यूएन में जिनपिंग का महाज्ञान है, जो एक बार फिर ड्रैगन को बेनकाब करने के लिए काफी

आज टीवी9 भारतवर्ष भी देश की जनता के लिए यूएन में दिए शी जिनपिंग (Xi Jinping) के हर झूठे दावे की पोल पट्टी खोलेगा.ये भी आपको बताएगा कैसे ड्रैगन के खाने के दांत और दिखाने के दांत अलग-अलग हैं, और कैसे हिंदुस्तान 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत को जीता है.

पिछले 9 महीने में आपने शी जिनपिंग (Xi Jinping) की ये आवाज नहीं सुनी होगी,ना ही लाल बादशाह के इतने बड़े बोल सुने होंगे. क्योंकि दुनिया को कोरोना का दर्द देने वाले जिनपिंग अबतक सिर्फ फोटो सेशन के लिए ही बाहर निकलते रहे हैं.प्रोपेगेंडा वीडियो बनवाने के लिए ही बीजिंग (Bijing) वाला महल छोड़ते रहे हैं.

लेकिन जैसे ही दुनिया को ज्ञान देने का वक्त आया वो वीडियो संदेश से यूएन की जनरल असेंबली में अवतरित हो गए.जिनपिंग ने मुंह में राम, बगल में छुरी वाली कहावत को 100 फीसदी सच साबित कर दिया.तानाशाह जिनपिंग ने यूएन की जनरल असेंबली में बहरूपिया बनकर उपदेशों की झड़ी लगा दी.

जिनपिंग ने कहा…

  • एक देश दुनिया का बॉस नहीं बन सकता.कोई देश दूसरे देशों को नियंत्रित ना करे.टकराव की जगह संवाद लाना होगा.
  • दादागीरी की जगह बातचीत को बढ़ावा देंगे.
  • ये कथनी और करनी में कोई भी तालमेल ना रखने वाले जिनपिंग का महाज्ञान है,जो एक बार फिर ड्रैगन को बेनकाब करने के लिए काफी है.

जिनपिंग के हर झूठे दावे की खुली पोल

आज टीवी9 भारतवर्ष भी देश की जनता के लिए यूएन में दिए शी जिनपिंग (Xi Jinping) के हर झूठे दावे की पोल पट्टी खोलेगा.ये भी आपको बताएगा कैसे ड्रैगन के खाने के दांत और दिखाने के दांत अलग-अलग हैं, और कैसे हिंदुस्तान ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत को जीता है.पूरी दुनिया को अपना परिवार मानता हैं. लेकिन पहले बात जिनपिंग के हवा हवाई दावे की.यूनाइटेड नेशन्स की 75 वीं वर्षगांठ पर आयोजित आम सभा में जिनपिंग ने कहा कि…

”किसी भी देश के पास ये अधिकार नहीं है कि वो दूसरे देशों पर अपना प्रभुत्व दिखाए.दूसरे देशों के भविष्य को नियंत्रित करे और प्रगति का सारा फायदा खुद ही ले. किसी भी देश को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है.बड़े देशों को अंतरराष्ट्रीय नियमों को मानने की जरूरत है.” – शी जिनपिंग, राष्ट्रपति, चीन (यूएन जनरल असेंबली)

दुनिया को दिखाने के लिए ड्रैगन की दोहरी चाल

जिनपिंग ने जो कुछ भी कहा सच उसके उलट है. चीन डिप्टी सुपरपावर से सुपरपावर बनना चाहता है.दुनिया के छोटे देशों पर कब्जा करना चाहता है.22 देशों की जमीन हड़पने की साजिश रचता है, और तो और पिछले 6 महीने से LAC पर भारत की सीमा में घुसकर बैठा है.चीन के हठ से ही हालात इतने बिगड़े हैं कि किसी भी वक्त जंग हो सकती है.लेकिन दुनिया को दिखाने के लिए ड्रैगन ने दोहरी चाल चल रखी है. दुनिया के सामने शांति का दिखावा कर रहा है तो एलएसी पर लगातार अपने सैनिक तैनात कर रहा है.यानी चीन के इरादे दोहरे हैं.

जिनपिंग ने आगे कहा कि ”दुनिया में दोहरे मानदंड के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. अंतरराष्ट्रीय नियमों से छेड़छाड़ न हो और न ही इनका इस्तेमाल किसी देश को नुक़सान पहुंचाने के लिए हो. हमें टकराव की जगह संवाद लाना होगा, दादागीरी की जगह बातचीत को बढ़ावा देना होगा.हमें बहुध्रुवीय दुनिया को स्वीकार करना होगा.”-शी जिनपिंग, राष्ट्रपति, चीन (यूएन जनरल असेंबली)

यही चीन का दोहरापन है.देश जानता है संवाद राग अलापने वाले चीन ने हर बार बातचीत के बाद भारत को धोखा दिया.बातचीत के दौरान भी सैनिकों की तैनाती बता रही है कि वो लद्दाख सीमा पर अपनी गिद्ध दृष्टि जमाए हुए हैं.बॉर्डर से वो सेना हटाने को राजी नहीं.मंशा साफ है कि अगर वो शांति चाहता है तो लद्दाख मोर्चे पर 50 हजार सैनिकों की तैनाती क्यों की है, लड़ाकू विमान तैनात क्यों किए, मिसाइलों को भारत की तरफ क्यों मोड़ा.

भारत ने दुनिया को ड्रैगन के एजेंडे से किया अलर्ट

ऐसे हालात में जब संयुक्त राष्ट्र 75 साल का हो गया है.दूसरे विश्व युद्ध के बाद इसे बनाने का लक्ष्य भी था कि दुनिया कहीं तीसरे युद्ध की तरफ़ बढ़े तो उसे रोकने वाला कोई हो.प्रधानमंत्री मोदी ने जब जनरल असेंबली को संबोधित किया तो दुनिया को ड्रैगन के एजेंडे से अलर्ट करते हुए यही बातें कहीं…

”भारत यूएन चार्टर का शुरू से हिस्सा रहा है.भारत का अपना दर्शन भी ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का रहा है. हम पूरी दुनिया को अपना परिवार मानते हैं.हालांकि अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है. संयुक्त राष्ट्र के भीतर भी सुधार की ज़रूरत है.”

उम्मीद है पीएम मोदी के सुझाव से यूएन में बदलाव आएगा लेकिन चीन यूएन की शर्तों पर नहीं चलता.संकल्प उसके लिए कोई मायने नहीं रखते.क्योंकि जिनपिंग की शैतानी चाल के आगे उसका पूरा मुल्क सरेंडर है,पर भारत हर साजिश का माकूल जवाब देने के लिए सतर्क है तैयार है.

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