25 साल पुराना मसला सुलझा, ब्रू जनजाति के 30 हजार शरणार्थियों को मिलेगी नागरिकता

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 'सभी ट्राइबल भाइयों को बधाई कि पिछले कई साल से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ.'
Bru Tribe 30 thousand refugees, 25 साल पुराना मसला सुलझा, ब्रू जनजाति के 30 हजार शरणार्थियों को मिलेगी नागरिकता

गृह मंत्रालय ने ब्रू जनजाति को लेकर बड़ा फैसला लिया है. मिजोरम और त्रिपुरा के साथ केंद्र सरकार ने ब्रू जनजाति के मसले पर समझौता किया है. इस तरह से पिछले 25 साल से ब्रू जनजाति रिफ्यूजी का मुद्दा सुलझाया गया है.

ब्रू जनजाति के करीब 30 हजार शरणार्थियों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा. साथ ही उन्हें सरकार की तरफ से वित्तीय मदद दी जाएगी. सभी ब्रू जनजाति की फैमिली को प्लाट और खेती की जमीन दी जाएगी. साथ ही हर महीने 5 हजार रुपये की मदद भी जाएगी.

ब्रू जनजाति को त्रिपुरा के वोटर लिस्ट में शामिल किया जाएगा. मिजोरम में मिजो और ब्रू जनजाति के बीच संघर्ष के चलते ब्रू जनजातियों के करीब 30 हजार लोग त्रिपुरा में शरणार्थी बनकर रह रहे थे.

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘सभी ट्राइबल भाइयों को बधाई कि पिछले कई साल से चली आ रही समस्या का समाधान हुआ. त्रिपुरा सीएम, मिजोरम सीएम, व अन्य नेता हैं उनको बधाई, 1996 में मिजोरम से करीब तीस हजार लोग त्रिपुरा के टेंपरेरी कैंप में रखे गए, इनको सम्मान के साथ रखने की व्यवस्था की गई थी.’

उन्होंने कहा, “मोदीजी के इनीशिएटिव के कारण एक नए सिरे से वार्ता शुरू हुई. अंत में समाधान यही हुआ कि करीब तीस हजार ब्रू रियांग समुदाय के लोगों को त्रिपुरा में बसाया जाएगा. मकान, चार लाख रुपए व अन्य सुविधाएं दी जाएंगी.”

गृहमंत्री ने कहा कि 600 करोड़ का पैकेज भारत सरकार ने इन तीस हजार लोगों को दिया है. ये नार्थईस्ट का बहुत पुराना मसला था. आज इसका हल निकला है. अब मिजोरम और त्रिपुरा की सरकार इनके कल्याण के लिए काम करेगी.

मिजोरम में हर विधानसभा सीट पर औसत मतदाताओं की संख्या 19000 के आसपास है. 40 सीटों वाली मिजोरम विधानसभा में से 9 विधानसभा क्षेत्रों में ब्रू जनजाति के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

ब्रू जनजाति के मतदाताओं की सबसे ज्यादा संख्या मामित जिले में है. मामित के अंदर तीन विधानसभाएं (हाच्चेक, डाम्पा और मामित) आती हैं. मालूम हो कि मिजोरम में कुल 7,68,181 वोटर हैं.

ब्रू जनजाति के अंदर तकरीबन एक दर्जन उपजातियां आती हैं. मिजोरम में ब्रू अनुसूचित जनजाति का एक समूह माना जाता है. वहीं, त्रिपुरा में यह एक अलग जाति है. त्रिपुरा में इन्हें रियांग नाम से पुकारा जाता है.

साल 1996 में मिजो समुदाय और ब्रू जनजाति के बीच सांप्रदायिक दंगा हुआ था. ये दंगा ब्रू जनजाति के पलायन का कारण बना था. इसके बाद ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट (बीएनएलएफ) और राजनीतिक संगठन ब्रू नेशनल यूनियन (बीएनयू) का गठन हुआ. इन्होंने एक स्वायत्त जिले की मांग रखी थी.

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