ने कहा है कि सरकारों को लोगों को उन जगहों पर मास्क पहनने के लिए प्रेरित करना चाहिए जहां ‘महामारी’ बड़े स्तर पर फैल रही है और इन उनक जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना मुश्किल हो. इनमें पब्लिक ट्रांसपोर्ट, दुकानों समेत सभी भीड़-भाड़ वाले इलाके शामिल हैं.

इसलिए जरूरी है थ्री लेयर मास्क

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा है कि नई रिसर्च के आधार पर WHO ने फ्रैब्रिक मास्क की सलाह दी है, क्योंकि इसमें कम से कम अलग-अलग मैटीरियल की तीन लेयर्स होती हैं. कुछ देशों में पब्लिक के बीच मास्क पहनना पहले से ही अनिवार्य है, जिसमें भारत, सिंगापुर, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, अर्जेंटीना जैसे देश शामिल हैं.

WHO ने कहा है कि जो लोग भी कपड़े का मास्क पहन रहे हैं वो थ्री लेयर फैब्रिक मास्क में कॉटन से बना होता है, इसके बाद इसमें पॉलीप्रोपाइलीन और फिर एक सिंथेटिक लेयर होती है. एडवाइजरी में ये भी बताया गया है कि मास्क को दोबारा इस्तेमाल करते वक्त क्या सावधानी बरतनी चाहिए.

डॉक्टर ट्रेडरोस ने कहा, सलाह में कहा गया है लोग खुद को खुद ही संक्रमित कर सकते हैं अगर वो बिना हाथ धोए या सैनिटाइज किए बार-बार मास्क को छूते हैं, या पहनते और उतारते हैं. ऐसे में मास्क पहनना आपको सुरक्षा का झूठा दिलासा दे सकता है. ज्यादातर लोग हैंड हाइजीन और फिजिकल डिस्टेंसिंग का ख्याल नहीं रखते हैं

WHO की पुरानी गाइडलाइंस के मुताबिक स्वास्थ्यकर्मियों, कोरोना संदिग्ध या कोरोना मरीजों की देखभाल करने और खांसने और छींकने तक ही मास्क का उपयोग करने को कहा गया था.

रिसर्च भी करती है दावा कि ये कॉटन मास्क है बेहतर

तेजी से फैलते कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए किस कौन सा मास्क पहनना चाहिए इसके लिए WHO की सलाह ने एक हद तक फुलस्टॉप लगाने की कोशिश की है. एक इंटरनेशनल रिसर्च ग्रुप ने पाया था कि COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिए कपड़े से बना मास्क बेहतर होता है.

रिसर्च में सुझाव दिया गया था कि कॉटन के कपड़े के साथ कई सिक्योरिटी लेयर्स से जुड़ा मास्क कोरोनावायरस को रोकने में कारगर है. मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के कैथरीन क्लासे और उनके सहयोगियों के अध्ययन में पाया गया था कि कपड़े से बना मास्क पिछले 100 सालों से आस-पास के संक्रमण से बचाने के लिए बेहतरीन हैय

1960 और 70 के दशक में किए गए रिसर्च से भी ये पता चला था कि कपास और मलमल से बने थ्री लेयर वाले मास्क, सतहों और वायुजनित सूक्ष्म जीवों के 99 प्रतिशत संक्रमण को रोकते हैं. इन रिसर्च में ये भी कहा गया था कि ये मास्क सबसे सूक्ष्म कणों को भी रोकते, जिन्हें एरोसोल के रूप में जाना जाता है, जो कि कोरोनावायरस के मुख्य तरीकों में से एक है.

कैथरीन क्लासे और उनके सहयोगियों के मुताबिक समीक्षा से पता चला है कि कपड़ा प्रदूषण के कणों को अच्छे से रोक सकता है, यानि की एयरोसोल के आकार के कणों को भी. अध्ययन में कॉटन से बने 4 लेयर्स मास्क का जिक्र भी किया गया. दावा किया गया कि ये 99 फीसदी संक्रमण को कम कर सकता है. वहीं डिस्पोजेबल मेडिकल मास्क 96 से 99 फीसदी कणों को ही रोक पाया.

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