निर्भया गैंगरेप कांड के दोषियों को अब तक क्‍यों नहीं हुई फांसी? जानें क्‍या है पूरी प्रक्रिया

फांसी की सजा का ऐलान करने के बाद अदालत डेथ वॉरंट भेजता है. इस पर फांसी की तारीख और समय लिखा रहता है.

निर्भया गैंगरेप कांड में चार दोषियों को अब तक फांसी नहीं हो सकी है. फांसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए निर्भया के परिजनों ने 16 नवंबर को पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की थी. दिल्‍ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार को तिहाड़ जेल से स्‍टेटस रिपोर्ट मांगी है. भारत में सजा सुनाए जाने और फांसी के बीच लंबा फासला रहा है.

सजा सुनाते ही नहीं हो जाती फांसी

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश के मुताबिक जिसे मौत की सजा दी जाती है उसके रिश्तेदारों को कम से कम 15 दिन पहले खबर मिल जानी चाहिए ताकि वो आकर मिल सकें. इसकी व्यवस्था होनी चाहिए कि सजा पाने वाले व्यक्ति के रिश्तेदार उसका अंतिम संस्कार कर सकें.

फांसी की सजा का ऐलान करने के बाद अदालत डेथ वॉरंट भेजता है. इस पर फांसी की तारीख और समय लिखा रहता है. मसलन निर्भया के दोषियों को लेकर कोर्ट के डेथ वारंट पर तय तिथि और समय लिखा जाएगा. उसी निर्धारित तिथि और समय पर दोषियों को फांसी पर तब तक लटकाया जाएगा. जब तक कि उनकी मौत नहीं हो जाए. मौजूदा मामले में अभी डेथ वारंट कोर्ट ने नहीं जारी किया है. उसने जेल प्रशासन से दोषियों के मामले में स्टेटस रिपोर्ट तलब की है. रिपोर्ट मिलने के बाद कोर्ट डेथ वारंट जारी करेगा.

क्‍या है फांसी देने की प्रक्रिया?

इसके बाद फांसी देने से एक दिन पहले जेल सुपरिटेंडेंट की मौजूदगी में इंजीनियर फांसी स्थल की जांच करता है. वहीं, फांसी पर लटकाने वाले शख्‍स की मेडिकल जांच भी की जाती है. सामान्‍यतया फांसी देने की प्रक्रिया में करीब दो घंटे का वक्‍त लगता है. फांसी के समय से दो घंटे पहले उस शख्‍स को नींद से उठाकर नहाने के लिए भेजा जाता है. इसके बाद अगर वह कोई धार्मिक किताब पढ़ना चाहता है या फिर प्रार्थना करना चाहता है तो इसकी इजाजत दी जाती है.

साथ ही उसकी मांग के आधार पर पसंदीदा खाना खिलाया जाता है. फांसी पर लटकाने से पहले सूती कपड़े से कैदी के चेहरे को ढकना जरूरी है. इसके बाद उसे 30 मिनट तक फंदे पर लटकाया जाता है. मेडिकल ऑफिसर जब उसे मृत घोषित कर देते हैं तो तभी उसे नीचे उतारा जाता है गौरतलब है कि फांसी देने के बाद शव को उसके परिजनों को सौंप दिया जाता है. अब यह परिवार को तय करना होता है शव का अंतिम संस्‍कार वह किस तरह करें.

16 दिसंबर 2012 को दहल गया था देश

16 दिसंबर, 2012 की रात दक्षिण दिल्ली में एक चलती बस में छह लोगों ने ‘निर्भया’ (23) के साथ मिलकर दुष्कर्म किया था. सामूहिक दुष्कर्म इतना विभीत्स था कि इससे देशभर में आक्रोश पैदा हो गया था, और सरकार ने दुष्कर्म संबंधी कानून और सख्त किए थे. छह दुष्कर्म दोषियों में से एक नाबालिग था, जिसे बाल सुधार गृह में भेज दिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया. एक दोषी ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी.