विश्व पुस्तक मेले में कुमार विश्वास ने की शिरकत, ‘फिर मेरी याद’ पर कही ये बात

इस बार पुस्तक मेले में फिर मेरी याद, कुमार विश्वास का कविता संग्रह लॉन्च हुआ है. जो उनकी पहली किताब के प्रकाशन के 12 साल बाद प्रकाशित हुई है.
Poet Kumar Vishwas, विश्व पुस्तक मेले में कुमार विश्वास ने की शिरकत, ‘फिर मेरी याद’ पर कही ये बात

विश्व पुस्तक मेले में शनिवार को कुमार विश्वास ने शिकरत की. कुमार को देखकर लोगों में और भी उत्साह भर गया. विश्व पुस्तक मेले के आठवें दिन राजकमल प्रकाशन के स्टॉल जलसाघर में कवि कुमार विश्वास ने अपनी किताब फिर मेरी याद पर बातचीत की.

इस बार पुस्तक मेले में फिर मेरी याद, कुमार विश्वास का कविता संग्रह लॉन्च हुआ है. जो उनकी पहली किताब के प्रकाशन के 12 साल बाद प्रकाशित हुई है. जिसमें उन्होंने अपनी जीवन के कुछ पहलुओं, यात्राओं को कविताओं के माध्यम से साझा किया है. इस संग्रह में गीत, कविता, मुक्तक, कला और अशआर सबकी बहार है. नामवर सिंह ने किताब के बारे में लिखा था, “कुमार विश्वास ने अपने नाम को और विश्वास शब्द को सार्थक किया है. नए लेखकों और कवियों के लिए उनके प्रयासों में भी उन्हें बड़ी कामयाबी मिली है.”

कुमार विश्वास ने कहा, किताब अपने आप में मुश्किल चीज है. पाठकों की ज़बरदस्त भीड़ के बीच उन्होंने अपनी कुछ कविताओं का पाठ भी किया. अपनी आलोचना की किताब ‘कठिन का अखाड़ेबाज़ और अन्य निबंध’ पर बात करते हुए व्योमेश शुक्ल ने कहा, ‘वाद-विवाद और आलोचना की संस्कृति को ये निजाम दबाना चाहता है.’

राजकमल प्रकाशन के स्टॉल से कविता संग्रह काजल न लगाना और कठिन का अखाड़ेबाज और अन्य निबंध का लोकार्पण. कई नई कविताओं की किताबों का लोकापर्ण जलसाघर के मंच से किया गया. इसमें व्योमेश शुक्ल की ‘ काजल लगाना भूलना, प्रियदर्शन की ‘काजल लगाना भूलना, अरुण देव की ‘उत्तर पैगम्बर शामिल है.

मेले में जलसाघर के स्टॉल पर प्रतिनिधि कहानियां चन्द्रकांता का लोकार्पण किया गया. अपनी किताब पर बातचीत करते हुए चंद्रकांता ने कहा, मैं एक कश्मीर विस्थापित हूं. कश्मीरियत हमें सामाजिक संस्कृति विरासत में मिली है.0 वो मेरे स्वभाव और लेखनी में भी ढल गई.

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