सुहागिन महिलाओं और कुंवारी लड़कियों के लिए खास है हरतालिका तीज, जानें पूजा का मुहूर्त और व्रत के बारे में

हरतालिका तीज (Hartalika Teej) झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में खास तौर पर मनाया जाता है. हरतालिका तीज का व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं.

हरतालिका तीज (Hartalika Teej) का पर्व 21 अगस्त 2020 को शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा. हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. हरतालिका तीज का व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं. हरतालिका तीज झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में खास तौर पर मनाया जाता है.

इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं. महिलाएं, माता पार्वती को हरतालिका मां के रूप में पूजती हैं और उपने पति के लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं.

देश में हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज जैसे अलग-अलग तीज के त्योहार मनाए जाते हैं.

पूजा का शुभ मुहूर्त

प्रात:काल हरतालिका पूजा मुहूर्त: सुबह 5:53 से 8:29 am

प्रदोशकला हरतालिका पूजा मुहूर्त: शाम 6:54 से 9: 06 pm

तृतीया तिथि : 21 अगस्त को सुबह 2 बजकर 13 मिनट पर शुरुआत होगी.

तृतीया तिथि: 21 अगस्त की रात को 11 बजकर 2 मिनट पर खत्म होगा.

 पति की लंबी उम्र और कुंवारी लड़कियां अच्छे वर के लिए रखती हैं व्रत

यह व्रत हरियाली तीज से अलग होता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और कुंवारी लड़कियां अच्छा पति पाने के लिए यह व्रत रखती हैं. हरतालिका के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं. इस दिन महिलाए सूर्योदय से पहले उठकर सज सवरकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं. हरतालिका तीज के दिन घर की महिलाएं सुहगिनों को सिंदूर, मेहंदी, बिंदी, चूड़ी, काजल आदि चीजे देती हैं.

 हरतालिका तीज की महत्वता

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती, हिमालय की पुत्री देवी शैलपुत्री के रूप में जन्मी थीं. उनके पिता ने नारद मुनि के सुझाव के बाद उनका विवाह भगवान विष्णु से करने का वादा किया. जब देवी पार्वती को इस बात का पता चला, तो वह तुरंत अपनी सहेली के पास गई और उन्हें राजा हिमालय की योजना के बारे में बताया.

फिर यह माना जाता है कि देवी पार्वती की सखियों ने उन्हें जंगल जाने के लिए कहा ताकि शादी की योजना विफल हो जाए. माता पार्वती (Parvati) की सखियों (को आलिका कहा जाता हैं) ने उनका हरण कर उन्हें जंगल भेजा इसके बाद से इस व्रत का नाम हरतालिका तीज पड़ गया.

जंगल में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए तप किया और फिर शिवजी ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में अपना लिया. उसी दौरान माता पार्वती ने भगवान विष्णु को अपना भाई बना लिया. इस दिन विशेष तौर पर भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा होती है.

इस दिन महिलाएं नए कपड़े पहनकर देवी पार्वती और भगवान शिव से प्रार्थना करती हैं. वे एक दिन का निर्जला उपवास रखती हैं, जो हरतालिका तीज की शाम के दौरान शुरू होता है और पूरे एक दिन बाद टूटता है, जिसमें महिलाएं पानी तक नहीं पीती हैं. महिलाएं देवी पार्वती की पूजा करती है. इस दिन देवी पार्वती की पूजा मां हरतालिका के नाम से की जाती है.

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