एक देश कई नाम, सभ्यता की शुरुआत से अब तक नामों का सफर, ‘इंडिया’ बनाम ‘भारत’ की जंग

प्राचीन मेसोपोटामिया (Mesopotamia) आलेख में सिंधु घाटी सभ्यता को ‘मेलुहा (Meluha)’ नाम से पुकारा गया है. इसी तरह आर्यावर्त और वैदिक ग्रंथों में ‘जम्बूद्वीप (Jambudweep)’ या 'जामुन के पेड़ों की भूमि' जैसे नाम भी देखने को मिलते हैं. वहीं जैन साहित्य में इसे ‘नाभिवर्ष’ कहा गया है.
Journey of names of India, एक देश कई नाम, सभ्यता की शुरुआत से अब तक नामों का सफर, ‘इंडिया’ बनाम ‘भारत’ की जंग

देश में नामों को लेकर बहस और चर्चा कोई नई बात नहीं है. ये नाम हमारे गौरव इतिहास की गाथा बयां करते हैं. लेकिन देश के नाम का मामला अब अदालत की चौखट पर पहुंच गया है. दिल्ली के एक व्यापारी ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर संविधान के ऑर्टिकल 1 में संशोधन कर ‘इंडिया’ शब्द को हटाने की मांग की.

इंडिया नाम है गुलामी और दासता का प्रतीक

अदालत में याचिकाकर्ता की तरफ से दलील दी गई कि इंडिया नाम भारत को अंग्रेजों ने दिया था और ये उनकी गुलामी और दासता का प्रतीक है. इसलिए इसे ‘भारत’ या ‘हिंदुस्तान’ से बदला जाए. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ‘इंडिया’ बाहर से लिया गया एक ग्रीक शब्द है, जबकि ‘भारत’ हमारे इतिहास के गौरव को दर्शाता है और इतिहास में ‘भारत माता की जय’ के नारों का बार-बार ज़िक्र है.

देखिये फिक्र आपकी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 9 बजे

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से किनारा करते हुए कहा कि यह मामला सरकार का विषय है. सुप्रमी कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबड़े ने कहा कि संविधान में ‘भारत’ को ही ‘इंडिया’ कहा गया है. आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट 2016 में भी इस तरह की एक याचिका को खारिज कर चुका है. देश की आज़ादी के बाद काफी वाद-विवाद होने पर ‘इंडिया’ और ‘भारत’ दोनों को संविधान में जगह दी गई.

सभ्यता की शुरुआत से अब तक नामों का सफर

शायद कम ही लोगों को मालूम हो कि प्राचीन मेसोपोटामिया आलेख में सिंधु घाटी सभ्यता को ‘मेलुहा’ नाम से पुकारा गया है और इसका ज़िक्र पुरातत्वविद जेन. आर. मैक इंतोश ने अपनी किताब ‘दि ऐनशिऐंट इंडस वैली: न्यू परस्पेक्टिव’ में किया है. लेकिन ‘मेलुहा’ नाम पीछे छूटता गया और ‘भारत‘, ‘भारतवर्ष’ इतिहास में दर्ज होता चला गया. इन नामों का ज़िक्र पुराणों में भी मिलता है. इसी तरह आर्यावर्त और वैदिक ग्रंथों में ‘जम्बूद्वीप’ या ‘जामुन के पेड़ों की भूमि’ जैसे नाम भी देखने को मिलते हैं. वहीं जैन साहित्य में इसे ‘नाभिवर्ष’ कहा गया है.

आज़ादी के बाद देश के नाम पर चर्चा

आज़ादी के बाद बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन किया गया. 29 अगस्त, 1947 को गठित इस कमेटी ने 17 सितंबर, 1949 को चर्चा के बाद ‘इंडिया’ और ‘भारत’ दोनों को संविधान में सम्मिलित किया और एक प्रसिद्ध वाक्य जोड़ा गया- ‘इंडिया दैट इज़ भारत’.

भारत के उत्तर प्रदेश की प्रथम विधानसभा में विधायक रहे हरगोविंद पंत देश का नाम केवल ‘भारत’ या ‘भारतवर्ष’ ही करना चाहते थे. उनका कहना था कि आजादी के बाद भी यदि हम ‘इंडिया’ शब्द से चिपके रहते हैं तो यह केवल यह दर्शाएगा कि हमारे देश की संपत्ति और स्वतंत्रता को लूटने वालों के द्वारा दिए गए इस अपमानजनक शब्द के होने पर हमें कोई शर्म नहीं है. लेकिन कमेटी ने किसी भी सुझाव को स्वीकार नहीं किया.

संविधान लागू होने के बाद नाम पर विवाद

संविधान लागू होने के बाद भी देश के नामकरण पर कई विवाद सामने आए हैं. उदाहरण के लिए, 2005 में, IAS के एक रिटायर्ड सदस्य और वी. सुंदरम नाम के एक स्वतंत्र पत्रकार ने एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें ‘इंडिया’ नाम के साथ ‘भारत’ का उपयोग करने के लिए कहा गया. 2012 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शांताराम नाइक ने भी इसी तरह के सुझाव के साथ राज्यसभा में एक प्रस्ताव रखा था.

अब केंद्र के फैसले का इंतजार

नाम बदलने के लिए सबसे हालिया याचिका को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब देश का नाम पहले ही ‘भारत’ है तो फिर इस प्रकार की याचिका का क्या मतलब है? हालांकि, कोर्ट ने संबंधित मंत्रालय को इस बारे में गौर करने के लिए भी कहा है. यह निश्चित है कि संविधान सभा में ये दोनों ही नाम बहुत ही चर्चित रहे होंगे. अब इस मामले पर केंद्र के रुख का इंतजार करना होगा.

देखिये परवाह देश की सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर हर रात 10 बजे

Related Posts