5 बड़ी ख़बरें जो पुलवामा धमाके में ‘उड़’ गईं!

पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हमले के बाद पूरे देश का ध्यान कुछ खास खबरों से हट गया. यहां पेश हैं वो पांच बड़ी खबरें जो पुलवामा हमला ना होता तो देश की बड़ी खबरें बन सकती थीं. 1. प्रियंका गांधी वाड्रा के सियासी ट्रेलर के बाद फिल्म 11 फरवरी को ‘मिशन यूपी’ के नाम […]

पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हमले के बाद पूरे देश का ध्यान कुछ खास खबरों से हट गया. यहां पेश हैं वो पांच बड़ी खबरें जो पुलवामा हमला ना होता तो देश की बड़ी खबरें बन सकती थीं.
1. प्रियंका गांधी वाड्रा के सियासी ट्रेलर के बाद फिल्म
11 फरवरी को ‘मिशन यूपी’ के नाम से प्रियंका गांधी वाड्रा का औपचारिक सियासी आगाज़ हुआ. 11,12,13 फरवरी को प्रियंका गांधी ने काफी सुर्खियां बटोरीं. 14 फरवरी को पुलवामा हमले के बाद लोगों का ध्यान कश्मीर पर था इसलिए प्रियंका की सियासी गतिविधियां मद्धम पड़ गईं. 18 फरवरी के बाद प्रियंका गांधी की वापसी खबरों में हुई लेकिन बड़ी कवरेज उन्हें नहीं मिली. हालांकि वो मैराथन बैठकों के ज़रिए कांग्रेस का ग्राउंड तैयार करती गईं. 18 फरवरी को प्रियंका गांधी की सालगिरह भी थी लेकिन उन्होंने पुलवामा धमाके की वजह से सेलिब्रेट नहीं किया.
2. रॉबर्ट वाड्रा से ED की पूछताछ का घटनाक्रम
12 फरवरी तक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा की ED के सामने चार बार पेशी हुई. इसके बाद पुलवामा की खबरों ने वाड्रा की खबरों को सुर्खियों से बेदखल कर दिया. 19 फरवरी को ED  ने लंदन संपत्ति खरीद मामले में वाड्रा को पांचवीं बार तलब किया और धनशोधन मामले में सवालों की फेहरिस्त के साथ लंबी पूछताछ की. 20 फरवरी यानि बुधवार को छठी बार मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED दफ्तर में वाड्रा की पेशी हुई.
3. 14 फरवरी के बाद ममता बनर्जी की लीड स्टोरीज़
13 फरवरी को दिल्ली में हुंकार रैली के बाद ममता बनर्जी कोलकाता लौट आईं. 14 फरवरी को पुलवामा में धमाके की वजह से उनसे संबंधित खबरों पर विराम लगा. चार दिनों की चुप्पी के बाद ममता ने 18 फरवरी को बीजेपी- आरएसएस पर दंगा फैलाने की कोशिश का इल्ज़ाम लगाया. पुलवामा की खबरों में ये खबर भी दब गई. 19 फरवरी को भी ममता ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर खुद का फोन टेप करने के आरोप जड़े. ये खबर भी मीडिया में जगह बना पाने में नाकाम रही.
4. राफेल विवाद पर लगातार अपडेट्स
13 फरवरी को राफेल विवाद सौदे पर कैग ने रिपोर्ट पेश की. कैग रिपोर्ट में दावा किया गया कि यूपीए की तुलना में डील 2.86% सस्ती हुई. इस रिपोर्ट पर सियासत गर्माना शुरू हुई ही थी कि 14 फरवरी को पुलवामा में आतंकी हमले की खबर आ गई. कई दिनों तक कैग रिपोर्ट पर मीडिया में चर्चा थमी रहीर. 19 फरवरी को पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी लगाकर मामला फिर गर्माने का प्रयास किया. अर्ज़ी में दावा था कि राफेल डील पर केंद्र सरकार की तरफ से गलत जानकारियां पेश की गईं. इस अर्ज़ी में ज़िम्मेदार अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई मुकदमा दर्ज़ करने की मांग हुई.
5. राम मंदिर की खबरों पर लगा विराम
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राम मंदिर मामले ने फिर तूल पकड़ा था. 14 फरवरी के आतंकी हमले ने इस मामले में किसी भी चर्चा को बड़े पैमाने पर चर्चा का विषय बनने नहीं दिया. 17 फरवरी को द्वारका-शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद फिर सीन में आए, लेकिन चैनलों की ध्यान अभी भी पुलवामा पर था. उन्होंने अयोध्या राम मंदिर का शिलान्यास कार्यक्रम स्थगित कर दिया. 20 फरवरी को अयोध्या में परमहंस दास ने राम मंदिर के लिए पूजित शिलाओं का दान किया और फिर से इस ख़बर में जान फूंकने की कोशिश की. शीला पूजन कार्यक्रम पर संत समाज की ओर से सवाल उठे, लिहाज़ा नई बहस की शुरूआत हो गई. संतों की तकरार के बीच 19 फरवरी को देवकीनंदन ठाकुर ने राम मंदिर से पुलवामा के शहीदों की तुलना करके हेडलाइन बनने की कोशिश की मगर सफल नहीं हो सके. ठाकुर ने कहा था कि देश में एक नहीं 42 मंदिर टूटे. इस पूरे घटनाक्रम के बीच 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई की तरफ सारी निगाहें हैं.