अब मंगल ग्रह पर आलू ही नहीं, एवोकाडो को भी ले जाया जा सकेगा

प्रयोग की शुरुआती सफलता पर टीम की एक प्रोफेसर नीना मिटर (Neena Mitter) ने कहा कि हम कह सकते हैं कि जब मंगल ग्रह (Mars) के लिए मानव उड़ान संभव होगी तब उनके साथ एवोकाडो (Avocado) को भी मंगल पर भेज दिया जाएगा.

साल 2015 में आई हॉलीवुड की एक साइंस फिक्शन फिल्म ‘द मार्शियन’ में दिखाया गया था कि मंगल ग्रह (Mars) पर आलू की खेती की जा सकती है, जिस पर वैज्ञानिकों ने काफी प्रयोग किए हैं. इसी के साथ वैज्ञानिक अब इस लिस्ट में एवोकाडो (Avocado) को भी शामिल करने की योजना बना रहे हैं जिसके लिए उन्होंने काफी रिसर्च की है.

ऑस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड विश्वविद्यालय (Queensland University) के शोधकर्ताओं ने बताया कि एवोकाडो की टहनी को क्रायोजेनिक तरीके से फ्रीज करके मंगल ग्रह पर ले जाया जा सकता है और साथ ही वहां एक स्वस्थ पौधे के रूप में उगाया भी जा सकता है. इस प्रयोग में शोधकर्ताओं ने कम से कम 80 प्रतिशत सफलता पाई है. इससे उम्मीद लगाई जा रही है कि एवोकाडो को एक खाद्य पदार्थ के रूप में मंगल ग्रह पर ले जाया जा सकता है.

क्रायोप्रिजर्वेशन के जरिए किया गया प्रयोग

इसके लिए शोधकर्ताओं ने एवोकाडो पौधे के तने को एक क्रायोट्यूब में रखा और उसके बाद उन्होंने उसे एक एल्यूमीनियम के फॉयल पेपर और फिर तरल नाइट्रोजन में स्टोर किया. फिर वैज्ञानिकों ने एवोकाडो पौधे की टहनियों को क्रायोस्प्रेसिव किया, उन्हें गर्म तापमान पर रखा और पाया कि दो महीने के अंदर उस पर नई पत्तियां आना शुरू हो गई थीं. टीम का कहना है कि तने को ठीक होने में लगभग 20 मिनट लगे और दो महीने के अंदर नई पत्तियां आ गईं.

क्या है क्रायोप्रिजर्वेशन

क्रायोप्रिजर्वेशन (Cryopreservation) एक तकनीक है जिसके जरिए जीवित कोशिकाओं या सेल्स (Cells) को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इस तकनीक में तापमान को -320 डिग्री फारेनहाइट पर रखा जाता है और इसमें ड्राई आइस या तरल नाइट्रोजन का इस्तेमाल होता है और इसके लिए बिजली की भी जरूरत नहीं होती है. तापमान इतना कम होता है कि आम इंसान इसमें एक पल भी ठहर नहीं सकता लेकिन इसी तापमान में इंसान के शरीर को सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

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कम तापमान में हर तरह की रासायनिक और जैविक गतिविधियां (Biological Activities) बंद हो जाती हैं और सेल्स को संरक्षित (Preserve) किया जा सकता है. इस तकनीक का इस्तेमाल केले, अंगूर की बेल और सेब समेत अन्य पौधों पर भी किया जाता है.

एवोकाडो जर्मप्लाज्म को रखा जा सकेगा सुरक्षित

लगभग 40 सालों की मेहनत के बाद वैज्ञानिकों ने एवोकाडो के लिए क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक तैयार की है. क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के PhD छात्र क्रिस ओ ब्रायन ने कहा कि इस नई तकनीक का एक मकसद कीटों, कवक और बीमारियों से एवोकाडो की खेती और उसके आनुवांशिक संसाधनों (जर्मप्लाज्म) को संरक्षित करना भी है. उन्होंने कहा कि यह तकनीक एवोकाडो जर्मप्लाज्म (Genetic Resources) को सफलतापूर्वक फ्रीज करके और एक लंबे समय तक के लिए प्लांट सामग्री को संरक्षित करने का एक प्रभावी तरीका है.

एवोकाडो की पर्याप्त सप्लाई में भी होगा सहायक

ओ ब्रायन (O’Brien) ने इस रिसर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्होंने द हंटिंगटन लाइब्रेरी, आर्ट म्यूजियम और कैलिफोर्निया के बॉटनिकल गार्डन की प्रोफेसर नीना मिटर और डॉ. रकेल फोल्गाडो के साथ मिलकर काम किया.

प्रयोग की शुरुआती सफलता पर टीम की प्रोफेसर नीना मिटर (Neena Mitter) ने कहा कि हम कह सकते हैं कि जब मंगल ग्रह के लिए मानव उड़ान संभव होगी तब उनके साथ एवोकाडो को भी मंगल पर भेज दिया जाएगा. टीम का कहना है कि इस नई रिसर्च से दुनियाभर में एवोकाडो की होने वाली कम सप्लाई की समस्या को भी दूर किया जा सकता है.

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